पीएम मोदी बर्थडे स्पेशल: भारतीय राजनीति में नरेंद्र "मोदी" होने के मायने

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“राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय इदं न मम” अर्थात यह जीवन राष्ट्र को अर्पित है, यह मेरा नहीं है। राष्ट्र, जिसका कंकर-कंकर, शंकर है। जिसका बिन्दु-बिन्दु गंगाजल है। राष्ट्र साधना के इस पुनीत मंत्र को चरितार्थ करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज, राष्ट्रीय आशा, अपेक्षा और अभिलाषा का केंद्र बन गए हैं।


‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ की कार्य संस्कृति को मूर्तरूप प्रदान करते ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ के शिल्पकार मोदी, “नए भारत” के विश्वकर्मा हैं। नया भारत, जो शत्रु को घर में घुस कर मारता है। जो, डिजिटल इण्डिया की तरंगो पर थिरकता है। जिसका प्रगति पथ, अंतिम व्यक्ति से अंतरिक्ष तक है। जहां राष्ट्र रक्षा ही धर्म है। जहां “अंत्योदय से राष्ट्रोदय” एक राष्ट्रीय संकल्प है। जहां, आतंक और अनियमितता का निर्मूलन राष्ट्रीय विचार है। जहां राष्ट्र, भूमि का टुकड़ा नहीं बल्कि “मां” का स्वरूप है। जिसके लिए समवेत स्वर में हर भारतीय गाता है कि “मां तेरा वैभव अमर रहे, हम दिन चार रहे न रहें”

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपना 70वां जन्मदिन मना रहे हैं (फाइल फोटो: ShutterStock)

आज वैश्विक नभ पर भारत उदयाचल सूर्य की भांति दमक रहा है। आर्थिक निवेश से आध्यात्मिक प्रेरणा तक, अनुसंधान से अवस्थापना तक विश्व, आज भारत की ओर निहार रहा है तो इसका श्रेय भी नरेंद्र मोदी को जाता है। मोदी यानी वह राजनीतिक फकीर, जो कभी भी सत्ता छोड़, झोला उठा कर चल देने को तैयार है। जिसकी फाकामस्ती में आज पूरा भारत मस्त है।


इन सबके दरम्यान अनेक सियासी जमातें और बहुत सारे लोग विभिन्न कारणों से मोदी से असहमत भी हैं लेकिन इन तमाम असहमतियों और चुनौतियों के मध्य “मोदी” आज भारतीय राजनीति के केंद्र भी हैं, परिधि भी हैं।


दरअसल, भारतीय राजनीति में नरेंद्र मोदी होने के अनेक मायने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिंद की सिय़ासत में “अंत्योदय” का प्रतीक हैं। उनकी उपस्थिति भारतीय लोकतंत्र को परिवारवाद, जातीय अधिनायकवाद तथा कुलीन श्रेष्ठताबोध की जड़ता से मुक्ति का अहसास कराती है। चाय वाले से देश के ‘चौकीदार’ तक की यात्रा और प्रधानमंत्री में ‘प्रधानसेवक’ का कर्तव्यबोध, भारत की राजनीति में जन के जनार्दन होने की पुनीत अनुभूति से सुवासित करती है।


मां और मातृभूमि के प्रति अगाध श्रद्धा से पूरित तथा पं. दीनदयाल उपाध्याय की राष्ट्रवादी विचारधारा में दीक्षित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनमानस के ऐसे महानायक हैं जिनकी अपरिमित तेजस्विता ने दशकों से ‘अलगाव व अवनति’ के कारक बने दर्जनों समस्यामूलक विषयों का समाधान कर समाज की प्रगति व समोत्कर्ष का मार्ग प्रशस्त किया है।

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पीएम मोदी आज भारतीय राजनीति के केंद्र भी हैं, परिधि भी हैं (फोटो साभार: ShutterStock)



स्वाधीनता के पश्चात अनुच्छेद-370 और 35-ए के शूल से घायल कश्यप ऋषि का कश्मीर हो अथवा भारतीय जनमानस की सकल आस्था के केंद्र मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली का विवाद या दशकों से धार्मिक आधार पर पीड़ित हो रही मानवता, सभी नरेंद्र मोदी की राजनीतिक जिजीविषा के चलते समाधान को प्राप्त हुई हैं।


वंचितों, शोषितों और निर्धनों के उत्थान हेतु स्वाधीन भारत में कम या ज्यादा मात्रा में प्रयास होते ही रहे हैं। लेकिन प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी ने विकास को अंत्योदय की अवधारणा से जोड़कर शताब्दियों की पीड़ा को हरने का कार्य किया है। अब देखिए, संसाधनहीनता के चलते दशकों से चूल्हे के धुएं से अपना स्वास्थ्य खोने को विवश महिला शक्ति को उज्जवला योजना के माध्यम से निःशुल्क रसोई गैस कनेक्शन प्रदान कर उसे वंचना से मुक्ति दिलाने का कार्य किया। लगभग 08 करोड़ से अधिक परिवार इससे लाभान्वित हुए हैं।


ऐसे ही शताब्दियों से अमानवीय व अपमानजनक पीड़ा का कारक बने “तीन तलाक” को निर्मूलित कर मुस्लिम महिलाओं के जीवन में सदियों से प्रतीक्षित “सुबह” का आगाज किया। इन सबके मध्य, ‘स्वच्छ भारत अभियान’ के माध्यम से घर-घर बने शौचालयों ने स्वास्थ्य सुरक्षा के साथ-साथ जो नारी शक्ति के “सम्मान” संरक्षण का कार्य किया है, उसके लिए तो मानव सभ्यता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सदैव ऋणी रहेगी।


आज, ‘प्रधानमंत्री जनधन योजना’ के कारण ही करोड़ों लाभार्थी, सरकार की लोक कल्याणकारी योजनाओं से सीधे जुड़ पाए हैं। कभी पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि मैं 01 रुपया भेजता हूं तो अंतिम व्यक्ति तक 10 पैसा पहुंचता है। विदित हो अब शेष 90 पैसे भी लाभार्थी के खाते में ही जाते हैं।


इसी तरह, आयुष्मान भारत योजना के तहत मिलने वाले 5 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य सुरक्षा कवर ने करोड़ों निर्धनों एवं वंचितों को इलाज के लिए दुकान, मकान या जेवर गिरवी रखने से बचा लिया। पेयजल की समस्या का समाधान करती ‘हर घर जल’ योजना आमजन की स्वास्थ्य सुरक्षा में बड़े परिवर्तन का कारक बन रही है।


ग्रामोदय से भारत उदय तक, प्रधानमंत्री आवास योजना से किसान सम्मान निधि तक, धारा-370 से तीन तलाक की कुप्रथा हटाने तक मोदी के हर निर्णय ने भारत और भारतीय लोकतंत्र को मजबूती प्रदान की है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत की नींव रखी



अन्नदाता किसानों की आत्महंता बनने की विवशता समझते हुए प्रारम्भ की गई, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री ग्राम सिंचाई योजना आदि के माध्यम से करोड़ों अन्नदाता किसानों के जीवन में आय का वर्धन और मौसम जनित अस्थिरता का अंत करने का कार्य सम्पन्न हुआ। यही नहीं, मुद्रा योजना, स्टार्ट अप इण्डिया, स्टैण्ड-अप इण्डिया जैसी योजनाओं ने भारतीय उद्यमशीलता एवं नवाचार को नए आयाम प्रदान किए हैं।


नरेंद्र मोदी तकनीक प्रेमी एवं रचनाधर्मी हैं। उन्हें ज्ञात है कि अनुसंधान व नवोन्मेष के माध्यम से ही भारत प्रगति कर सकता है। लगभग 03 हजार स्कूलों में अटल टेक्नोलॉजी प्रयोगशालाएं प्रारम्भ करना, इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए ‘स्मार्ट इंडिया हैकाथॉन’ का प्रमोशन, देश की विभिन्न आई.आई.टी/ एन.आई.टी में अटल इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना आदि उनके प्रगतिशील और प्रयोगधर्मी व्यक्तित्व की परिचायक हैं। डिजिटल होता इण्डिया, मोदी की दूरदृष्टि का ही सुफल है। “लोकल के लिए वोकल” होकर मोदी ने स्वदेशी से स्वशासन की संकल्पना को स्वर प्रदान कर दिया है। यह “आत्मनिर्भर भारत” की नींव है।


हरि अनन्त, हरि कथा अन्नता की भांति ‘नए भारत’ का निर्माण करती प्रधानमंत्री मोदी द्वारा संचालित योजनाओं की अगणित श्रंखला के विषय में जितना लिखा जाए, कम है। अधिकांश योजनाओं का जिक्र यहां नहीं हो पाया है लेकिन निश्चित रूप से वह आमजन के मानस पर अवश्य अंकित होंगी।


भारतीय राजनीति के फलक पर मोदी का उद्भव अनेक राजनीतिक दलों के लिए अमावस्या से कम नहीं है। मात्र 06 वर्ष के कार्यकाल में “कांग्रेस मुक्त भारत” का नारा फलीभूत होता दिखाई पड़ रहा है तो राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष नामक संस्था की स्थिति ‘ढूढ़ों तो जानें’ जैसी हो गई है।


इतनी विराटता कि कभी वीजा देने से इंकार करने वाला महाबली अमेरिका हाउडी मोदी के जयघोष के साथ उनका नागरिक अभिनंदन करता है। सरलता इतनी कि पतितपावनी मां गंगा के तीर, वह स्वच्छताकर्मियों के चरण धोकर कृष्ण-सुदामा की स्मृति को जीवंत कर देते हैं। प्रत्येक स्थिति में मित्रता निभाने के लिए प्रसिद्ध नरेंद्र मोदी, शत्रुओं को सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक का “उपहार” देकर हतप्रभ कर देते हैं। अंत्योदय से राष्ट्रोदय की संकल्पना को साकार करते हुए भारतीय राजनीति में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ को नया स्वरूप प्रदान करते हैं।

भारतीय राजनीति में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ को नया स्वरूप प्रदान

भारतीय राजनीति में ‘सोशल इंजीनियरिंग’ को नया स्वरूप प्रदान किया है



वैश्विक क्षितिज पर शायद ही भारत को कभी इतनी स्वीकार्यता प्राप्त हुई हो कि एक ही बिंदु पर इजराइल और अरब, अमेरिका तथा रूस भारत का समर्थन करें। यह “मोदी इफेक्ट” ही है जिसके कारण हम सभी ने पाक और चीन के मुद्दे पर विश्व जनमत को ‘भारतपक्षीय’ होते हुए अनेक बार देखा।


सभ्यता और संस्कृति के पुनरोत्थान हेतु मोदी द्वारा किए जा रहे भागीरथी प्रयास, अनायास ही स्वामी विवेकानंद जी की याद दिलाते हैं। यह प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में उ.प्र. के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रयागराज की धरती पर दिव्य कुंभ-भव्य कुंभ का सफल आयोजन का सुफल है कि वैभव और वैराग्य, अध्यात्म और आधुनिकता के मध्य समन्वय का पथ प्रदर्शित करते ‘कुम्भ’ को यूनेस्को द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्वीकार किया गया। आज पश्चिम के देश ‘योग’ के प्रचारक बन गए हैं, इस करिश्में का जादूगर भी मोदी ही हैं।


बाबा विश्वनाथ की पावन नगरी वाराणसी से सांसद नरेंद्र मोदी का उत्तर प्रदेश के प्रति प्रेम और लगाव अनिर्वचनीय है। केन्द्र सरकार द्वारा घोषित गरीब कल्याण पैकेज, ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न’ योजना तथा अन्य राहतों का सबसे अधिक लाभ उत्तर प्रदेश को प्राप्त हुआ है। यही नहीं मोदी ने एक तरफ बुंदेलखण्ड को डिफेंस कारीडोर का उपहार देकर उसके आर्थिक उन्नयन का मार्ग प्रशस्त किया, वहीं दूसरी तरफ सदियों से प्यासे बुंदेलखण्ड की तृषा के शमन हेतु जल जीवन मिशन के अंतर्गत ‘हर घर नल, हर घर जल’ की सौगात भी दी।


अब वह दिन भी दूर नहीं जब रक्षा सामग्री के उत्पादक राष्ट्रों के मानचित्र पर उत्तर प्रदेश, भारत का प्रतिनिधित्व करेगा। हालांकि इसका श्रेय मुख्यमंत्री योगी की सक्रियता को भी जाता है। योगी, अपने प्रधानमंत्री के सपनों को साकार करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ सक्रिय दिखाई पड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश द्वारा ‘ईज आफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग’ में गत वर्ष 12वें स्थान के सापेक्ष, इस वर्ष द्वितीय स्थान को प्राप्त करना इसका प्रमाण है।


भारतीय राजनीति में “जीवित किंवदंती” बन चुके “अपराजेय” छवि वाले मोदी के विषय में जितनी अधिक बात उनके समर्थक करते हैं, उससे कहीं अधिक चिंतन उनके विरोधी करते हैं। मतलब समर्थक और विरोधी दोनों के मन पर “मन की बात” करने वाले मोदी का कब्जा है। यह ‘कब्जा’ हमेशा बरकरार रहे। ताकि लोकतंत्र आबाद रहे। समर्थकों और विरोधियों की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनकी 70वीं वर्षगांठ पर दिली मुबारकबाद।


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