अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, बॉश जैसे क्लाइंट्स को प्लास्टिक पैकेजिंग में कटौती करने में मदद कर रहा दिल्ली स्थित पैकमैन, खड़ा किया 20 करोड़ रुपये का कारोबार

अमेजॉन, फ्लिपकार्ट, बॉश जैसे क्लाइंट्स को प्लास्टिक पैकेजिंग में कटौती करने में मदद कर रहा दिल्ली स्थित पैकमैन, खड़ा किया 20 करोड़ रुपये का कारोबार

Wednesday January 15, 2020,

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देश को सिंगल यूज़ प्लास्टिक से बचाने के लिए पैकमैन अहम रोल अदा कर रही है। पैकमैन इको-फ्रेंडली, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग उत्पादों का निर्माण कर रही है, जिसका इस्तेमाल अमेज़न और फ्लिपकार्ट जैसी बड़ी कंपनियाँ कर रही हैं।

गौरव जालान, संस्थापक, पैक्मैन पैकेजिंग

गौरव जालान, संस्थापक, पैक्मैन पैकेजिंग



अमेरिकी कॉमिक बुक्स और फिल्मों में, सुपरमैन, बैटमैन और आयरन मैन पृथ्वी को काल्पनिक खतरों से बचाते हैं। लेकिन भारतीय उद्यमी गौरव जालान के दिमाग की उपज पैकमैन (Packman) एक वास्तविक जीवन, रोजमर्रा के खतरे, प्लास्टिक पैकेजिंग के खिलाफ सुरक्षा के लिए मिशन पर है।


यह भारतीय कंपनी अमेजॉन इंडिया, फ्लिपकार्ट, सैमसंग, बॉश और अन्य ग्राहकों को इको-फ्रेंडली, बायोडिग्रेडेबल पैकेजिंग उत्पादों की आपूर्ति करती है। ग्रेटर नोएडा में अपने कारखाने में, पैकमैन पैकेजिंग विभिन्न शेप और साइज में कागज-बेस्ड कोरोगेटेड बॉक्सेस (corrugated boxes एयर कॉलम वाले पेपरबोर्ड) बनाती है। ये इलेक्ट्रॉनिक्स, जूते, खाद्य पदार्थ, कपड़े आदि को पैकेज करने के लिए उपयोग किए जाने वाले परिचित, भूरे रंग के कार्डबोर्ड बॉक्स होते हैं।


पैकमैन नालीदार रोल (corrugated rolls), बबल रोल, बबल पाउच, कूरियर बैग, पीओडी जैकेट, डक्ट टेप, ई-कॉमर्स शिपिंग बैग, और भी बहुत कुछ बनाता है। इन्हें सीधे ग्राहकों को बेचने के अलावा, इसके पास एक ईकॉमर्स स्टोर है जहां इन उत्पादों को खरीदा जा सकता है।


गौरव का दावा है कि

“पैकेजिंग बनाने के लिए उपयोग किया जाने वाला मटेरियल पुनर्नवीनीकरण कागज, खाद्य गुणवत्ता के कागज और बायोडिग्रेडेबल पेपर से आता है। आज, पैकमैन 1 लाख कोरोगेटेड बॉक्सेस तक का निर्माण कर सकता है और हर दिन 300 से अधिक भारतीय शहरों में शिप कर सकता है।”

दिल्ली में रजिस्टर्ड पैकमैन सालाना 20 करोड़ रुपये का कारोबार करता है और उसके पास 105 कर्मचारी हैं।


कुछ यूं हुई शुरुआत

जब पैकमैन पहली बार शुरू किया गया था, तो यह एक अलग नाम से था: स्वास्तिक पैकेजिंग। 2002 में कॉलेज से स्नातक होने के बाद गौरव ने स्वास्तिक शुरू किया था। वे कहते हैं,

"मैं हमेशा उद्यमी बनना चाहता था। मैंने 2000 के दशक की शुरुआत में पैकेजिंग उद्योग में काफी संभावनाएं देखी थीं। मैंने अक्सर देखा कि मोबाइल फोन, मिनरल वाटर और अन्य उत्पाद अपनी खास पैकेजिंग के साथ आते हैं। मुझे एहसास हुआ, कोई भी सही तरह की पैकेजिंग के बिना उत्पादों को बना और बेच नहीं सकता है। इसने मुझे इस उद्योग में एक उद्यम शुरू करने के लिए प्रेरित किया।”

उनकी उद्यमशीलता की यात्रा एचडीएफसी बैंक से 33 लाख रुपये के ऋण के साथ शुरू हुई, लेकिन यह आसान नहीं था। गौरव का कहना है कि बैंक अधिकारियों और निवेशकों को दिए गए व्यवसाय प्रस्ताव को जीतना चुनौतीपूर्ण था। हालांकि किसी तरह वे बैंक अधिकारियों को समझाने में कामयाब रहे, और निर्माण इकाई स्थापित करने के लिए उस धन का इस्तेमाल किया। उन्होंने अपने उत्पादों को ऑनलाइन सूचीबद्ध भी किया और उनका दावा है कि वे भारत के पहले पैकेजिंग सलूशन वाले ई-कॉमर्स स्टोर हैं।





स्वास्तिक पर उनका एकल स्वामित्व था, और व्यापार शुरू में कोरोगेटेड शीट्स और रोल बनाने पर केंद्रित था। 2011 में, गौरव अपनी प्रोडक्ट रेंज का विस्तार और विविधता चाहते थे। उन्होंने इसे एक निजी लिमिटेड कंपनी में बदल दिया और इसका नाम बदलकर पैकमैन पैकेजिंग कर दिया।


वे बताते हैं,

“नए ब्रांड के साथ, हमने ग्राहकों के लिए अपने स्वनिर्धारित लोगो, डिजाइन, ग्राफिक्स, चित्र आदि को प्रिंट करने के लिए हाई-एंड प्रिटिंग तकनीकों में लाना शुरू किया। अब, हम फूड पैकेजिंग, दवा पैकेजिंग, शिपमेंट पैकेजिंग, लक्जरी पैकेजिंग, बायोडिग्रेडिबल, बैग और ई-कॉमर्स पैकेजिंग बनाने के फील्ड में हैं।”

पैकेजिंग प्रोडक्ट का लक्ष्य एक विविध मार्केट पर है। इसकी निर्माण इकाई अपने बड़े ग्राहकों के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन और आपूर्ति समर्थन की ओर अग्रसर है। सोशल मीडिया मार्केटिंग और ब्लॉग इसकी डिजिटल उपस्थिति को बढ़ाते हैं।


पैकेजिंग प्रोडक्ट्स को प्रतिस्पर्धी दरों पर बेचा जाता है, गौरव बताते हैं कि मॉडल कैसे काम करता है। वे कहते हैं,

“हम एक लागत-प्लस-मूल्य निर्धारण रणनीति का उपयोग करते हैं। कीमत मुख्य रूप से उत्पादन की लागत को कवर करती है। यह हमें उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद करता है, और यह हमारी लागत को कम करता है। इस प्रकार, हम अपने मूल्य निर्धारण को बाजार में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकते हैं।”

पैकमैन ने दिल्ली एनसीआर के बाहर ऑर्डर पूरा करने के लिए डिलीवरी पार्टनर ब्लू डार्ट और फेडएक्स के साथ करार किया है। राजधानी क्षेत्र में, पैकमैन अपने स्वयं के डिलीवरी वैन फ्लीट का यूज करता है, जिसे एक ईआरपी प्रणाली से लैस एक इनडोर टीम द्वारा प्रबंधित किया जाता है। पैकमैन पूरे सेक्टर में काम करता है और गौरव को लगता है कि यह एक चुनौती है।


ग्रेटर नोएडा में पैकमैन की मैनुफेक्चुरिंग इकाई

ग्रेटर नोएडा में पैकमैन की मैनुफेक्चुरिंग इकाई



हालांकि उनके लिए मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और ईकॉमर्स में काम करना आसान है। वे कहते हैं,

"मैं प्रत्येक दिन को पार करने के लिए एक चुनौती के रूप में देखता हूं, और मैं प्रत्येक रात को कंपनी के लिए एक विनिंग मूमेंट के रूप में देखता हूं।"

गौरव खुद को यह याद दिलाकर संतोष कर सकते हैं कि उनका उद्यम प्लास्टिक प्रदूषण के वैश्विक मुद्दे को संबोधित करके हरियाली का रास्ता अपना रहा है।

द ग्रीन रूट

यह अनुमान है कि हर साल दुनिया भर में 300 मिलियन टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन होता है। बोतल, रैपर और अन्य प्रकार की पैकेजिंग की प्लास्टिक पर्यावरण के लिए विनाशकारी साबित हो रही है और मनुष्यों और जानवरों में स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा रही है। भारत में ईकॉमर्स और डोरस्टेप डिलीवरी की लोकप्रियता में वृद्धि के साथ, बॉक्सेस में प्लास्टिक पैकेजिंग का उपयोग बढ़ गया है।





जनवरी 2020 में, अमेजॉन इंडिया ने घोषणा की कि उसने भारत में अपने पूर्ति केंद्रों से सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को समाप्त कर दिया है। अगस्त 2019 में, फ्लिपकार्ट ने कहा कि उसने अपने पैकेजिंग मूल्य श्रृंखला में विभिन्न तरीकों के माध्यम से सिंगल-यूज प्लास्टिक में 25 प्रतिशत की कमी हासिल की।


अमेजॉन इंडिया और फ्लिपकार्ट दोनों के प्रयास का उद्देश्य पेपर-आधारित विकल्पों का उपयोग करना है। और गौरव कहते हैं कि पैकमैन उनकी इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वे कहते हैं कि वह पेपर पैकेजिंग की आपूर्ति करने के लिए दोनों ईकॉमर्स प्लेयर्स के साथ बात कर रहे हैं।


वह कहते हैं,

“संगठन अब कागज-आधारित पैकेजिंग सामग्री का उपयोग करना चाहते हैं ताकि वे खुद को ग्रीन कंपनियों के रूप में बढ़ावा दे सकें। अमेजॉन इंडिया और फ्लिपकार्ट काफी समय से हमारे ग्राहक हैं और हम उनसे पेपर-आधारित पैकेजिंग के लिए ऑर्डर की उम्मीद करते हैं।”

पैक्समैन की ईकॉमर्स की बिक्री में तेजी आ सकती है क्योंकि भारत में इस सेगमेंट में वृद्धि जारी है। यह बाजार 2019 में 32 बिलियन डॉलर के साइज तक पहुंच गया, जिसने 18 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर दर्ज की। यह कुछ वर्षों में 100 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पार करने की उम्मीद है। यह वृद्धि ईकॉमर्स सेगमेंट के प्लास्टिक के उपयोग में गिरावट को दर्शाएगी, जो पॉलिमर से बने हैं।


पॉलिमर गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों जैसे कि पेट्रोलियम या प्राकृतिक गैसों से उत्पन्न कार्बन या हाइड्रोजन परमाणुओं की श्रृंखलाएं हैं। प्लास्टिक से बनी पैकेजिंग को बायोडिग्रेड करने में सैकड़ों साल लगते हैं। इससे भी ज्यादा, वे रिसाइकिलिंग युनिट्स बायोबेस्ड पॉलिमर के बजाय लैंडफिल या महासागरों में जाकर खत्म होते हैं।


पैकमैन ऐसी बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बनी पैकेजिंग का इस्तेमाल करता है। गौरव की कंपनी मकई (Corn) से इको-फ्रेंडली बैग बनाती है। गौरव कहते हैं कि मकई की थैलियां बायोडिग्रेडेबल हैं और अन्य सामान्य पॉलिमर की रीसाइक्लिंग प्रक्रिया को दूषित नहीं करती हैं।

ग्रेटर नोएडा में पैकमैन का ऑफिस

ग्रेटर नोएडा में पैकमैन का ऑफिस



पैकमैन के मकई-आधारित बैग की अवधारणा टिकाऊ पैकेजिंग के मूल विचार के अनुरूप है, जो कहती है कि पैकेजिंग को सर्कुलर इकॉनमी का हिस्सा होना चाहिए।


गौरव बताते हैं,

“मकई खुद को नवीनीकृत करता है और यह इन थैलियों को खाद में तब्दील करता। मटेरियल मिट्टी में घुल जाता है और पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाता है। जैसे-जैसे मकई बढ़ता है, यह हवा से कार्बन डाइऑक्साइड खींचता है और हमें ताजा, सांस लेने वाली हवा प्रदान करता है।”

यह आइडिया प्लास्टिक की लाइनर इकॉनमी के विपरीत है, जिसमें प्लास्टिक की पैकेजिंग को आमतौर पर एक उपयोग के बाद निपटाया जाता है। गौरव का कहना है कि अमेजॉन इंडिया, फूलों की रिटेलर फर्न्स एंड पेटल्स, दुग्ध उत्पादक और वितरक कंट्री डिलाइट और ऑनलाइन फूलों की दुकान फ्लॉवर ऑरा मकई-आधारित इको-फ्रेंडली बैग्स के लिए पैकमैन के ग्राहक हैं।


बड़े ग्राहकों के साथ होने के बावजूद, वह आगे भारतीय पैकेजिंग उद्योग के अवसरों को भुनाना चाहते हैं। उनका कहना है कि प्रौद्योगिकी, टीम और अनुसंधान में अपने निवेश के कारण पैकमैन को दूसरों पर बढ़त हासिल है। निकट भविष्य में, कंपनी की योजना मध्य पूर्व और दक्षिण पूर्व एशिया के बाजारों में प्रवेश करने की है।


गौरव कहते हैं,

“हमारे पास अगले पांच वर्षों में बड़े लक्ष्य हैं। हमारे सबसे बड़े प्रतियोगी हम खुद हैं।”