टेक्नीशियन युवकों ने ईजाद किए खेती करने वाले सस्ते ड्रोन, रोबोट और ब्लोवर

टेक्नीशियन युवकों ने ईजाद किए खेती करने वाले सस्ते ड्रोन, रोबोट और ब्लोवर

Friday October 25, 2019,

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"देश के युवा खेती की दिशा-दशा बदल रहे हैं। उत्तराखंड के पॉलीटेक्निक छात्रों ने खेती में काम आने वाला एंड्रॉयड कंट्रोल रोबोट बनाया है, रुद्रपुर के कपल ने फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव करने वाला ड्रोन ईजाद किया है तो पुणे के युवकों ने छोटे किसानों के लिए ट्रैक्टर और गरुड़ा ब्लोवर यंत्र का आविष्कार किया है।"  

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टेक्नीशियन युवकों और छात्रों के नए-नए स्टार्टअप्स एग्रीकल्चर सेक्टर में क्रांति ला रहे हैं। राजकीय पॉलीटेक्निक कालाढूंगी (उत्तराखंड) के इलेक्ट्रॉनिक विभाग के छात्रों ने एक ऐसा एंड्रोयड कंट्रोल रोबोट बनाया है, जिसमें दो कंपोनेंट, मोटर ड्राइवर, ब्लू टूथ, वाईफाई, नौ बोल्ट की बैट्री, विड बोर्ड, जंपर वायर के साथ डीसी मोटर की सेटिंग्स हैं। इस रोबोट को छात्रा जया, नेहा, छात्र अमित कुमार जोशी और मोहित मनराल ने मिलकर करीब एक सप्ताह में तैयार कर दिया। इसकी करीब साढ़े तीन हजार रुपए कीमत रखी गई है।


आविष्कारक छात्रों ने बताया कि यह रोबोट खासकर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़े काम का है। यह आतंकवादियों के खुफिया अड्डो को पूरी चौकसी से ध्वस्त कर सकता है। इसमें पानी की टंकी, पाइप, अतिरिक्त बैट्री सेट कर दी जाए तो यह फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव भी कर सकता है। सबसे खास बात तो ये है कि इस रोबोट को मोबाइल के ब्लू टूथ से भी कंट्रोल किया जा सकता है। 


इसी तरह रुद्रपुर (उत्तराखंड) के अनुज अरोड़ा और उनकी पत्नी रुचि अरोड़ा ने गाजियाबाद की फार्मटन एग्रो सर्विसेस कंपनी के लिए एक ऐसा ड्रोन ईजाद किया है, जिससे फसलों पर कीटनाशकों का छिड़काव किया जा सकता है। इसकी कीमत 4.8 लाख रुपये रखी गई है। इसमें प्रोग्राम अपलोड करने के साथ ही मोबाइल से कनेक्टिविटी की भी सुविधा है। यह ड्रोन 15 किलो ग्राम तक का वजन नौ किलो मीटर ढो सकता है।


अनुज और रुचि इससे पहले 2004 में पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में एमएससी एजी करने के बाद 2018 तक हल्दीराम कंपनी में नौकरी करते रहे। उन्हे वहां अपना हुनर दिखाने का कोई चांस नहीं था, इसलिए दोनो ने इसी साल 2019 में फार्मटन एग्रो सर्विसेस कंपनी को जॉइन कर लिया। कंपनी ने उनके तकनीकी अनुभवों को देखते हुए अवसर दिया तो कपल ने यह कमाल का ड्रोन बनाकर छह माह में ही अपनी योग्यता को साबित कर दिया। अनुज ने बताया कि रिलायंस फाउंडेशन के साथ मिलकर राजस्थान और छिंदवाड़ा (म.प्र.) में इस तरह के ड्रोन तैयार करने पर काम चल रहा है। यह ड्रोन पांच लीटर कीटनाशक का एक एकड़ की फसल पर छिड़काव कर देता है।





पुणे (महाराष्ट्र) की इंडस्ट्रियल फर्म 'टैक' कंपनी के श्रीलेश पांडे और सौरभ जाधव ने डेढ़ वर्ष में सीमांत किसानों के लिए एक ऐसा बहुउद्देश्यीय ट्रैक्टर तैयार किया है, जिसमें जुताई और मिट्टी को बारीक करने के लिए रोटर, 200 लीटर पानी का टैंक, पावर स्टेयरिंग, ट्रॉली को एक साथ कनेक्ट किया गया है। एक लीटर डीजल से यह ट्रैक्टर लगातार एक घंटे तक दौड़ता है। श्रीलेश पांडे किसान परिवार से हैं। चार एकड़ भूमि पर पिता राजेंद्र मांडे खेती करते हैं। करीब साढ़े 12 लाख की कीमत का पहला ट्रैक्टर तैयार किया है, जिसमें 10 लाख रुपये केंद्र सरकार से मिले थे और उन्होंने 2.5 लाख रुपए अपने लगाए।


पुणे के ही सागर ने चार दोस्तों के साथ मिलकर मार्केट यार्ड एग्री सॉल्यूशन कंपनी में गरुड़ा ब्लोवर यंत्र का आविष्कार किया, जिसमें 200 लीटर पानी का टैंक और चार ओसीलेटिव नॉजिल पार्ट लगे हैं, जो फूलों और फलों के पेड़ों की पत्तियों के आगे पीछे तक छिड़काव करते हैं। यह मशीन छोटे किसानों और पहाड़ी क्षेत्रों के कृषकों के बड़े काम की है। इसे ट्रैक्टर के पीछे जोड़कर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। कंपनी इसे 70 हजार रुपये में बेच रही है। इससे कीटनाशक दवाइयों की बचत होती है।