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आत्महत्या करने वालों में एक चौथाई से अधिक दिहाड़ी मजदूर, NCRB की रिपोर्ट में आया सामने

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पेशे या करियर से संबंधित समस्याएं, अलगाव की भावना, दुर्व्यवहार, हिंसा, पारिवारिक समस्याएं, मानसिक विकार, शराब की लत और वित्तीय नुकसान देश में आत्महत्या की घटनाओं के मुख्य कारण हैं.

आत्महत्या करने वालों में एक चौथाई से अधिक दिहाड़ी मजदूर, NCRB की रिपोर्ट में आया सामने

Tuesday August 30, 2022 , 3 min Read

पिछले साल 2021 में पूरे भारत में आत्महत्या के 1,64,033 मामले दर्ज किए गए. महाराष्ट्र में आत्महत्या की सर्वाधिक घटनाएं हुईं. तमिलनाडु और मध्य प्रदेश आत्महत्या के मामलों में दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे.

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, पेशे या करियर से संबंधित समस्याएं, अलगाव की भावना, दुर्व्यवहार, हिंसा, पारिवारिक समस्याएं, मानसिक विकार, शराब की लत और वित्तीय नुकसान देश में आत्महत्या की घटनाओं के मुख्य कारण हैं.

हालांकि, साल 2014 के बाद पहली बार आत्महत्या करने वाले दिहाड़ी मजदूरों (डेली वेजर्स) की संख्या देश में कुल होने वाली आत्महत्या के एक चौथाई को पार कर गई है. रिपोर्ट के अनुसार, 2021 के दौरान दर्ज किए गए 1,64,033 आत्महत्या पीड़ितों में से चार में से एक दिहाड़ी मजदूर था.

एनसीआरबी की एक्सीडेंटल डेथ्स एंड सुसाइड्स इन इंडिया रिपोर्ट से पता चलता है कि 2021 में  42,004 दिहाड़ी मजदूरों ने (25.6 प्रतिशत) ने आत्महत्या की. कोविड-19 महामारी की शुरुआत से ठीक पहले साल 2019 में देशभर में दर्ज की गई 1,39,123 आत्महत्याओं में से 23.4 प्रतिशत (32,563) संख्या दिहाड़ी मजदूरों की थी.

वहीं, अगर राज्यों की बात करें तो एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल देश में महाराष्ट्र में आत्महत्या के सर्वाधिक 22,207 मामले दर्ज किए गए. इसके बाद, तमिलनाडु में 18,925, मध्य प्रदेश में 14,965, पश्चिम बंगाल में 13,500 और कर्नाटक में 13,056 मामले दर्ज किए गए जो आत्महत्या के कुल मामलों का क्रमश: 13.5 प्रतिशत, 11.5 प्रतिशत, 9.1 प्रतिशत, 8.2 प्रतिशत और आठ प्रतिशत है.

देश में दर्ज किए गए आत्महत्या के कुल मामलों में से इन पांच राज्यों में 50.4 प्रतिशत मामले दर्ज किए गए. शेष 49.6 प्रतिशत मामले 23 अन्य राज्यों और आठ केंद्रशासित प्रदेशों में सामने आए.

सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में तुलनात्मक रूप से आत्महत्या के कम मामले सामने आए जो देश में दर्ज इस तरह की घटनाओं का केवल 3.6 प्रतिशत हैं.

वहीं, केंद्रशासित प्रदेशों में सर्वाधिक आबादी वाली दिल्ली में 2021 में आत्महत्या के सर्वाधिक 2,840 मामले दर्ज किए गए. इसके बाद पुडुचेरी में 504 मामले दर्ज किए गए. पिछले साल देश के 53 बड़े शहरों में आत्महत्या के कुल 25,891 मामले दर्ज किए गए थे.

देश में 2021 में प्रति एक लाख की आबादी पर आत्महत्या के मामलों की राष्ट्रीय दर 12 रही. अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में आत्महत्या की उच्चतम दर (39.7) दर्ज की गई. इसके बाद सिक्किम (39.2), पुडुचेरी (31.8), तेलंगाना (26.9) और केरल में यह दर 26.9 दर्ज की गई.


Edited by Vishal Jaiswal