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बोर्ड एग्जाम में टॉपर बनकर सफलता की इबारत लिखने वाले दो गुदड़ी के लाल

मध्य प्रदेश और हरियाणा में दो ऐसे बच्चों ने बोर्ड परीक्षा में टॉप किया है, जिनमें एक पिता राजमिस्री तो दूसरे के चौकीदार हैं। ये दोनो टॉपर हैं हाईस्कूल में सागर (म.प्र.) के आयुष्मान ताम्रकार और भिवानी (हरियाणा) के दीपक सिंह।

जय प्रकाश जय
16th May 2019
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हरियाणा माध्यमिक विद्यालय शिक्षा बोर्ड की सीनियर सेकेंडरी परीक्षा में उतीर्ण हुए 74.48 फीसदी छात्रों में इस बार बवानीखेड़ा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय के 12वीं विज्ञान संकाय के दीपक सिंह ने 500 में से 497 अंकों के साथ पूरे राज्य में टॉप किया है। दीपक को अंग्रेजी में 99, फिजिक्स में 100, केमेस्ट्री में 100, संस्कृत में 100 और गणित में 98 अंक मिले हैं। बोर्ड परीक्षा में 82 प्रतिशत लड़कियां और 68 प्रतिशत लड़के पास हुए हैं।


परीक्षा परिणाम में लड़कियों की पास का प्रतिशत लड़कों के मुकाबले 14.47 प्रतिशत अधिक है और सीनियर सेकेंडरी स्वयंपाठी का परीक्षा परिणाम 57.61 प्रतिशत रहा। रिजल्ट आते ही गुदड़ी के लाल दीपक के परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। राय सिंह और गुड्डी की आंखों में तो खुशी के आंसू छलक पड़े। पूरे स्टेट में अव्वल आने पर दीपक के टीचर भी गदगद हैं। उनको बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ हैं। दीपक के पूरे स्टेट में टॉप करने की सूचना मिलते ही बधाई देने के लिए खंड शिक्षा अधिकारी संतोष नागर गणमान्य लोगों के साथ सीधे उनके घर पहुंच गए।


भिवानी जिला के गांव पुर निवासी दीपक बेहद गरीब परिवार से हैं। उनके पिता राय सिंह राजमिस्त्री और मां गुड्डी गृहिणी हैं। दोनों ही अशिक्षित हैं। उनकी पांच बहनें हैं, जिनमें से चार बड़ी और एक छोटी है। दीपक का कहना है कि उन्होंने सेल्फ स्टडी पर ज्यादा ध्यान देने के साथ ही सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी। यहां तक कि वह अपने पास मोबाइल भी नहीं रखते हैं। पांच बहनों के इकलौते भाई दीपक के माता-पिता गरीबी के कारण अपनी सभी छह संतानों को शुरू से ही सरकारी स्कूलों में पढ़ाते रहे हैं।


दीपक की बहन सविता बताती हैं कि उनके पिता ने उनके साथ कभी भी बेटा-बेटा का फर्क नहीं किया है। पिता मजदूरी कर पूरे परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। परिवार बड़ा होने के कारण (राजमिस्त्री यानी घरों की दीवार बनाने के पेशे से) मामूली कमाई में बड़ी मुश्किल से गुजारा हो पाता है। यही वजह रही है कि आज तक उन्होंने चमक-दमक वाले प्राइवेट स्कूल-कॉलेज का मुंह नहीं देखा है।


दीपक की सभी बहनों की इच्छा रही कि वे नहीं तो, कम से कम उनका एक एकलौता भाई ही किसी निजी स्कूल-कॉलेज में पढ़कर आगे कोई अच्छे सी नौकरी करे, ताकि परिवार के दुर्दिन कटें लेकिन घर की बदहाली ने उनकी यह हसरत पूरी नहीं होने दी। मजबूरीवश दीपक को कस्बा बवानीखेड़ा के सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाना पड़ा। दीपक अपनी बेमिसाल कामयाबी का श्रेय अपने माता-पिता के साथ-साथ अपनी बहनों और शिक्षकों को देते हैं। वह आगे चल कर इंजीनियर बनना चाहते हैं। इसीलिए वह अभी से इंजीनियरिंग के इंट्रेंस टेस्ट की तैयारियों में जुटे हुए हैं। दीपक ने बताया कि वह रोजाना कम से कम दस घंटे पढ़ाई करते हैं, जिसमें उनकी बड़ी बहनें भी मदद करती हैं। अपनी बोर्ड परीक्षा की तैयारी के दिनो में थोड़ा-बहुत ट्यूशन का भी सहारा लेना पड़ा।


दीपक की तरह ही सागर (म.प्र.) के मोहननगर वार्ड की तंग गली में एक मामूली से मकान में रहने वाले शासकीय बहुउद्देशीय उत्कृष्ट विद्यालय के छात्र आयुष्मान ताम्रकार ने तमाम घरेलू अभावों के बीच हाईस्कूल बोर्ड एग्जाम में गगन त्रिपाठी के साथ संयुक्त रूप से टॉप किया है। आयुष्मान को 500 में से 499 अंक मिले हैं। आयुष्मान के पिता विमल ताम्रकार एक मैरेज होम की चौकीदारी करते हैं। उनको चौकीदारी से जो पैसा मिलता है, उसी से परिवार का पालन पोषण होता है। आयष्मान भी एक दुकान पर नौकरी के कुछ घंटे बिताकर अपनी पढ़ाई का खर्च निकालते रहे हैं।


आयुष्मान की मां बरखा मजदूरी करके परिवार को थोड़ी मदद करती हैं। आयुष्मान इंजीनियर बनना चाहते हैं। जिस समय माध्यमिक शिक्षा मंडल परीक्षा का नतीजा आया, विमल अपनी ड्यूटी पर थे। बेटे की सफलता का पता चला तो वह खुशी से उछल पड़े। आयुष्मान के परिवार की खुशी उस समय दोगुनी हो गई जब उसकी बहन आयुशी ने भी 10वीं की परीक्षा में 92 प्रतिशत अंक हासिल किए। आयुष्मान की मां को चिंता है कि उसकी आगे की पढ़ाई कैसे होगी।


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