'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' रैंकिंग में भारत ने लगाई 14 पायदान ऊंची छलांग

'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' रैंकिंग में भारत ने लगाई 14 पायदान ऊंची छलांग

Thursday October 24, 2019,

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"विश्वबैंक के मुख्य अर्थशास्त्री हंस टिम्मर ने कहा है कि सुस्ती के बावजूद भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की रफ्तार में बना हुआ है। दुनिया के 190 देशों पर फ़ोकस ताज़ा सर्वे में विश्व बैंक ने बताया है कि भारत को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी कामयाबी मिली है। 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' की रैंकिंग में उसने 14 पायदान की ऊंची छलांग लगाई है।" 

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फोटो (सोशल मीडिया)


एक सर्वे के बाद विश्व बैंक ने दावा किया है कि अंदरूनी हालात में सुधार के बाद भारत को अपने कई आर्थिक मोर्चों पर बड़ी कामयाबी मिली है। 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' की रैंकिंग में उसने 14 पायदान की ऊंची छलांग लगाई है। दुनिया के कुल 190 देशों की विश्व बैंक की रैंकिंग में भारत अब 63वें नंबर पर आ गया है। विश्व बैंक के सर्वे के मुताबिक, नरेंद्र मोदी सरकार में हुए आर्थिक सुधारों के कारण भारत की स्थिति तेजी से सुधर रही है। वैसे तो सरकार रैंकिंग आकड़े में 50वें नंबर तक पहुंच जाने की कोशिश में थी, फिर भी उसे 14 स्थान तक बढ़त मिली है। गौरतलब है कि पिछले साल की रैंकिंग में भारत 77वें नंबर पर और उससे पहले 2017 में भी 30 पायदान चढ़कर 100वें नंबर पर पहुंच गया था।


उल्लेखनीय है, 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' का मतलब होता है कारोबारी अनुकूलता की स्थितियां। किसी देश में कारोबार शुरू करना कितना आसान अथवा कठिन है, हाल के वर्षों से 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' सर्वे में इसी का आंकलन किया जाने लगा है। कोई भी विदेशी निवेशक अगर किसी दूसरे देश में निवेश के बारे में सोचता है तो वह सबसे पहले यही देखता है कि आखिर, वहां पर कारोबार करने की सरकारी सहूलियतें किस तरह की हैं।


'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस' सर्वे में पहले भारत की रैंकिंग दो-तीन अंकों तक ही सुधरती रही है लेकिन दो वर्षों से उसमें ज़बरदस्त उछाल आने लगा है। पिछले साल विश्व बैंक के 'ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नस' सर्वे में भारत 23 पायदान चढ़कर 77वें नंबर पर पहुंच गया था। उस सर्वे में भी दुनिया के 190 देशों को शामिल किया गया था।


विश्व बैंक के सर्वे के मुताबिक, भारत के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में अविश्वसनीय रूप से सुधार हुआ है। टैक्स सिस्टम में बदलाव के कारण बैंकों से कर्ज़ लेने की प्रक्रिया आसान हुई है। बिजली का कनेक्शन लेना सस्ता कर दिया गया है। दूसरे देशों में जाकर कारोबार और व्यापार करने को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। 'नेशनल ट्रेड फ़ेसिलिटेशन ऐक्शन प्लान 2017-2020' के माध्यम से देश में आयात-निर्यात प्रक्रिया को तमाम जटिलताओं से मुक्त किया गया है। एफ़डीआई की भी सेहत ठीक हुई है। विश्व बैंक सर्वे में भारत की रैंकिंग के लगातार सुधार से दूसरे देशों का भारत पर विश्वास बढ़ा है। 

 




जहां तक वर्ल्ड बैंक के सर्वे की बात है, उसकी कमियां भी गौरतलब हैं। उसकी सबसे बड़ी खामी उसका सैंपल साइज़ बहुत छोटा होना है। सर्वे के दौरान केवल दिल्ली और मुंबई के कारोबारियों से हालात के ब्योरे कलेक्ट किए जाते हैं। ताज़ा सर्वे का भी सच चाहे जो दर्शाया जाए, डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत आज भी भारत को चिढ़ा रही है। अभी कल 23 अक्तूबर को ही, भारी डॉलर लिवाली के कारण अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में डॉलर के मुकाबले रुपया 31 पैसे, यानी 0.44 प्रतिशत की गिरावट के साथ 71.54 रुपये प्रति डॉलर तक और लुढ़क गया। उससे पहले 08 फीसद कमजोर लेकिन उससे पूर्व माह की शुरुआत में पहली अक्तूबर को 14 पैसे मजबूत हुआ था।


विश्व बैंक के आर्थिक सर्वे की एक सचाई ये भी है कि उसने चालू वित्त वर्ष में भारत के जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है, इसे भारत सरकार को झटका लगने का अंदेशा है। पिछले साल भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.9 फीसदी रही थी। हालांकि दक्षिण एशिया के लिए आर्थिक फोकस के अपने नवीनतम एडिशन में वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट साल 2021 में फिर से रिकवर कर 6.9 फीसदी पर पहुंच सकती है। विश्वबैंक के मुख्य अर्थशास्त्री हंस टिम्मर ने भी कहा है कि हालिया सुस्ती के बावजूद भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था की रफ्तार में बना हुआ है।