कैसे न्याय को सभी के लिए हक़ीक़त बनाने में मदद करता है स्टार्टअप FightRight

FightRight भारत का अपनी तरह का पहला स्टार्टअप है जो मुकदमेबाजी के लिए पैसे मुहैया कराता है. इसे समर्थन देने के लिए AI-पावर्ड एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म प्रदान करता है. प्लेटफॉर्म को कानूनी दावे के जोखिमों का मूल्यांकन करने, सफल परिणाम के लिए सबसे प्रभावी रणनीति की सिफारिश करने के लिए डिज़ाइन किया गया है.

हाइलाइट्स

  • FightRight न्याय को सभी के लिए हक़ीक़त बनाने में विश्वास रखता है.
  • FightRight भारत का अपनी तरह का पहला स्टार्ट-अप है जो मुकदमेबाजी के लिए पैसे मुहैया कराता है
  • कंपनी का बिजनेस और रेवेन्यू मॉडल तीन-मुख्य सेवाओं पर टिका है: लिटिगेशन फंडिंग, AI और ML समर्थित प्लेटफॉर्म, कानूनी सहायता सेवाएं
  • कंपनी ने अपने पहले साल में 30 लाख रुपये का रेवेन्यू कमाया है.

आज के जमाने में चारों ओर टेक्नोलॉजी का दबदबा है. बिजनेस वर्ल्ड में शायद ही कोई सेक्टर इससे अछुता हो. अब ऐसे में भला लीगल टेक कैसे टेक्नोलॉजी की पहुंच से दूर रह सकता है. वकील, जज, अदालत और न्याय ये सभी अब टेक्नोलॉजी के सहारे चल रहे हैं. साल 2021 में, लीगल टेक मार्केट ने दुनिया भर में 27.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर का रेवेन्यू हासिल किया. बाजार पूर्वानुमान के साथ 2027 की अवधि के लिए चार प्रतिशत से अधिक की CAGR (compound annual growth rate) से बढ़ने का अनुमान है. इसके साथ ही 2027 तक इस सेक्टर का रेवेन्यू 35.6 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आंकड़े को छू सकता है. ये डेटा मार्केट रिसर्च फर्म Statista से जुटाया गया है.

भारत में भी लीगल टेक सेक्टर में स्टार्टअप्स खूब फल-फूल रहे हैं. अपने नए-नए इनोवेटिव कॉन्सेप्ट्स के जरिए इस सेक्टर में आने वाली हर समस्या का समाधान लेकर आ रहे हैं. ऐसा ही एक स्टार्टअप है FIGHTRIGHT Technologies

FightRight न्याय को सभी के लिए हक़ीक़त बनाने में विश्वास रखता है. कंपनी सरल, समरूप, मानकीकृत, व्यवस्थित और अनुकूलित तरीके से वकीलों की सहायता करने और वादियों को उनके अधिकारों के लिए लड़ने में मदद करने के लिए इंटेलीजेंट टूल्स के साथ एक अद्वितीय और इंडस्ट्री-फर्स्ट AI (Artificial intelligence) और ML (Machine learning) संचालित मंच का निर्माण कर रही है.

टेक्नोलॉजी की मदद से कंपनी, दावेदारों को उनकी मुकदमेबाजी यात्रा के हर चरण में सहायता करती है और इसे सस्पेंस-मुक्त (एनालिटिक्स), जोखिम-मुक्त (मुकदमे की फंडिंग), और परेशानी-मुक्त (मुकदमे सहायता सेवाएँ) बनाती है.

FightRight की शुरुआत

FightRight की शुरुआत नितिन जैन (Nitin Jain) और विशाल मंगल (Vishal Mangal) ने मिलकर की थी. नितिन जैन, फाउंडर और सीईओ होने के साथ-साथ एक पेशेवर चार्टर्ड एकाउंटेंट (CA) और एलएलबी (जनरल) हैं. उन्होंने टैक्स लॉ चैंबर (TLC), मुंबई में बतौर इनडायरेक्ट टैक्स कंसल्टेंट अपना करियर शुरू किया था. उसके बाद उन्होंने रियल एस्टेट की ओर रुख किया, जो भारत में हमेशा किसी न किसी मुकदमेबाजी में फंसा रहता है.

वहीं, विशाल मंगल, को-फाउंडर और सीओओ को रियल एस्टेट इंडस्ट्री में अच्छा-खासा अनुभव हैं. वे रुकी हुई श्रीराम प्रॉपर्टीज, कोलकाता परियोजना को पटरी पर लाने के लिए जिम्मेदार प्रमुख व्यक्ति थे. उन्हें भूमि और संपत्तियों के सभी नियामक और अनुपालन पहलुओं की गहरी समझ है. उन्होंने Ahluwalia Contracts, Shriram Properties और Indospace जैसी कंपनियों में काम किया है.

क्या करता है FightRight?

भारत की कानूनी प्रणाली में, सामाजिक-आर्थिक गतिशीलता शक्ति और धन के असंतुलन का कारण बनती है, जिससे जटिल मुकदमेबाजी प्रक्रियाएँ होती हैं जो कई व्यक्तियों और संगठनों के लिए नेविगेट करना मुश्किल होता है.

बहुत से लोग कानूनी प्रक्रिया की अत्यधिक जटिलताओं के कारण अपने सही दावों को आगे बढ़ाने में हिचकिचाते हैं, जिसमें दावों की पहचान करने में कठिनाई, सही मंच, सही रणनीति और उपयुक्त वकील खोजने में कठिनाई शामिल है. इसके अलावा, मुकदमा लड़ने का खर्चा और समय निवेश निवारक के रूप में कार्य करते हैं.

सबसे बड़ी समस्या मंच/न्यायालय-विशिष्ट लोगों और देश के अतिव्यापी/विरोधी कानूनों से परस्पर विरोधी सलाह है.

साथ ही, कई संभावित वादकारियों के पास प्रभावी ढंग से दावा करने के लिए वित्तीय साधन नहीं होते हैं और उन्हें उधार लेने के लिए मजबूर किया जाता है.

यहां तक कि जब मुकदमेबाजी का निर्णय लिया जाता है और पैसा सुरक्षित हो जाता है, वकीलों के साथ नियमित बैठकों, दस्तावेज़ प्रबंधन और मामले से जुड़ी हर बारिकी से वाकिफ़ रहने के लिए आवश्यक समय और प्रयास भारी हो सकता है.

यह एक दोहरा बोझ पैदा करता है, क्योंकि दावेदारों ने पहले ही अपना अधिकार खो दिया है और अब इसे आगे बढ़ाने के लिए अतिरिक्त संसाधनों (समय, धन और प्रयास) का निवेश करना होगा ताकि आगे कोई परिभाषित रास्ता न हो.

इन सभी समस्याओं से निजात दिलाने में मदद करता है FightRight. कंपनी की टैगलाइन है JUSTICE A REALITY FOR ALL.
how-legaltech-startup-fightright-believes-in-making-justice-a-reality-for-all-ai-ml

बिजनेस, रेवेन्यू मॉडल और फंडिंग

कंपनी का बिजनेस और रेवेन्यू मॉडल तीन-मुख्य सेवाओं पर टिका है, जोकि इस प्रकार हैं:

लिटिगेशन फंडिंग (Litigation Funding) के तहत, कंपनी वाणिज्यिक प्रकृति के कानूनी विवाद में एक पक्ष को गैर-सहायता के आधार पर फाइनेंस देती है. यदि मामला जीत जाता है या सुलझा लिया जाता है, तो आय के एक हिस्से के बदले में, आप केवल तभी भुगतान करते हैं जब आप जीत जाते हैं. यह सीमित वित्तीय संसाधनों वाले पक्षों को कानूनी कार्रवाई करने में मदद करता है जिसे वे अन्यथा वहन करने में सक्षम नहीं हो सकते हैं और अक्सर, या तो दावा छोड़ देते हैं या पात्रता के एक अंश के लिए समझौता कर लेते हैं. यानि की कंपनी मुकदमेबाजी के सफल परिणाम पर दावे का पूर्व-निर्धारित प्रतिशत लेती है.

कंपनी का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) समर्थित प्लेटफॉर्म कई मापदंडों पर जज और वकील के प्रदर्शन संकेतक देकर भावना विश्लेषण करने में सक्षम है. यह पैटर्न की पहचान करने और मुकदमेबाजी के प्रकार के आधार पर भविष्य कहनेवाला/निवारक विश्लेषण करने में मदद करता है. पूरी तरह से प्रशिक्षित, यह मिसालों का विश्लेषण करने और समय और लागत के साथ मार्ग विश्लेषण देने में सक्षम होगा. यह सब्सक्रिप्शन आधारित होगा और इसमें पे-पर-बेस रेवेन्यू मॉडल भी होगा.

कंपनी की कानूनी सहायता सेवाएं टेक प्लेटफॉर्म का एक हिस्सा होंगी, जिससे यह उचित परिश्रम, जोखिम, निवारक और भविष्य कहनेवाला विश्लेषण पेश करेगी. और कंपनी एग्रीगेटर मॉडल पर आधारित अन्य सेवाओं की भी पेशकश करेगी जैसे कि कोर्ट फाइलिंग, साक्ष्य एकत्र करना, प्रमाणित प्रतियां, मध्यस्थता समर्थन सेवाएं आदि, वकीलों और वादियों के लिए मुकदमेबाजी के समय और लागत में कटौती करने के लिए. यह एक एग्रीगेटर वेंडर मॉडल पर आधारित होगा जहां कंपनी केवल वेंडर और ग्राहक दोनों से प्लेटफॉर्म उपयोग शुल्क लेगी.

फंडिंग के बारे में पूछे जाने पर को-फाउंडर बताते हैं, "FightRight ने अक्टूबर 2021 में USD 300K (2.25 करोड़) की फंडिंग जुटाई थी."

चुनौतियां

इस बिजनेस/प्लेटफॉर्म को खड़ा करने में आने वाली चुनौतियों के बारे में बात करते हुए को-फाउंडर बताते हैं, "पहला सवाल जो हमसे पूछा जाता है, वह यह है कि क्या लिटिगेशन फंडिंग कानूनी है. हां, यह पूरी तरह से कानूनी है और बार-बार इस काउंटी के माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इसे दोहराया है. केवल अपवाद यह है कि प्रैक्टिस कर रहे वकीलों को सक्सेस फी-बेस्ड फंडिंग मॉडल पर काम करने की अनुमति नहीं है."

वे आगे बताते हैं, "सभी अदालतों से डेटा और डेटा को डिक्रिप्ट करना बड़ी चुनौती है. आज तक सभी अदालतों का डेटा प्राप्त करने के लिए कोई एपीआई या आसान तरीके उपलब्ध नहीं हैं और जिस प्रारूप में डेटा उपलब्ध है, उसे अभ्यास करने वाले वकीलों के लिए भी समझना बहुत मुश्किल है, तो कल्पना कीजिए कि एक आम वादी को कितनी कठिनाई होती है. हमारी टेक टीम बड़ी मुश्किल से इसे हल करने में सक्षम रही है और हमारे AI/ML मॉडल इस विशाल मात्रा में उपलब्ध डेटा से समझ बनाने और अंतर्दृष्टि प्राप्त करने में सक्षम हैं."

को-फाउंडर बताते हैं, "सिस्टम में लंबित मामलों की भारी संख्या को देखते हुए निवेशक लिटिगेशन फंडिंग स्पेस में निवेश करने से सावधान हैं."

भविष्य की योजनाएं

FightRight के फाउंडर को रवैया आशान्वित है. वे कहते हैं, "बस कुछ समय की बात है कि लोग यह महसूस करना शुरू कर देंगे कि पूरी लिटिगेशन इंडस्ट्री बड़ा मुकाम हासिल करेगी. यह 200 अरब डॉलर का अवसर है."

कंपनी ने पिछले साल 30 लाख रुपये का रेवेन्यू कमाया. यह इसके कारोबार का का पहला वर्ष था. इसके साथ ही कंपनी अगले 18 महीनों में 18+ करोड़ रुपये का रेवेन्यू हासिल करने का लक्ष्य बना रही है. FightRight के फाउंडर 400+ ग्राहक होने का दावा करते हैं.

FightRight भारत का अपनी तरह का पहला स्टार्ट-अप है जो मुकदमेबाजी के लिए पैसे मुहैया कराता है और इसे समर्थन देने के लिए AI-पावर्ड एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म प्रदान करता है. प्लेटफॉर्म को कानूनी दावे के जोखिमों का मूल्यांकन करने और सफल परिणाम के लिए सबसे प्रभावी रणनीति की सिफारिश करने के लिए डिज़ाइन किया जा रहा है. यह एक साथ कई दावों को संभालेगा और निर्णय लेने के लिए क्विक रिकमेंडेशन प्रदान करेगा. इससे दोनों को लाभ होता है, वे निवेशक जो अपने पैसे की सुरक्षा करके एसेट क्लास के रूप में लिटिगेशन फंडिंग में निवेश करने में रुचि रखते हैं, और दावेदार जो परिणाम-उन्मुख मुकदमेबाजी का पीछा कर सकते हैं.

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