भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाया खास तरह का फेस मास्क, कोविड-19 से निपटने में मिलेगी मदद

By रविकांत पारीक
February 05, 2022, Updated on : Sat Feb 05 2022 03:36:03 GMT+0000
भारतीय वैज्ञानिकों ने बनाया खास तरह का फेस मास्क, कोविड-19 से निपटने में मिलेगी मदद
SARS-CoV-2 के कारण होने वाले कोविड-19 विषाणु के प्रसार को कम करने में सार्वजनिक स्थलों पर मास्क का उपयोग सबसे प्रभावी है। SARS-CoV-2 एक आवरणयुक्त पॉजिटिव सेंस सिंगल स्ट्रेन आरएनए वायरस है, जो हवा के माध्यम से श्वसन कणों के जरिए संचारित होता है।
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एक उद्योग साझेदार की सहभागिता में भारतीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने कोविड-19 महामारी से लड़ाई के लिए एक स्व-कीटाणुनाशक 'कॉपर-आधारित नैनोपार्टिकल-कोटेड एंटीवायरल फेस मास्क’ विकसित किया है। यह मास्क कोविड-19 विषाणु के साथ-साथ कई अन्य वायरल व बैक्टीरियल संक्रमणों के खिलाफ बेहतर काम करता है और यह जैवनिम्निकरण (बायोडिग्रेडेबल यानी जैविक रूप से नष्ट होने वाला), सांस लेने में सुविधाजनक और धोने योग्य है।


SARS-CoV-2 के कारण होने वाले कोविड-19 विषाणु के प्रसार को कम करने में सार्वजनिक स्थलों पर मास्क का उपयोग सबसे प्रभावी है। SARS-CoV-2 एक आवरणयुक्त पॉजिटिव सेंस सिंगल स्ट्रेन आरएनए वायरस है, जो हवा के माध्यम से श्वसन कणों के जरिए संचारित होता है।

दोहरी परत वाला विषाणुरोधी (स्व-रोगाणुनाशक) कपड़े का मास्क

दोहरी परत वाला विषाणुरोधी (स्व-रोगाणुनाशक) कपड़े का मास्क


वायरस के प्रसार को कम करने के लिए मास्क के उपयोग से संबंधित विज्ञान पर काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहीं, भारतीय बाजार में वैसे महंगे मास्कों की बिक्री हो रही है, जिनमें विषाणुरोधी और जीवाणुरोधी विशेषताएं नहीं होती हैं। इन बातों को देखते हुए पारंपरिक मास्क पहनकर, विशेष रूप से घनी आबादी वाले स्थानों जैसे अस्पतालों, हवाईअड्डों, स्टेशनों, शॉपिंग मॉल आदि में जहां विषाणु की संख्या बहुत अधिक होती है, संक्रमण को नियंत्रित करना बहुत मुश्किल काम है। मौजूदा परिस्थिति में जहां कोरोना वायरस में म्यूटेशन (उत्परिवर्तन) के कारण कोविड-19 महामारी तेजी से फैल रही है, ऐसी स्थिति में कम लागत वाला एक एंटीवायरल मास्क को विकसित करने की तत्काल जरूरत थी।


इस जरूरत को पूरा करने के लिए सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CSIR-CCMB) और बेंगलुरू स्थित कंपनी रेसिल केमिकल्स की सहभागिता से भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के एक स्वायत्त अनुसंधान व विकास केंद्र- इंटरनेशनल एडवांस्ड रिसर्च सेंटर फोर पाउडर मेटलर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (ARCI) के वैज्ञानिकों ने स्व-कीटाणुनाशक 'कॉपर-आधारित नैनोपार्टिकल-कोटेड एंटीवायरल फेस मास्क' विकसित किया है। यह कार्य कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई के लिए डीएसटी की प्रायोजित नैनो मिशन परियोजना के तहत किया गया है।


एआरसीआई ने एक फ्लेम स्प्रे पायरोलिसिस (FSP) यानी आग की लौ का छिड़काव कर पदार्थ को विघटित करने की प्रक्रिया के जरिए लगभग 20 नैनोमीटर के तांबा आधारित नैनो कण विकसित किए। सॉलिड लोडिंग और पीएच (पोटेंशियल ऑफ हाइड्रोजन) को अनुकूलित करके स्थिर नैनो पार्टिकल सस्पेंशन प्राप्त किया गया। एक उपयुक्त बाइंडर का उपयोग करके अच्छे आसंजन के साथ सूती कपड़े पर इस नैनो-कोटिंग की एक समान परत प्राप्त की गई थी। इस लेपित कपड़े ने जीवाणु के खिलाफ 99.9 फीसदी से अधिक की दक्षता का प्रदर्शन किया। CSIR-CCMB ने अपने रोगाणुशोधन गुणों के लिए SARS-CoV-2 के खिलाफ इस कपड़े की दक्षता का परीक्षण किया और जैसा कि मानक परिणामों से स्पष्ट है, इसके रोगाणुनाशक होने की क्षमता 99.9 फीसदी होने की जानकारी दी।

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फोटो: (अ) कॉपर (तांबा) आधारित नैनो पाउडर की टीईएम फोटो, (ब) नैनो पार्टिकल कोटेड फैब्रिक की एफई-एसईएम फोटोस (ग) सार्स-सीओवी-2 के खिलाफ फैब्रिक मास्क की दक्षता >99।9% और (घ) एआरसीआई में एकल परत स्व-रोगाणुनाशक मास्क का प्रदर्शन

बाहरी परत के रूप में नैनो कण लेपित कपड़े के साथ एकल परत और तीन परतों जैसे विभिन्न डिजाइन वाले प्रोटोटाइप (प्रारंभिक नमूना) मास्क का प्रदर्शन किया गया। सिंगल लेयर मास्क, एक नियमित मास्क के ऊपर एक सुरक्षात्मक विषाणुरोधी बाहरी मास्क के रूप में विशेष रूप से उपयोगी होता है।


इस पहल में औद्योगिक साझेदार कंपनी बेंगलुरू स्थित रेसिल केमिकल्स अब बड़े पैमाने पर ऐसे दोहरी परत वाले मास्क का निर्माण कर रही है। मौजूदा समय में फेस मास्क विषाणु को मारते नहीं हैं, उनका केवल फिल्टर करते हैं। इसे देखते हुए मास्क को ठीक से नहीं पहनने या सही तरीके से निपटान नहीं करने पर संक्रमण का खतरा रहता है। समुदाय में सामान्य बहु-परत वाले कपड़े के मास्क का उपयोग कोविड-19 संक्रमण को कम करने में एक व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करते हैं और इन स्व-रोगाणुनाशक कपड़े के मास्क को पहनना निश्चित रूप से उनमें से एक है।


इसके अलावा पूरे विश्व में उपयोग किए जाने के बाद मास्क के निपटान को लेकर एक बड़ी चिंता व्यक्त की जाती है। कोविड-19 के खिलाफ प्रभावी अधिकांश पारंपरिक मास्क एक बार के उपयोग योग्य हैं और जैव-निम्निकरण (प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाले) नहीं हैं। इसके चलते पर्यावरण से संबंधित गंभीर चिंताएं और अपशिष्ट-प्रबंधन के मुद्दे उत्पन्न होते हैं। मौजूदा विषाणुरोधी मास्क सूती कपड़े से निर्मित है और प्राकृतिक रूप से नष्ट होने वाला है। इसके चलते यह इन समस्याओं को समाप्त करने के साथ-साथ सांस लेने में सुविधाजनक है और इसे धोया भी जा सकता है।