गुवाहाटी हाईकोर्ट ने बताया, ये बातें देती है शादी से पत्नी के इंकार करने का संकेत

इससे पहले, असम की एक पारिवारिक अदालत ने तलाक के लिए पति की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि पत्नी को शिकायतकर्ता के खिलाफ किसी भी तरह की क्रूरता नहीं मिली है।

  • +0
Share on
close
  • +0
Share on
close
Share on
close

गुवाहाटी उच्च न्यायालय के अनुसार एक हिंदू विवाहित महिला अगर शादी की रस्मों और रीति-रिवाजों के अनुसार सखा, चूड़ियाँ पहनने और सिंदूर लगाने से मना करती है तो इसे उसकी शादी की अस्वीकृति के रूप में देखा जायेगा और तलाक के लिए उसके पति की याचिका मंजूर की जा सकती है।


l

सांकेतिक फोटो (साभार: shutterstock)


मुख्य न्यायाधीश अजय लांबा और न्यायमूर्ति सौमित्र सैकिया सहित हाईकोर्ट के दो सदस्यों ने कहा कि महिला द्वारा सखा और सिंदूर पहनने से मना करना - एक हिंदू दुल्हन का आघात - उसके पति से विवाहित होने की अनिच्छा को दर्शाता है।


हाईकोर्ट ने अपने 19 जून के आदेश में कहा,

‘‘ऐसी परिस्थितियों में, पति को पत्नी के साथ वैवाहिक संबंध जारी रखने के लिए मजबूर करना उत्पीड़न माना जा सकता है।’’

इससे पहले, असम की एक पारिवारिक अदालत ने तलाक के लिए पति की याचिका को इस आधार पर खारिज कर दिया था कि पत्नी को शिकायतकर्ता के खिलाफ किसी भी तरह की क्रूरता नहीं मिली है।


हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि पति ने निचली अदालत के सामने आरोप लगाया था कि पत्नी ने सखा और सिंदूर पहनने से इनकार कर दिया था, एक विवाद जो उसके द्वारा विवादित नहीं था।


फरवरी 2012 में इस जोड़े के बीच विवाह को रद्द कर दिया गया था।


हालांकि, शादी के एक महीने बाद, पत्नी अपने पति के साथ अलग आवास में रहना चाहती थी, क्योंकि वह संयुक्त परिवार में रहना नहीं चाहती थी।



पति ने आरोप लगाया कि जॉइंट फैमिली में रहने के बजाय उसकी पत्नी अलग घर में रहने की मांग करती थी, इस कारण अक्सर दोनों में झगड़े होते थे और पत्नी भी बच्चे को गर्भ धारण करने में विफल रही।


उसने 2013 में अपने पति का घर छोड़ दिया और उसके और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 498A (पति या उसकी शादीशुदा महिला के साथ क्रूरता से संबंध रखने) के तहत मामला दर्ज किया।


हालांकि पति और उसके रिश्तेदारों को हाईकोर्ट द्वारा मामले में बरी कर दिया गया था, लेकिन उसने अपनी पत्नी द्वारा क्रूरता का हवाला देते हुए एक अलग तलाक की याचिका दायर की।


उसने अपने पति और ससुराल वालों पर दहेज के लिए उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए याचिका दायर की। उसने यह भी आरोप लगाया कि उसे भोजन और चिकित्सा से वंचित कर दिया गया और उसकी बुनियादी जरूरतों का ध्यान रखने के लिए उसे उसके भाई के पास छोड़ दिया गया।


लेकिन, हाईकोर्ट ने पारिवारिक अदालत के फैसले को पलट दिया।


हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया है,

“पति द्वारा पत्नी पर क्रूरता बरतने के आरोप साबित नहीं होते। ऐसे में पति या पति के परिवार के सदस्यों के खिलाफ निराधार आरोपों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने का कोई मतलब नहीं बनता।’’

(Edited by रविकांत पारीक)

Want to make your startup journey smooth? YS Education brings a comprehensive Funding Course, where you also get a chance to pitch your business plan to top investors. Click here to know more.

  • +0
Share on
close
  • +0
Share on
close
Share on
close

Our Partner Events

Hustle across India