किसानों-व्यापारियों की मदद कर रहा नवीन मंडी ऐप, चंद महीनों में पति-पत्नी ने खड़ा किया 7 करोड़ का बिजनेस

नवीन मंडी ऐप की शुरुआत कोरोना काल के दौरान हुई. सुनीता शर्मा ने अपने पति और बेटे की मदद से करोड़ों की कंपनी खड़ी कर दी. इस ऐप ने मंडी में होने वाली तमाम ट्रांजेक्शन को आसान भी बनाया और उसे ऑर्गेनाइज भी किया. महज 8 महीनों में ही कंपनी ने करीब 7 करोड़ का टर्नओवर कर लिया है.

किसानों-व्यापारियों की मदद कर रहा नवीन मंडी ऐप, चंद महीनों में पति-पत्नी ने खड़ा किया 7 करोड़ का बिजनेस

Thursday March 23, 2023,

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पिछले कुछ सालों में एग्रीकल्चर सेक्टर (Agriculture Sector) में बहुत सारे इनोवेशन हुए हैं. इसकी एक बड़ी वजह है कोरोना काल, जिसमें देखने को मिला कि एग्रीकल्चर सेक्टर में शानदार ग्रोथ रही. ऐसे में बहुत सारे लोगों ने इसे बिजनेस के मौके की तरह भी देखा. यूपी के ग्रेटर नोएडा में रहने वाली सुनीता शर्मा को भी इसमें बड़ा मौका दिखा. उन्होंने अपने पति अमिय शर्मा और बेटे आर्यन शर्मा की मदद से एग्रीकल्चर सेक्टर में एक बड़ा बिजनेस खड़ा कर दिया. उन्होंने नवीन मंडी ऐप (Naveen Mandi) की शुरुआत की, जिसने मंडी में होने वाली तमाम ट्रांजेक्शन को आसान भी बनाया और उसे ऑर्गेनाइज भी किया.

कब और कैसे हुई नवीन मंडी की शुरुआत?

नवीन मंडी एक नया एग्रीटेक बिजनेस है, जिसे सुनीता शर्मा में अपने पहले से चल रहे बिजनेस Smith & Arner Facility Services Private Limited के वर्टिकल की तरह शुरू किया है. इस कंपनी की शुरुआत 2014 में हुई थी, जिसके तहत वह डिश टीवी, दिल्ली नेशनल एयरपोर्ट, पैरामाउंट केबल्स जैसे कॉरपोरेट लेवल के ग्राहकों को फैसिलिटी मैनेजमेंट की सेवा देते हैं. कोरोना काल में उन्होंने देखा कि उनका जो टर्नओवर 6 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा था, वह गिरने लगा और 2 करोड़ रुपये तक चला गया. यहीं से उन्होंने तय किया कि एक नया बिजनेस शुरू करना चाहिए, क्योंकि कोरोना काल के बाद भी बहुत सारी कंपनियों ने वर्क फ्रॉम होम के कल्चर को अपना लिया है और कई कर्मचारी घर से ही काम कर रहे हैं.

साल 2020 में सुनीता शर्मा ने अपने पति अमिय शर्मा के साथ मिलकर नए बिजनेस के मौके की तलाश शुरू कर दी. दोनों ने पाया कि उस वक्त फार्मास्युटिकल्स और एग्रीकल्चर सेक्टर में ग्रोथ थी. उन्हें फार्मा में कोई जानकारी नहीं थी, लेकिन एग्रीकल्चर का बैकग्राउंड होने की वजह से वह इसे अच्छे से समझती थीं. काफी रिसर्च के बाद दोनों ने तय किया कि मंडी में अभी जो सारी चीजें अनऑर्गेनाइज हैं, उन्हें व्यवस्थित करते हुए इस प्रक्रिया को आसान बनाना है. इसके बाद शुरुआत हुई नवीन मंडी ऐप की. इसके लिए सुनीता शर्मा और अमिय शर्मा देश भर की तमाम मंडियों में घूमे. करीब 25 हजार किलोमीटर तक गाड़ी चलाई. मंडियों में रातें तक गुजारीं, पल्लेदारों के साथ खाना खाया, वहीं सोए और समझने की कोशिश की कि मंडी में क्या-क्या दिक्कतें हैं. अमिय शर्मा बताते हैं कि इस दौरान एक बार उनकी गाड़ी का एक्सिडेंट भी हो गया था, जिसमें उन्हें थोड़ी चोट भी लगी थी.

मई 2022 के करीब नवीन मंडी बिजनेस में ऑपरेशन शुरू हुए. तब से लेकर अब तक यानी करीब 8 महीनों में इस एग्रीटेक बिजनेस ने लगभग 7 करोड़ का टर्नओवर कर लिया है. इस बिजनेस को यहां तक लाने में सुनीता शर्मा के बेटे आर्यन शर्मा ने भी खूब मदद की, जो अभी आईआईटी मद्रास से पढ़ाई कर रहे हैं. वह इस एग्रीटेक बिजनेस को कई इनक्युबेशन सेंटर में भी प्रजेंट कर चुके हैं. अभी तो इस बिजनेस की फाउंडर सुनीता शर्मा हैं, लेकिन भविष्य में अमिय शर्मा और बेटे आर्यन शर्मा भी इस बिजनेस में को-फाउंडर या डायरेक्टर या फिर किसी दूसरी भूमिका में शामिल हो सकते हैं.

क्यों पड़ी नवीन मंडी ऐप की जरूरत?

अगर परंपरागत तरीके की बात करें तो उसके तहत एक आढ़ती किसान से उसकी फसल खरीदता है और जब वह किसी व्यापारी को बेच देता है उसके बाद पैसे किसान को मिलते हैं. यानी कुछ दिन तक पैसे फंस जाते हैं. नवीन मंडी ने इस समस्या को हल कर दिया है. इसके तहत अगर कोई किसान नवीन मंडी ऐप पर है तो वह सीधे अपनी फसल की जानकारी वहां डाल सकता है और उसे वहीं पर कोई खरीदार मिल जाएगा. यह खरीदार बिचौलिया या लोडर हो सकता है. सबसे बड़ा फायदा किसानों को ये होता है कि उनकी फसल बिकते ही उन्हें पैसे खाते में मिल जाते हैं. यहां तक कि किसान चाहे तो पैसे खाते में आने के बाद फसल उठाने को भी कह सकता है. यानी किसान को अब मंडी जाकर वहां बोली लगवाकर सामान बेचने की जरूरत नहीं है, समय और पैसे दोनों की बचत करते हुए बेहतर डील दिलवाने का काम नवीन मंडी कर रहा है.

नवीन मंडी ऐप की मदद से खरीदार और सप्लायर एक जगह मिलते हैं और एक दूसरे की जरूरत को समझते हैं. अच्छी बात ये है कि अगर बार-बार इस ऐप की मदद करते हुए कोई खरीदार ट्रांजेक्शन करता है तो उसका एक बैंकिंग रेकॉर्ड बनता जाता है, जो बाद में क्रेडिट लिमिट दिलवाने में मदद करता है. बता दें कि अभी मंडी में बहुत सारा काम कैश में होता है. ऐसे में कैश में ट्रांजेक्शन करने वाले व्यापारियों का बैंकिंग रेकॉर्ड नहीं बन पाता है. अगर व्यापारी का अच्छा बैंकिंग रेकॉर्ड बन जाता है तो नवीन मंडी उसे क्रेडिट लिमिट दे देता है. इससे व्यापारी के पास पैसे ना हों तो भी वह ट्रांजेक्शन कर सकता है, क्योंकि उसके पास क्रेडिट लिमिट होती है. जितना ज्यादा क्रेडिट लिमिट इस्तेमाल होती है, इसे नवीन मंडी की तरफ से उतना ही बढ़ाया भी जाता रहता है.

हर किसी की होती है केवाईसी

नवीन मंडी का मॉडल ऐसा है कि इस पर सभी सीरियस लोग ही आते हैं. भले ही कोई खरीदार हो या सप्लायर हो, दोनों को ही केवाईसी से गुजरना होता है. इसके तहत नवीन मंडी की टीम पूरी जांच करती है, जिससे यह भी पता चलता है कि खरीदार या विक्रेता की कैसी स्थिति है और वह वित्तीय रूप से कितना मजबूत है. केवाईसी बहुत जरूरी है ताकि ऐसा ना हो कि एक पार्टी पैसे लेकर माल ना दे या देरी से दे. वहीं ये भी मुमकिन है कि कोई पार्टी माल लेने के बाद भुगतान ना करे या देरी से भुगतान करे. ऐसे में नवीन मंडी एक बैंक की तरह काम करता है और दोनों पार्टियों के हितों की रक्षा करता है.

क्या है कंपनी का बिजनेस मॉडल?

अगर कोई नवीन मंडी ऐप को ज्वाइन करता है तो उसे कोई भी पैसा नहीं देना होता है. वहीं अगर वह किसी से कोई सामान खरीदता है या कुछ बेचता है, तो भी उसे कोई पैसा नहीं देना होता है. हालांकि, अगर कोई खरीदार नवीन मंडी की क्रेडिट लिमिट वाली सुविधा का इस्तेमाल करता है तो उसे इस्तेमाल किए जाने वाले पैसों का 2 फीसदी कमीशन नवीन मंडी को देना होता है. मुमकिन है कि भविष्य में खरीदार और सप्लायर को मिलाने के लिए भी नवीन मंडी पैसे लेना शुरू करे, लेकिन अभी यह बिल्कुल मुफ्त है. अमिय शर्मा कहते हैं कि वह उस कंपनी के टर्नओवर को 3 साल में 1000 करोड़ रुपये तक ले जाना चाहते हैं.

2 करोड़ किए निवेश, और लेंगे फंडिंग

अभी तक नवीन मंडी ने करीब 60 लाख रुपये की फंडिंग ली हुई है. यह फंडिंग एचडीएफसी, एक्सिस बैंक, इंडसइंड बैंक जैसे कई बैंकों ने दी है. कई एनबीएफसी ने भी इसमें पैसे लगाए हैं. इस बिजनेस में जितना ज्यादा वर्किंग कैपिटल होगा, मार्केट को कैप्चर करना उतना ही ज्यादा आसान होगा. वहीं शर्मा परिवार ने अपना खुद का करीब 1.4 करोड़ रुपये का निवेश इस बिजनेस में किया है. यानी अब तक इस बिजनेस में कुल 2 करोड़ रुपये लगाए जा चुके हैं.

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