क्या आप अपने नए स्टार्टअप में वित्तीय मामलों की जटिलता से परेशान हैं? यह स्टार्टअप कर सकता है आपकी मदद!

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क्विकबुक्स पर 45 लाख ग्लोबल कस्टमर्स मौजूद हैं और इनट्यूट, टेक स्टार्टअप्स को अपने साथ जुड़ने की सहूलियत भी देता है। इनट्यूट, टेक स्टार्टअप्स के प्रोडक्ट्स को अपने प्लैटफ़ॉर्म पर इंटीग्रेट करता है। इन गो इलेक्ट्रिक (inGO Electric) उन स्टार्टअप्स में से एक है, जो अपनी वित्तीय गतिविधियों की आसान निगरानी के लिए क्विक बुक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

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अमोघ मुकुंदा, निखिल गोन्ज़ैल्विस, अर्जुन काशी, मंजुनाथ पंथांगी (लेफ्ट से राइट)

क्या आप एक स्टार्टअप हैं, जो अपनी वित्तीय ज़रूरतों के लिए किसी सहयोगी की तलाश में हैं? अगर ऐसा है तो इनट्यूट सर्कल्स आपकी मदद कर सकता है। इनट्यूट सर्कल्स, स्टार्टअप्स को एक पर्सनल ईकोसिस्टम की सहूलियत मुहैया कराता है, जिसमें मेंटर्स, निवेशक, को-वर्किंग स्पेस, इनक्यूबेटर्स और अकाउन्टेन्ट्स आदि शामिल होते  हैं। इनट्यूट सर्कल्स, स्टार्टअप्स को फ़ाइनैंशल मैनेजमेंट ट्रेनिंग और इनट्यूट के फ़्लैगशिप फ़ाइनैंशल मैनेजमेंट सॉफ़्टवेयर (क्विकबुक्स ऑनलाइन) की सुविधा प्रदान करता है।


क्विकबुक्स पर 45 लाख ग्लोबल कस्टमर्स मौजूद हैं और इनट्यूट, टेक स्टार्टअप्स को अपने साथ जुड़ने की सहूलियत भी देता है। इनट्यूट, टेक स्टार्टअप्स के प्रोडक्ट्स को अपने प्लैटफ़ॉर्म पर इंटीग्रेट करता है। इन गो इलेक्ट्रिक (inGO Electric) उन स्टार्टअप्स में से एक है, जो अपनी वित्तीय गतिविधियों की आसान निगरानी के लिए क्विक बुक्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।

बदल रही अर्बन पर्सनल मोबिलिटी की तस्वीर!

इन गो इलेक्ट्रिक की शुरुआत 2018 में हुई थी। यह कंपनी ख़ास तरह की गाड़ियां डिज़ाइन करती है, जो पोर्टेबल, कनेक्टेड, भरोसेमंद और स्टाइलिश हों। कंपनी के फ़ाउंडर और सीईओ, निखिल गोन्ज़ैल्विस कहते हैं,

"हमारी कंपनी अर्बन पर्सनल मोबिलिटी के भविष्य को ध्यान में रखते हुए गाड़ियां तैयार कर रही है।"


कॉर्पोरेट जगत में 16 साल बिताने के बाद, निखिल ने तय किया कि वह ऑन्त्रप्रन्योरशिप की ओर रुख़ करेंगे। दरअसल निखिल पैरिस के दौर पर थे और वहां उन्होंने एक शख़्स को एक पोर्टेबल इलेक्ट्रिक स्कूटर चलाते हुए देखा, जो तेज़ रफ़्तार भी था और खर्च के हिसाब से किफ़ायती भी था। यह देखने के बाद निखिल समझ गए आने वाला समय इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ही है।


भारत लौटने के बाद उन्होंने बॉश आर ऐंड डी ऑटोमोबाइल्स के पूर्व अध्यक्ष मंजुनाथ पंथांगी से मुलाक़ात की और इसके बाद दोनों ने मिलकर इन गो इलेक्ट्रिक की शुरुआत करने का फ़ैसला लिया। उन्होंने एक ऐसे शख़्स को हायर किया, जिसने एक ख़ास तकनीक के ज़रिए शॉक अब्ज़ॉर्बर्स (झटके बरदाश्त करने के लिएव उपकरण) को गाड़ी के अंदर लगाया था और किसी बाहरी शॉक अब्ज़ॉर्बर की ज़रूरत न होने की वजह से गाड़ी का वजन भी बेहद कम हो गया। इसके अलावा यह भी पाया गया कि इस तरह के ख़ास डिज़ाइन की बदौलत माइलेज में 12 प्रतिशत का इज़ाफ़ा हुआ। 




इस प्रोडक्ट का नाम है, इन गो ट्रॉन, जिसके दोनों टायरों में कस्टम लाइटिंग का फ़ीचर दिया गया है। इसके अलावा, यह फ़ोल्डेबल भी है, जिसकी बदौलत इसे अपने साथ ले जाना भी आसान है। स्कूटर में एयरलेस पंक्चर-रेसिस्टेन्ट टायर, आईपी-रेटेड बैटरी आदि फ़ीचर्स भी मौजूद हैं। साथ ही, इसे आप अपने मोबाइल ऐप के साथ भी जोड़ सकते हैं और रिमोट लॉकिंग और रूटिंग ऐनालिटिक्स का लाभ भी उठा सकते हैं।


अभी तक इस इलेक्ट्रिक स्कूटर के 8 प्रोटोटाइप तैयार किए जा चुके हैं और 11 किमी. की रेंज में इनका परीक्षण भी किया जा चुका है। इन गो इलेक्ट्रिक इन गाड़ियों की बिक्री शुरू करने से पहले सर्विस सपोर्ट और यूज़र एक्पीरिएंस के पहलुओं पर और काम करना चाहता है। 


निखिल बताते हैं कि वह कई वेंडर्स के साथ मिलकर काम कर रहे थे और हर एक के इनवॉइस को एक-एक करके ट्रैक करना अच्छा विकल्प नहीं था।


निखिल कहते हैं,

"जब मैं प्रोडक्ट डिवेलपमेंट पर काम कर रहा था, तब मेरे दिमाग़ में अकाउंट्स को मैनेज करने की समस्या लगातार कौंध रही थी। मुझे चिंता थी कि यह कैसे पता लगेगा कि कस्टमर ने पैसा चुका दिया है या नहीं आदि।"



आईआईएम-बी एनएसआरसीईएल के साथ एक इनक्यूबेशन प्रोग्राम के तहत, इन गो इलेक्ट्रिक की मुलाक़ात, इनट्यूट की टीम के साथ हुई और उन्होंने क्विक बुक्स ऑनलाइन सॉफ़्टवेयर का डेमो देखा। निखिल को उनकी समस्या का हल मिल गया। पहले जहां निखिल की कंपनी को इनवॉइस का पेमेंट वेरिफ़ाई करने के लिए महीनों का समय लगता था, अब वही काम मिनटों में होने लगा। निखिल कहते हैं कि एक स्टार्टअप के लिए समय की बहुत ज़्यादा क़ीमत होती है और क्विक बुक्स के इस्तेमाल से उन्हें इस संबंध में काफ़ी फ़ायदा मिला।


क्विकबुक्स ऑनलाइन ने इन गो इलेक्ट्रिक के लिए मासिक लाभ और हानि के आंकड़ों को सटीक तौर पर पता लगाने; कस्टमर डेटा मैनेजमेंट, इनवॉइस, जीएसटी और डिलिवरी चालान्स मैनेज करने और साथ ही इनवेन्टरी का प्रबंधन करने और स्टॉक अलर्ट्स देने के कामों में लगने वाली जद्दोजहद और बेहिसाब समय के व्यय से छुटकारा दिलाया।


निखिल कहते हैं कि इन सहूलियतों की बदौलत उन्हें अतिरिक्त हायरिंग की ज़रूरत नहीं पड़ी और वित्तीय प्रक्रिया जटिल से बेहद सहज हो गई। निखिल मशवरा देते हैं कि अन्य टेक स्टार्टअप्स को भी क्विक बुक्स ऑनलाइन के साथ आना चाहिए क्योंकि इन सुविधाओं की बदौलत हर महीने 10 से 15 हज़ार रुपए की बचत होगी, जो नए स्टार्टअप्स के लिए एक बड़ा फ़ायदा है।




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