दीवाली के बाद दिल्ली की हवा हुई बहुत खराब, लेकिन पिछले वर्ष से बेहतर

By PTI Bhasha
October 29, 2019, Updated on : Tue Oct 29 2019 05:45:53 GMT+0000
दीवाली के बाद दिल्ली की हवा हुई बहुत खराब, लेकिन पिछले वर्ष से बेहतर
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नयी दिल्ली, पटाखों से उत्सर्जन, पराली जलाने और वाहनों से निकलने वाले धुएं के कारण दीवाली के एक दिन बाद राष्ट्रीय राजधानी में सोमवार को हवा की गुणवत्ता ‘‘बेहद खराब’’ दर्ज की गई।


केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (डीपीसीसी) के आंकड़ों के अनुसार सोमवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 368 पर था जिसमें पिछले वर्ष की तुलना में बड़ा सुधार देखा गया। पिछले वर्ष यह 642 को छू गया था। एक्यूआई रविवार की शाम चार बजे 337 पर था। पिछले वर्ष की दीवाली के बाद एक्यूआई 642 पर पहुंच गया था। वर्ष 2017 में दीवाली के बाद एक्यूआई 367 और 2016 में 425 पर था।





सीपीसीबी में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के प्रभारी वी के शुक्ला ने बताया कि पराली जलाए जाने, त्योहारों के कारण वाहनों से होने वाले उत्सर्जन और प्रतिकूल मौसम संबंधी परिस्थितियां वायु गुणवत्ता में गिरावट के प्रमुख कारण हैं।


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सीपीसीबी के आंकड़ों के अनुसार ‘‘बेहद खराब’’ श्रेणी में एक्यूआई गाजियाबाद में 396, ग्रेटर नोएडा में 375, गुड़गांव 372 और नोएडा में 397 पर रहा। हरियाणा के अंबाला, हिसार और कुरुक्षेत्र में एक्यूआई क्रमश: 385, 370 और 392 पर दर्ज की गया। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद और मेरठ में एक्यूआई 426, 398 और 352 पर रहा। पंजाब के पटियाला, लुधियाना, जालंधर और खन्ना में एक्यूआई क्रमश: 349, 353, 377 और 328 पर रहा।


उल्लेखनीय है कि, 0-50 के बीच एक्यूआई को अच्छा माना जाता है, जबकि 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब और 401-500 गंभीर श्रेणी का माना जाता है। एक्यूआई अगर 500 से ऊपर पहुंच जाता है, तो उसे गंभीर व आपातकालीन श्रेणी का माना जाता है।

हर साल दीपावली के बाद हवा की गुणवत्ता बेहद खतरनाक हो जाने के मद्देनजर 2018 में उच्चतम न्यायालय ने प्रदूषण फैलाने वाले पटाखों पर प्रतिबंध लगा दिया था और केवल हरित पटाखे जलाने की मंजूरी दी थी।

इस बीच, केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सोमवार को कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में हालांकि दीवाली के बाद राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण में कमी देखी गई है। बोर्ड ने कहा कि जमीनी स्तर पर की गई कार्रवाई और हरित पटाखों के कारण इस बार प्रदूषण में कमी देखी गई। बोर्ड ने एक रिपोर्ट में कहा कि शहर का औसत पीएम 2.5 स्तर 284 प्रति घन मीटर माइक्रोग्राम था।


यहां सर गंगा राम अस्पताल के चिकित्सक डा अरविंद कुमार ने बताया कि प्रदूषण स्तर में केवल ‘‘अपेक्षित गिरावट’’ आई है, लेकिन यह अभी भी स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा है। कुमार ने कहा कि लोगों ने दिल्ली के कई स्थानों पर पटाखे जलाकर पाबंदियों और नियमों का उल्लंघन किया और किसी भी स्थान पर एक्यूआई 300 से कम नहीं था।

दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार दीवाली पर विभिन्न जगहों पर नियम उल्लंघन के बारे में 940 कॉल प्राप्त हुईं और लगभग 3,765 किलोग्राम पटाखे जब्त किए गए। दीवाली की रात कुल 371 मामले दर्ज किये गए जिनमें से 56 मामले अवैध पटाखों को रखने और बेचने से संबंधित थे। इन 56 मामलों के सिलसिले में 44 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

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शेष 315 मामले उच्चतम न्यायालय द्वारा तय की गई दो घंटे की समयसीमा का उल्लंघन करने और अनधिकृत पटाखों के इस्तेमाल के लिए दर्ज किये गये। इन मामलों के सिलसिले में 166 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की वायु गुणवत्ता निगरानी सेवा, ‘वायु गुणवत्ता और मौसम पूर्वानुमान एवं अनुसंधान प्रणाली’ (सफर) के मुताबिक दिल्ली का समग्र एक्यूआई सोमवार सुबह साढ़े छह बजे 506 पर पहुंच गया।

सफर के आंकड़े के अनुसार पूसा, लोधी रोड, हवाई अड्डा टर्मिनल टी3, नोएडा, मथुरा रोड, आयानगर, आईआईटी दिल्ली, धीरपुर, और चांदनी चौक में एक्यूआई क्रमशः 491, 432, 464, 674, 428, 482, 460, 555 और 677 दर्ज किया गया। ‘सफर’ का कहना है कि हवा की गति में वृद्धि प्रदूषक तत्त्वों को बिखेरने में मदद करेगी और प्रदूषण के स्तर में मंगलवार तक कमी आने की उम्मीद है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के वरिष्ठ वैज्ञानिक कुलदीप श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदूषण के स्तर में वृद्धि प्रतिकूल मौसम में मौजूद प्रदूषकों का परिणाम है। उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय ने पटाखे फोड़ने के लिए दो घंटे की समय-सीमा तय कर रखी है, जिसका राष्ट्रीय राजधानी के कई हिस्सों में उल्लंघन हुआ। मालवीय नगर, लाजपत नगर, कैलाश हिल्स, बुराड़ी, जंगपुरा, शाहदरा, लक्ष्मी नगर, मयूर विहार, सरिता विहार, हरिनगर, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी, हौजखास, गौतम नगर, द्वारका और अन्य स्थानों पर कल रात लोगों ने इस समयसीमा के उल्लंघन की सूचना दी। नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गुड़गांव, गाजियाबाद और फरीदाबाद में भी समयसीमा से अधिक पटाखों को फोड़े जाने की सूचनाएं मिलीं।


डीपीसीसी ने सोमवार को कहा कि कम आतिशबाजी और रात्रि गश्त जैसे कड़े उपायों से पिछले साल की तुलना में इस बार दीवाली पर पीएम 2.5 और पीएम 10 के स्तर में 30 फीसदी की गिरावट आयी। डीपीसीसी ने एक बयान में कहा कि दिल्ली में खतरनाक पीएम 10 और पीएम 2.5 कणों के उत्सर्जन में 20 से 50 फीसदी की कमी आयी जो इस बात का संकेत है कि पिछले सालों की तुलना में इस बार वायु की गुणवत्ता अच्छी थी।



दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदूषण में कमी के लिए लोगों को श्रेय दिया और कहा कि इसे कम करने के लिए अभी और बहुत कुछ किया जाना है। दिल्ली के पर्यावरण मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि दीवाली के बाद वायु की गुणवत्ता 2018 की तुलना में बहुत अच्छी जान पड़ती है। एक कार्यक्रम के मौके पर गहलोत ने संवाददाताओं से कहा कि लोग भी कहते हैं कि इस साल कम पटाखे जलाए गए।


गहलोत ने ट्वीट किया,

‘‘दिल्ली ने एक बार फिर ऐसा किया है...दीवाली के अगले दिन प्रदूषण के स्तर में 30 फीसदी की कमी। दिल्ली सरकार के 2015 से सतत प्रयासों से ये परिणाम सामने आये हैं। हर किसी की सक्रिय भागीदारी के बिना ऐसा नहीं होता।’’


डीपीसीसी ने कहा कि पीएम 2.5 का शिखर स्तर अर्धरात्रि को 1070 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर था। पिछले साल दीवाली के बाद यह 1560 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर था। यानी इस बार पिछले साल की तुलना में पीएम 2.5 के उत्सर्जन में 30 फीसद की कमी देखी गयी। पीएम 2.5 ढाई माइक्रोन या उससे कम के व्यास वाला ऐसा सूक्ष्म कण होता है जो फेफड़े और यहां तक कि रक्त तक पहुंच सकता है।


समिति ने एक बयान में कहा,

‘‘पीएम 10 का शिखर स्तर पिछले साल 1859 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर था जो इस बार 30 फीसदी घटकर 1391 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रहा।’’


इस दीवाली पर सल्फर डाईऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड की सांद्रता भी सभी मापन केंद्रों पर मान्य स्तर के अंदर ही थी।


डीपीसीसी ने कहा,

‘‘80 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर के मान्य स्तर के हिसाब से सल्फर डाईऑक्साइड की सांद्रता मंदिर मार्ग पर 1.76 और जहांगीरपुरी में 41.48 रही जो असुरक्षित स्तर से काफी नीचे है।’’


समिति ने कहा,

‘‘पीएम 2.5, सल्फर डाईऑक्साइड और कार्बन मोनाऑक्साइड में करीब 30 फीसदी की अहम गिरावट दर्शाती है कि लोगों ने इस साल कम पटाखे जलाए और उन्होंने संपूर्ण स्थिति में सुधार में योगदान दिया।’’