104 साल की ऐथलीट से लेकर 105 साल की 'स्टूडेंट' तक, इन महिलाओं को मिला साल 2019 का 'नारी शक्ति पुरस्कार'

By कुमार रवि
March 10, 2020, Updated on : Tue Mar 10 2020 11:31:30 GMT+0000
104 साल की ऐथलीट से लेकर 105 साल की 'स्टूडेंट' तक, इन महिलाओं को मिला साल 2019 का 'नारी शक्ति पुरस्कार'
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इस महिला दिवस पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कुछ 'खास' महिलाओं को साल 2019 के 'नारी शक्ति पुरस्कार' से सम्मानित किया। इनमें वे 15 महिलाएं शामिल थीं जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्र में काम के जरिए अलग मुकाम हासिल किया है। इनमें ऐथलीट से लेकर हस्त शिल्पकार और महिला पायलट्स से लेकर खेती में काम के जरिए पहचान बनाने वाली महिलाएं शामिल हैं। साल 2019 के विजेताओं में कृषि, खेल, शिल्पकला, शिक्षा और डिफेंस क्षेत्र से जुड़ी महिलाएं शामिल हैं।


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यहां जानिए कि किन-किन महिलाओं को साल 2019 का 'नारी शक्ति पुरस्कार' मिला है।


विजेता महिलाओं में सबसे खास नाम है 104 साल की ऐथलीट मन कौर का, पंजाब की मन कौर को खेल क्षेत्र में विशिष्ट प्रदर्शन के लिए राष्ट्रपति ने नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया। उन्हें 'चंडीगढ़ के चमत्कार' के नाम से भी जाना जाता है। जब वह अवॉर्ड लेने के लिए स्टेज पर आईं तो दौड़ती हुई आईं। इस उम्र में उनको दौड़ता देख सभागार में बैठे सभी लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं। देखिए विडियो...

विजयी महिलाओं में मशरूम की खेती कर अपनी पहचान बनाने वालीं बिहार के मुंगेर की वीणा देवी भी शामिल हैं। उन्होंने मशरूम की खेती से कृषि क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई है। 43 साल की वीणा देवी गांव की सरपंच भी रह चुकी हैं। वह उन 7 खास महिलाओं में भी शामिल हैं जिन्हें पीएम मोदी ने #SheInspiresUs पहल के तहत अपना सोशल मीडिया अकाउंट सौंपा था।


पीएम मोदी का अकाउंट संभालने वालीं 7 महिलाओं में से वीणा देवी के अलावा कानपुर की कलावती देवी को भी राष्ट्रपति कोविंद ने नारी शक्ति पुरस्कार से नवाजा। कलावती देवी ने अपने दम पर 4000 से अधिक शौचालयों का निर्माण करवाकर समाज में एक अलग पहचान हासिल की है। 58 साल की कलावती देवी लोगों को घर-घर जाकर खुले में शौच से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक करती हैं।


वीणा देवी और कलावती देवी के अलावा कश्मीर की आरिफा भी हैं जिन्हें साल 2019 के लिए 'नारी शक्ति पुरस्कार' मिला है। वह कश्मीर की नमदा हस्तशिल्प कला को दोबारा से जीवित करने में लगी हैं। उन्होंने कई महिलाओं को ट्रेनिंग दी और उनकी जीवन शैली बदलने में महत्वपूर्ण योगदान निभाया।


पीएम मोदी से बात करते हुए आरिफा कहती हैं,

'आमतौर पर ऐसा बहुत कम देखा जाता है कि ग्राउंड लेवल पर काम करने वाले उद्यमियों को पहचान मिलती हो।'

झारखंड की चामी मुर्मू को भी 2019 के लिए नारी शक्ति पुरस्कार दिया गया है। वह 'लेडी टार्जन' के नाम से पहचानी जाती हैं। वह वन विभाग के साथ मिलकर 25 लाख से अधिक पेड़ लगा चुकी हैं। इस काम के लिए वह 3000 से अधिक लोगों को संगठित कर चुकी हैं। अगर बात करें रक्षा क्षेत्र की तो साल 2018 में पहली महिला फाइटर के तौर पर तैनात हुईं अवनी चतुर्वेदी, भावना कांत और मोहना जितरवाल को भी नारी शक्ति पुरस्कार से नवाजा गया।


पुरस्कार मिलने पर तीनों ने कहा,

'हम देश सेवा के लिए प्रयासरत हैं। अभी हमें बहुत कुछ हासिल करना है।'

दो जुड़वा बहनों ताशी और नुंगशी मलिक को भी इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। उत्तराखंड के देहरादून की रहने वालीं दोनों ही बहनों ने कई रिकॉर्ड बनाए हैं। उन्होंने दुनिया की 7 सबसे ऊंची चोटियों की चढ़ाई की है। इनमें एवरेस्ट भी शामिल है। 98 साल की कात्यायनी अम्मा और 105 साल की भागीरथी अम्मा को भी संयुक्त रूप से नारी शक्ति पुरस्कार दिया गया। कात्यायनी अम्मा ने साल 2018 में कक्षा 4 की परीक्षा में 100 में से 98 नंबर हासिल किए थे। वहीं 105 साल की भागीरथी अम्मा ने केरल साक्षरता मिशन की परीक्षा पास की है।

पुणे की निवासी रश्मि ऊर्ध्वारिषि को भी इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वह पिछले 60 सालों से रिसर्च एंड डेवेलपमेंट (आरएंडडी) प्रोफेशन में काम कर रही हैं। उन्होंने भारत की पहली एमिशन लेबोरेट्री की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सम्मान पाकर उन्होंने कहा,

'अगर हम अपनी बेटियों पर ध्यान देते हैं तो समाज में महत्वपूर्ण बदलाव होगा। इस महिला दिवस पर ऐसी पहल के लिए मैं पीएम मोदी को बधाई देती हूं।'

लद्दाख के खाने को अलग पहचान दिलाने वाली निल्जा वांग्मो को भी यह पुरस्कार दिया गया। वह पहला ऐसा लद्दाखी खाना परोसने वाला किचन चलाती हैं जहां पर लद्दाख की पहचान के तौर पर जाने जाने वाला खाना परोसा जाता है। इन्होंने कई महिलाओं को ट्रेन्ड करके किचन में काम करने का मौका दिया है।


पश्चिमी बंगाल की राजधानी कोलकाता की रहने वालीं कौशिकी चक्रवर्ती शास्त्रीय संगीत में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उन्होंने 'सखी वुमेन' नाम से पहला महिला शास्त्रीय बैंड बनाया। साथ ही वह कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर परफॉर्मेंस दे चुकी हैं।


आदिवासी इलाकों में महिलाओं को व्यवसाय करने में मदद करने वालीं ओडिशा की भूदेवी को भी इस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है। सम्मान पाकर पीएम मोदी से बात करते हुए भूदेवी ने कहा,

'मैं आपको आपके प्रयासों के लिए बधाई देती हूं। इस साल सरकार ने एफपीओ (फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन) के लिए बड़ा मिशन लिया है। सभी को इसका लाभ लेना चाहिए।'

मालूम हो, नारी शक्ति पुरस्कार हर साल अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस यानी 8 मार्च को दिया जाता है। यह ऐसी महिलाओं को दिया जाता है जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्र में असाधारण काम किया है। 


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