पढ़ें इस हफ्ते की टॉप 5 स्टोरीज़

By yourstory हिन्दी
June 13, 2020, Updated on : Sat Jun 13 2020 11:31:30 GMT+0000
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इस हफ्ते हमने कई बेहतरीन स्टोरीज़ प्रकाशित की हैं। यहाँ आपके सामने हम उन्हें संक्षेप में प्रस्तुत कर रहे हैं।

पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़

पढ़ें इस हफ्ते की टॉप 5 स्टोरीज़



कोरोना वायरस महामारी के बीच चीजें मुश्किल हो गई हैं। हर क्षेत्र इससे बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लेकिन इस समय कोई इसके समाधान के लिए काम कर रहा है, तो कोई इस बीच ढीले पड़ गए व्यवसायों में फिर से तेजी लाने की कोशिश कर रहा है। इसी के साथ बिहार के एक छोटे से गाँव से निकालकर महज 23 साल की उम्र में प्रोफेसर बनने वाले प्रशांत की कहानी आपको भी आगे बढ़ने प्रेरणा देगी। इस हफ्ते ऐसी ही कुछ बेहतरीन स्टोरीज़ हमने प्रकाशित की हैं।


यहाँ हम आपके सामने उन्ही स्टोरीज़ को संक्षेप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनहे आप साथ में दिये गए लिंक पर क्लिक कर विस्तार से भी पढ़ सकते हैं।

'रुक जाना नहीं'

प्रोफेसर प्रशांत रमण रवि

प्रोफेसर प्रशांत रमण रवि



शुरुआती जीवन में तमाम कठिनाइयों से से पार पाते हुए प्रशांत रमण रवि महज 23 साल की उम्र में प्रोफेसर बन चुके थे और ऐसा करके उन्होने अपने सपने को पूरा किया, लेकिन उनकी यह यात्रा कतई सरल नहीं थी। बिहार के पश्चिमी चंपारण के पतिलार गाँव में जन्मे प्रशांत का परिवार कभी भीषण मुश्किल दौर से गुज़र रहा था, लेकिन उनके हौसले और दृन संकल्प के आगे ये सारी परेशानियाँ छोटी नज़र आने लगीं।


अपने करियर के चुनाव को लेकर उनके शिक्षक ने कभी उनसे कहा था,

“ I.A.S बनो या प्रोफेसर महत्वपूर्ण यह है कि दोनों सेवा के माध्यम हैं देखना यह है कि तुम्हें किस काम को करने में ज्यादा खुशी मिलती है, काम वहीं करो जो तुम्हारी रुचि में हो, जिसे करते हुए तुम्हे जिंदगी खूबसूरत लगे।”

प्रशांत की यह पूरी कहानी आप इधर पढ़ सकते हैं।  

इम्यूनिटी पर ज़ोर

ज़ायरो हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक कामायनी नरेश

ज़ायरो हेल्थ केयर प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक कामायनी नरेश



कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक फिलहाल टीके के निर्माण में लगे हुए हैं, हालांकि जब तक टीका सामने नहीं आ जाता है तब तक लोगों को उनकी इम्यूनिटी मजबूत करने की सलाह दी जा रही है। इस बीच भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कामायनी नरेश ने यह दावा किया है कि उन्होने इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए एक बेहतर समाधान विकसित किया है।


नरेश जिस ज़ायरोपैथी की बता करते हैं वो उसे आयुर्वेद का आधुनिक रूप बताते हैं। नरेश तो यहाँ तक दावा करते हैं कि यदि उन्हे कोरोना संक्रमित एक जिला दे दिया जाए तो वे उस जिले को 20 दिनों में कोरोना वायरस संक्रमण से मुक्त बना देंगे। यह खास स्टोरी आप इधर पढ़ सकते हैं।

कोरोना टेस्ट में मदद

सुपार्श्व स्वैब्स के दूसरी पीढ़ी के एंटरप्रेन्योर (बाएं से दाएं) अजय जैन, राहुल जैन और राजीव जैन

सुपार्श्व स्वैब्स के दूसरी पीढ़ी के एंटरप्रेन्योर (बाएं से दाएं) अजय जैन, राहुल जैन और राजीव जैन



देश में हर रोज़ कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और सरकार फिलहला टेस्ट की गति पर भी ध्यान दे रही है, इस बीच एक भारतीय कंपनी का दावा है कि कोरोना वायरस टेस्ट के लिए उपयोग में लाई जाने वाली पॉलिएस्टर स्वैब्स को लेकर देश की जरूरत को वो अकेला पूरा कर सकती है।


इस कंपनी के बारे में आप इधर विस्तार से पढ़ सकते हैं। साल 1992 में शुरू हुई यह कंपनी स्वैब्स के अलावा कॉटन रोल, कॉटन प्लेट, मेडिकल डिस्पोजल, टूथपिक्स, वेट पाइप्स आदि का भी निर्माण करती है।

2 साल में 7 करोड़ का टर्नोवर

सूरज वज़ीरानी, संस्थापक और सीईओ, द ब्यूटी को

सूरज वज़ीरानी, संस्थापक और सीईओ, द ब्यूटी को



सूरज वज़ीरानी ने 2018 में महिलाओं की ब्यूटी प्रोडक्ट्स कंपनी, The Beauty Co की शुरुआत की थी। अमेजन पर उनके द्वारा बेचे जाने वाले पहले उत्पादों में चारकोल टीथ व्हाइटनिंग पाउडर और कॉफी स्क्रब थे, जो तुरंत हिट हो गए। 65 लाख रुपये के निवेश के साथ शुरू हुआ कारोबार आज 7 करोड़ के सालाना टर्नोवर तक पहुँच गया है।


योरस्टोरी के साथ हुए सूरज के साक्षात्कार को आप इधर पढ़ सकते हैं। The Beauty Co के उत्पाद आज अमेज़न, फ्लिपकार्ट और नाइका जैसे बड़े ई-कॉमर्स स्टोर पर उपलब्ध हैं और यह ब्रांड अब बाज़ार में बड़ी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है।

कठिन समय में पर्यटन पर ध्यान

शिखर चड्ढा, सह-संस्थापक, द टार्जन वे

शिखर चड्ढा, सह-संस्थापक, द टार्जन वे



कोरोना वायरस महामारी के चलते पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुआ है, लेकिन नोएडा के इस स्टार्टअप ने इस दौरान पर्यटकों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा के लिए अपने कदमों को आगे बढ़ाया है। ‘द टार्जन वे’ नाम का यह स्टार्ट जल्द ही कैंपर वैन की शुरुआत करने जा रहा है, जिसके जरिये सैलानी बेहद सुरक्षित तरीके से अपनी यात्रा का अनुभव ले सकेंगे।


साल 2018 में शुरू हुए इस स्टार्टअप के बारे में आप इधर विस्तार से पढ़ सकते हैं। स्टार्टअप के सह-संस्थापक शिखर चड्ढा सैलानियों की मुश्किलों को हल करने और उन्हे किसी भी तरह के फ्रॉड से बचाने के लिए अपने कदमों को तेजी के साथ आगे बढ़ा रह रहे हैं।