इस हाउस वाइफ ने 50,000 रुपये के निवेश से खड़ा किया 10 करोड़ रुपये का कारोबार

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दिल्ली की ज्योति वाधवा गृहिणी होने के अलावा दो साल की बच्ची की माँ हैं। साल 2010 की बात है जब एक दिन उनके पति अंशुल बंसल घर आए और ज्योति से बोले कि वे अपनी निवेश बैंकर की नौकरी छोड़ना चाहते हैं। उस समय अंशुल अपने परिवार के एकमात्र कमाने वाले सदस्य थे। उन्होंने ज्योति से कहा कि वह निवेश बैंकर के रूप में अपनी नौकरी छोड़ना चाहते हैं और अपने दम पर कुछ करना चाहते हैं। उस समय ज्योति काफी कनफ्यूज्ड हुईं। ज्योति ने महसूस किया कि उनके पति जोखिम उठाने वाले हैं। हालांकि इस जोखिम को देखते हुए ज्योति ने उन्हें आर्थिक रूप से भी योगदान देने का सोचा।


2006 में शादी करने से पहले तीन साल तक एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में एचआर और प्रशासनिक विभाग में काम करने वाली ज्योति कहती हैं,

"मुझे लगा कि मुझे कुछ करना चाहिए, लेकिन साथ ही, मैं अपनी बेटी को एक प्लेस्कूल में नहीं छोड़ना चाहती थी। मैं उन विकल्पों की तलाश में थी, जहाँ मैं घर से काम कर सकूं।”


jyoti

ज्योति वाधवा


दिल्ली की ज्योति वाधवा ने कुछ रिश्तेदारों से सुना था कि कोई भी ऑनलाइन व्यवसायों से कमा सकता है; उन्होंने यह भी सुझाव दिया था कि विंटेज साड़ियों को ऑनलाइन बेचना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। संभव अवसर के बारे में जानने के बाद, ज्योति ने हर दिन पांच से छह घंटे तक बाजार पर रिसर्च किया, यह समझने की कोशिश की कि ग्राहक क्या और कहां से खरीद रहे थे। वह आवश्यक निवेश की मात्रा को भी शून्य करने की कोशिश कर रही थी। वे कहती हैं, ''मेरे पास केवल 50,000 रुपये थे, इसलिए मुझे बहुत ही सिलेक्टिव और सावधान होना था।"


50,000 रुपये अंशुल के पास थे। दरअसल उनके पास बचत में 1 लाख रुपये थे और उन्होंने अपने व्यवसाय और ज्योति के लिए समान रूप से 50-50 हजार रुपए देने का फैसला किया। अंशुल ने अपने आईटी सर्विस बिजनेस को स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया, लेकिन ज्योति ने पुरानी साड़ियों की बिक्री के लिए एक ऑनलाइन व्यवसाय बनाने में खुद को लगा दिया।





ऐसे तय की मंजिल

अपनी रिसर्च के दौरान, ज्योति ने पाया कि प्रिंटेड प्योर सिल्क कपड़े डिमांड में थे। इसलिए उन्होंने ऐसे कपड़ों की खोज शुरू कर दी। वे कहती हैं,

“मेरे सामने कई हैंडक्राफ्टेड साड़ियां आईं। जब मैंने इन प्रोडक्ट्स को देखा तो मैं बहुत उत्साहित हो गई। मुझे लगा कि मैं निश्चित रूप से इन्हें बेच सकती हूं। मैं बहुत प्रभावित हुई और मुझे आगे बढ़ने का आत्मविश्वास मिला।"


ज्योति ने कुछ आइटम सिलेक्ट किए और उन्हें eBay पर अपलोड कर दिया। और यहां से संस्कृति विंटेज का जन्म हुआ। शुरुआत में, यह पता लगाना काफी चुनौतूपीर्ण था कि ऑनलाइन प्रोडक्ट्स को लिस्ट और डिस्क्राइब कैसे करते हैं, हालांकि उन्होंने जल्द ही चीजों को सही करना सीख लिया। शुरुआती दिनों में बिना किसी स्टाफ के एक्सपोर्ट बिजनेस में होने का मतलब था कि ज्योति को डाक सेवाओं से शिपिंग खुद ही करनी थी। इसके लिए ज्योति को अपनी बेटी के साथ तीन-चार घंटे तक लाइनों में खड़ा रहना होता था। 


भले ही शुद्ध रेशम की कढ़ाई वाली साड़ियाँ ऑनलाइन बेची जा रही थीं, लेकिन उस समय कोई और हस्तनिर्मित अर्थात हैंड-क्राफ्टेड साड़ियाँ नहीं बेच रहा था और ज्योति के अनुसार यह उनके लिए सबसे अलग साबित हुआ।


वह बताती हैं,

“जिस वजह से हमें खड़ा होने में मदद मिली, वह यह थी कि उस समय कोई भी वास्तव में ऐसे उत्पादों में निवेश नहीं कर रहा था। लोग पुरानी रेशम की साड़ियों को खरीदते थे, फोटो लेते और बेचते, कम मार्जिन कमाते। वे 400 रुपये में खरीदते थे और 600 रुपये में बेचते थे। मुझे एहसास हुआ कि हम प्राइस गेम नहीं खेल सकते हैं और इस तरह हमने प्रीमियम गेम खेलने का फैसला किया। हमने सबसे सुंदर स्टफ पेश किया, जो अधिक महंगा था। हमने ऐसे समय में अच्छी फोटोग्राफी, लाइट और डीएसएलआर कैमरे में निवेश किया जब अन्य सेलर केवल 2-मेगापिक्सेल फोन कैमरे का उपयोग कर रहे थे।”


चूंकि संस्कृति विंटेज ईबे प्लेटफॉर्म पर शुरू हुई थी, उनके पास कोई मार्केटिंग पर खर्च करने के लिए पैसे नहीं थे। ज्योति ने अपना फोकस इस पर लगाया कि सबसे ऊपर कैसे आना है। वह जल्द ही एक दिन में 15- 40 डॉलर प्रति पीस की रेंज में 500-600 साड़ी बेचने लगीं, जिसमें 10-15 प्रतिशत शुद्ध मार्जिन था। इसका नतीजा ये निकला की वे जल्द ही, 40-50 प्रतिशत बाजार पर कब्जा करने में सफल रही।





नए रास्ते पर

हालांकि, तीन से चार साल के बाद ईबे बाजार में गिरावट आई। वे कहती हैं,

“हम शीर्ष पर पहुंच गए और उसके बाद कुछ भी नहीं था। हमने 2013 में Amazon.com पर खुद को लिस्टेड किया था (तब तक यह भारत में नहीं था)। हमने प्रयोग किया और महसूस किया कि यह हमारे मौजूदा प्रोडक्ट्स का मंच नहीं था। इसने हमें कपड़ों और फैशन ज्वैलरी की एक नई रेंज शुरू करने की दिशा दी।"


जब अमेजॉन भारत में लॉन्च हुआ, तो ज्योति ने जेफिर (Zephyrr) नामक अपनी फैशन ज्वैलरी लाइन लॉन्च की, जो जल्द ही प्लेटफॉर्म पर एक "बेस्ट सेलर" बन गई।


स्टार्टअप अभी बूटस्ट्रैप्ड है। इसने विंटेज साड़ी बेचने वाले कारोबार से हासिल किए गए रुपयों को नई रेंज के प्रोडक्ट्स में निवेश किया। ज्योति ने कारोबार सिर्फ 50,000 रुपये से शुरू किया था, अब उनका वार्षिक कारोबार लगभग 10 करोड़ रुपये है। शुरुआती दिनों में अकेले बिजनेस चलाने से लेकर अब उनके पास 30 लोगों की एक टीम है, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं।


2015 में, ज्योति को भारत के राष्ट्रपति की ओर से निर्यात श्री पुरस्कार मिला। यह एक ऐसा पुरस्कार है जो भारत से निर्यात में उत्कृष्टता के लिए हर दो साल में 50 चुने गए निर्यातकों को दिया जाता है। संस्कृति अब दुनिया भर में अपने उत्पादों का निर्यात करने वाले लगभग सभी ई-कॉमर्स प्लेटफार्मों पर मौजूद है। जो महिला परिवार की किटी में योगदान करना चाहती थी, आखिरकार उसने वही किया!




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