'रटने' की जगह सीखने पर जोर देता है इस महिला उद्यमी का एडटेक स्टार्टअप

चारु नोहेरिया, सुब्बाराव सिद्धबट्टुला और इलंगोवेल थुलसिमनी द्वारा सह-स्थापित प्रैक्टिकली (Practically) एक कॉम्पैक्ट क्रॉस-प्लेटफॉर्म ऐप है जो गेमिफिकेशन टेक्नोलॉजी, इमर्सिव लर्निंग एसेट्स, टेस्ट प्रिपरेशन और AI-असिस्टेड स्टडी बडी को एक साथ जोड़ता है।

'रटने' की जगह सीखने पर जोर देता है इस महिला उद्यमी का एडटेक स्टार्टअप

Tuesday April 27, 2021,

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चारू नोहेरिया के डॉक्टर माता-पिता के पास सरकार द्वारा संचालित संस्थान में चिकित्सा अधिकारियों के रूप में आरामदायक जॉब थी। 30 साल की उम्र में, उन्होंने अपना उद्यम शुरू करने के लिए जॉब छोड़ दी और दशकों तक सफलतापूर्वक अपना नर्सिंग होम चलाते रहे।


एडटेक स्टार्टअप प्रैक्टिकली की सह-संस्थापक और सीओओ चारू का कहना है कि उन्हें अपने माता-पिता, विशेषकर अपनी मां से जोखिम लेने और आगे बढ़ने का हुनर व उद्यमशीलता के गुण विरासत में मिले हैं।

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चंडीगढ़ में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद, चारू कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में अपनी स्नातक की डिग्री के लिए बेंगलुरु चली गईं और बाद में यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनोइस-उरबाना शैंपेन (University of Illinois-Urbana Champaign) से एमबीए करने के लिए अमेरिका चली गईं।


उन्होंने सैमसंग में मोबाइल एप्लिकेशन डेवलप करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू किया। बाद में, वह एक स्ट्रेटेजिक लीडरशिप डेवलपमेंट एसोसिएट के रूप में अमेरिका में सबसे बड़ी वैल्यू-बेस्ड हेल्थकेयर आईटी फर्मों में से एक, लुमेरिस इंक (Lumeris, Inc.) में शामिल हो गईं और बहुत जल्द टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप की डायरेक्टर बन गईं।

स्टूडेंट्स और टीचर्स के लिए एक 'प्रैक्टिकली' सलूशन

लुमेरिस इंक में काम करने के दौरान चारु अपने सह-संस्थापकों, सुब्बाराव सिद्धबट्टुला और इलंगोवेल थुलसिमनी से मिलीं थीं। उन्होंने मिलकर 2018 में प्रैक्टिकली को शुरू किया। स्टार्टअप शुरू करने के पीछे मुख्य वजह के बारे में बताते हुए वह कहती हैं, "STEM लर्निंग रटने वाली बन गई है और शिक्षकों के पास छात्रों की यादाश्त बढ़ाने के वास्ते इंगेजमेंट और कॉन्सेप्ट के साथ इंट्रैक्शन का कोई साधन नहीं है। जब वे मूलभूत अवधारणाएं सीखते हैं तो छात्रों के पास ज्यादातर निष्क्रिय और रटे-रटाए सीखने के स्रोत और तरीके होते हैं, जिससे याद करने की दर 30 प्रतिशत से भी कम होती है। यह डिसएंगेजमेंट प्रमुख विषयों में रुचि की कमी की ओर ले जाती है।"


प्रैक्टिकली को एडगर डेल के 'कोन ऑफ लर्निंग’ पर बनाया गया है: इसके अनुसार हम जो पढ़ते हैं उसका 10 प्रतिशत याद रखते हैं, जो हम देखते हैं और सुनते हैं उसका 50 प्रतिशत याद रखते हैं और जब हम कुछ करके सीखते हैं तो उसका 90 प्रतिशत याद रखते हैं। जितना अधिक ड्रैमेटिक एक्सपीरियंस, उतनी ही स्थायी यादाश्त, और सबसे कठिन कॉन्सेप्ट्स को एक्सपीरियंशल लर्निंग के साथ सिखाया जा सकता है।


वह कहती हैं,

"हमारा उद्देश्य 'करके सीखने को' सक्षम बनाना और गणित व विज्ञान जैसे प्रमुख विषयों के लिए छात्रों की याद करने की दर में 90 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि करना और सीखने को और अधिक मजेदार और आकर्षक बनाना है।"


प्रैक्टिकली का उद्देश्य वह सब कुछ एक सिंगल ऐप पर बनाना है जो एक शिक्षार्थी चाहता है। यह चाहता है कि माता-पिता सिंगल प्रोडक्ट के लिए भुगतान करें जिसमें कंटेंट, सिमुलेशन्स/एआर, टेस्ट प्रिपरेशन, एनालिटिक्स/फीडबैक, गेमिफिकेशन, शंका समाधान, लाइव क्लासेस, कोडिंग और समर प्रोग्राम शामिल हों।


चारू का कहना है कि प्रैक्टिकली गेमिफिकेशन टेक्नोलॉजी, इमर्सिव लर्निंग एसेट्स, टेस्ट प्रिपरेशन और एक कॉम्पैक्ट क्रॉस-प्लेटफॉर्म ऐप में एआई-असिस्टेड स्टडी बडी को जोड़ता है। इसकी पेटेंट-पेडिंग टेक्नोलॉजी के माध्यम से, हजारों रोमांचक, लाइफ-लाइक सिमुलेशन और ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) के अनुभवों को सीखने के रास्ते के साथ जोड़ा जाता है ताकि शिक्षण को जीवंत बनाया जा सके और कॉन्सेप्ट को याद रखने की क्षमता को बढ़ाया जा सके।


प्रैक्टिकली लाइव क्लासेसज, कोडिंग++ और डाउट रेज्यूलेशन यानी शंका समाधान के लिए एक 24x7 हेल्प फीचर्स प्रदान करता है, जहां छात्र प्लेटफॉर्म पर विषय विशेषज्ञों तक पहुंच सकते हैं।


चारू कहती हैं,

"प्रैक्टिकली शिक्षकों को अपने छात्रों में इंटेलीजेंट इनसाइट के साथ मदद करता है, उन्हें ऑटो-जनरेट प्रश्न पत्र, सही उत्तर, उन्हें दो घंटे का ऑपरेशनल टाइन देने और समग्र रूप से शिक्षण में उनके अनुभव को प्रभावित करने, कक्षाओं को आकर्षक और प्रभावी बनाने में मदद करता है।"


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प्रैक्टिकली एक फ्रीमियम सब्सक्रिप्शन मॉडल पर आधारित है, जिसमें इस्तेमाल के आधार पर 1,300 रुपये से लेकर 3,000 रुपये प्रति माह तक सब्सक्रिप्शन है। इसने अपने संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों और शीर्ष विश्वविद्यालयों के उच्च योग्यता प्राप्त और दशकों के शिक्षण अनुभव के साथ व्यक्तियों ऑनबोर्ड किया गया है।


3,30,000 प्लस से अधिक छात्रों और 15,000 से अधिक शिक्षकों ने पहले ही इसके ऐप का उपयोग करना शुरू कर दिया है जो 3,000+ वीडियो, 1000+ सिमुलेशन/एआर, लाइव क्लासेज, कोडिंग ++, टेस्ट-प्रेपरेशन, शंका समाधान, एक्सपर्ट हेल्प जैसी अन्य फीचर्स ऑफर करता है।


कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन कक्षाओं को सक्षम बनाने के लिए भारत भर में 200 से अधिक स्कूल पहले से ही प्रैक्टिकली का इस्तेमाल कर रहे हैं। प्रैक्टिकली स्कूल सॉल्यूशन का इस्तेमाल करने वाले कुछ प्रमुख संस्थान हैं जिनमें- आंध्रा प्रदेश और तेलंगाना में डॉ. केकेआर गौतम स्कूल (Dr. KKR Gowtham School), चेन्नई में मोंटफोर्ट स्कूल, चेन्नई में वेलम्मल, वी ब्लूम्स बैंगलोर, ब्रिलियंट स्कूल बैंगलोर, सेंट मैरी सिकंदराबाद, यूपी में सत्यकाम इंटरनेशनल स्कूल, आंध्रा प्रदेश में जेसीआर चैतन्य और दुबई में GEMS मिलेनियम स्कूल शामिल हैं।


चारू के अनुसार, हाल ही में इसकी थीम के आधार पर अपना पहला ब्रांड कैंपेन, 'ब्रिंग लर्निंग अलाइव' का समापन किया गया, जिसमें इसके टीवीसी के यूट्यूब पर 32 मिलियन से अधिक व्यूज थे, इससे यह भारत में किसी भी एडटेक कंपनी द्वारा किसी सेलिब्रिटी इंडोर्समेंट के बिना प्रचार के सबसे बड़े कैंपेन में एक बन गया।


वह कहती हैं,

"हमने ऐप इंस्टॉल्स किए जाने में 3 गुना ग्रोथ देखी है और अब 3 लाख 40 हजार इंस्टाल्स हैं। YouTube पर टीवीसी इंडस्ट्री-स्टैंडर्ड व्यूज रेट आमतौर पर 30-35 प्रतिशत है, जबकि हम लगातार 50 प्रतिशत से ऊपर जा रहे हैं और हमारे शुरुआती टीवीसी रेट्स लगभग 70 प्रतिशत हैं।"


2019 में एक्सफिनिटी वेंचर्स की अगुवाई में प्री-सीरीज ए फंडिंग के एक राउंड में प्रैक्टिकली ने 5 मिलियन डॉलर जुटाए जिसमें योरनेस्ट, आईडीएफसी परम्परा, और एचएनआईज भी शामिल थे। पिछले साल, स्टार्टअप ने मौजूदा निवेशकों YourNest Venture Capital और Exfinity Ventures की भागीदारी के साथ, Siana Capital के नेतृत्व वाले प्री-सीरीज B फंडिंग राउंड में 4 मिलियन डॉलर जुटाए।


कंपनी ने अब तक मुख्य रूप से प्रोडक्ट डेवलपमेंट के लिए 9 मिलियन डॉलर जुटाए हैं। प्रैक्टिकली ऐप को अप्रैल 2020 में लॉन्च किया गया था और इसने फरवरी 2021 तक 32 मिलियन डॉलर की राजस्व आय दर्ज की, जो जून 2022 तक 70 मिलियन डॉलर से - 120 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

लॉकडाउन में किया लॉन्च

लॉकडाउन के बीच प्रैक्टिकली ऐप लॉन्च करना भी एक बड़ी चुनौती साबित हुई। वे कहती हैं,

“हमने मौजूदा प्रोडक्ट सेल्स से होने वाले सभी मुनाफे को इसमें डाल दिया और सीरीज ए फंडिंग के लिए भी गए, जिससे हमें यह हासिल करने में मदद मिली। हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा जब हमने अपने कारोबार को आंध्रा प्रदेश/तेलांगना राज्यों के सभी हिस्सों में फैलाना शुरू कर दिया क्योंकि इसके लिए एक बड़ी टीम और ग्रोथ कैपिटल की जरूरत थी।"


वे कहती हैं,

"हम भाग्यशाली थे कि हम इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विस्तार करने में हमारी मदद करने के लिए प्री-सी बी राउंड को बढ़ाने में सक्षम हुए। इससे हमें इस साल पूरे भारत में लॉन्च करने में मदद मिली।"


प्रैक्टिकली 2021 में पश्चिम और दक्षिणी क्षेत्रों से शुरू होकर पूरे भारत में विस्तार करने पर काम कर रहा है। यह दिसंबर तक 2,000 से अधिक कर्मचारियों को जोड़ने पर भी काम कर रहा है।


वह कहती हैं,

“2021 में हम K-5 सेगमेंट में भी प्रवेश करते दिखाई देंगे (हम वर्तमान में कक्षा 6 से 12 के साथ काम करते हैं)। हमारा मानना है कि शिक्षा के क्षेत्र में टेक्नोलॉजी को अपनाए जाने का चरम देखना अभी भी बाकी है और महामारी के दौरान टेक्नोलॉजी को अपनाने के लिए जो तेजी देखी गई, वह महामारी के वर्षों से आगे भी जारी रहने और बने रहने की संभावना है। भारत के बाहर, मध्य पूर्व हमारा फोकस मार्केट है।” 


Edited by Ranjana Tripathi