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अपने जुगाड़ू एयर प्यूरिफायर्स के जरिए वायु प्रदूषण से लड़ रहा यह सामाजिक उद्यम

अपने जुगाड़ू एयर प्यूरिफायर्स के जरिए वायु प्रदूषण से लड़ रहा यह सामाजिक उद्यम

Monday December 23, 2019 , 10 min Read

जलवायु परिवर्तन के साथ प्रदूषण का स्तर भी दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। इस साल दिल्ली की एयर क्वॉलिटी 500 AQI के साथ 'गंभीर' स्तर पर पहुंच गई थी। राष्ट्रीय राजधानी में लोग एयर प्यूरिफायर खरीदने के लिए दुकानों के बाहर लाइन लगाकर खड़े थे।


हालांकि, किफायती इनोवेशन वाला सामाजिक उद्यम 'स्मार्ट एयर इंडिया' डू-इट-योरसेल्फ (DIY) किट के साथ एयर प्यूरिफायर सेगमेंट में अपनी एक अलग पहचान बना रहा है। इसकी कीमत महज 3,500 रुपये है, जो इंडियन मार्केट में उपलब्ध ब्रांडेड एयर प्यूरीफायर के मुकाबले तकरीबन आधा है।


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थॉमस टेलहेम

इस ऑर्गनाइजेशन को 2013 में चाइनीज मार्केट के लिए स्कॉलर थॉमस टेलहेम ने बनाया था। अब इस प्यूरिफायर सॉल्यूशन ने सरहदें लांघकर थाईलैंड, पाकिस्तान और इंडोनेशिया में शिपमेंट के साथ भारत, मंगोलिया और फिलीपींस तक अपनी पहुंच बना ली है। साल 2015 में इसे दिल्ली में लॉन्च किया गया।


आज थॉमस स्मार्ट एयर को एयर पॉल्यूशन के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए एक मिशन के तौर पर चला रहे हैं। इसमें वह एयर प्यूरिफायर के पीछे का साइंस और लोगों को किफायती कीमत में साफ हवा में सांस लेने का तरीका बताते हैं।


थॉमस कहते हैं,

‘‘अगर आप डेटा देखें तो आपको पता चलेगा कि अधिकांश लोग एयर प्यूरिफायर और मास्क पर पैसे खर्च करना पसंद नहीं करते हैं।’’


ऐसे हुई थी स्मार्ट एयर इंडिया की शुरुआत?


थॉमस जनवरी 2013 में एक पीएचडी छात्र के तौर पर बीजिंग में अपनी रिसर्च कर रहे थे। यही वक्त था, जब चीन की राजधानी में एयर पॉल्यूशन अपने पीक पर पहुंच गया था। प्रदूषण का स्तर इतना ज्यादा था कि उसे इंडेक्स भी नहीं बता पा रहा था। थॉमस को लगा कि उन्हें इस बारे में कुछ करना चाहिए। वह जब एयर प्यूरिफायर खरीदने तो दाम सुनकर उन्हें झटका लगा।


बीजिंग में सबसे मशहूर एयर प्यूरिफायर मशीन की कीमत 1,000 डॉलर थी। उनके जैसे छात्र के लिए एयर प्यूरिफायर पर इतनी रकम खर्च करना एक तरह से नामुमकिन था। लेकिन थॉमस हार मानने को तैयार नहीं थे। उन्होंने सोचा कि इन जादू के बक्सों में ऐसा क्या है, उन्हें इतना महंगा बना दिया है?


थॉमस को जल्द ही पता लग गया कि अधिकांश एयर प्यूरीफायर में 'एक्टिव इन्ग्रीडिएंट' HEPA फिल्टर था। उन्होंने एक सिंपल मेकेनिज्म का पता लगाया। यह एक फैन था, जो HEPA फिल्टर के माध्यम से हवा निकालता था।


वह कहते हैं,

‘‘इंसान को सांस लेते वक्त हवा से खतरनाक कणों को छानने की जरूरत होती है।’’


इसके बाद उन्होंने सोचा कि अगर यह सब इतना आसान है तो वे अपने दम पर प्यूरिफायर क्यों नहीं बना सकते? उन्होंने एक HEPA फिल्टर खरीदा और उसे अपने घर पर एक पंखे से जोड़ दिया। इसका नतीजा हैरान करने वाला था। एक एयर प्यूरिफायर सिर्फ 30 डॉलर में तैयार हो गया था।


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एयर प्यूरिफायर का पहला प्रोटोटाइप

हालांकि, थॉमस के जिज्ञासु स्वभाव ने उन्हें यहीं नहीं रुकने दिया। वह चाहते थे कि उनका बनाया एयर प्यूरिफायर छोटे से छोटे PM 2.5 पार्टिकल्स को भी पकड़े, जो हमारे फेफड़ों में अंदर तक जा सकते हैं। इसलिए उन्होंने एक टेस्टिंग इक्विपमेंट- लेजर पार्टिकल काउंटर खरीदने के लिए मूल लागत का लगभग 10 गुना खर्च किया।





इसके बाद थॉमस ने अपने बेडरूम में DIY प्यूरीफायर लगाया ताकि यह अलग-अलग टेस्ट में पार्टिकुलेट लेवल को ट्रैक कर सके। उसके बाद सारी चीजें क्लियर हो गईं। इसे उन्होंने ऑनलाइन पब्लिश किया कि कैसे बाकी लोग अपना एयर प्यूरीफायर खुद बना सकते हैं। उन्होंने लोगों को यह भी बताया कि अपना एयर प्यूरीफायर बनाते वक्त क्या-क्या सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ अखबार और पत्रिकाओं ने थॉमस की 'खोज' के बारे में लिखा और यह बात पूरे बीजिंग में फैल गई।


जल्द ही, बीजिंग एनर्जी नेटवर्क ने सुझाव दिया कि थॉमस DIY वर्कशॉप चलाकर लोगों को यह बताएं कि वे कैसे अपना एयर प्यूरिफायर बना सकते हैं। थॉमस से लोगों ने ईमेल से सवाल पूछना शुरू कर दिया। अपने आइडिया की बढ़ती मांग देखकर थॉमस ने अपने दोस्तों- गूस टेट और अन्ना गुओ के साथ मिलकर 2013 में स्मार्ट एयर लॉन्च किया।


भारत में स्मार्ट एयर


बीजिंग में स्मार्ट एयर बनने के तुरंत बाद थॉमस को भारत से भी ईमेल मिलने शुरू हो गए थे। भारत के शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में शीर्ष पर हैं। यहां लोगों को बढ़ते एयर पॉल्यूशन की चिंता तो थी, लेकिन हर कोई किफायती समाधान चाहता था।


थॉमस ने कहा,

‘‘ईमेल में कहा गया है कि DIY प्यूरिफायर सही मायने में जुगाड़ वाले मिजाज के अनुकूल है।’’


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धरियश राठौड़, स्मार्ट एयर के इंडिया हेड

इसलिए उन्होंने 2015 में दिल्ली में स्मार्ट एयर लॉन्च किया।


इस सॉल्यूशन के भारत में लॉन्च होने के वक्त से ही कंपनी अपने मिशन को सफल बनाने के लिए एयर पॉल्यूशन वर्कशॉप चला रही है। यह एयर पॉल्यूशन पर ओपन-सोर्स डेटा और रिसर्च भी मुहैया करा रही है।


स्मार्ट एयर के इंडिया हेड, धरियश राठौड़ का कहना है कि भारत में, वे स्कूल, दूतावास, कारोबार और कई अन्य लोगों के लिए वर्कशॉप चलाते हैं।


वह बताते हैं,

‘‘हमारी वर्कशॉप में हिस्सा लेने वाले दो सिंपल मैटेरियल्स- एक पंखा और एक फिल्टर ले जा सकते हैं और उन्हें कुछ ही मिनटों में PM 2.5 से लड़ने वाली मशीनों में तब्दील कर सकते हैं।’’


धरियश का कहना है कि कंपनी भारत में एयर पॉल्यूशन को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करने की कोशिश कर रही है। यह लोगों को सिखाती है कि साफ हवा हर किसी के लिए उपलब्ध है।


वह बताते हैं,

‘‘इन वर्कशॉप्स में हम बताते हैं कि एयर प्यूरीफायर कैसे काम करते हैं, लोग वायु प्रदूषण से कैसे खुद को बचा सकते हैं। इसके साथ ही उन्हें यह भी दिखाते हैं कि वे कैसे अपना खुद का DIY एयर प्यूरीफायर बना सकते हैं। भारत में हमने स्कूल, यूनिवर्सिटीज, कंपनियों और कम्युनिटीज में अंग्रेजी और हिंदी दोनों में कई कार्यशालाएं आयोजित की हैं। हम इन कार्यशालाओं को मुफ्त में चलाते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग वायु प्रदूषण के बारे में जान सकें।’’


स्वच्छ हवा का कारोबार


स्मार्ट एयर को एक और चीज अलग बनाती है। यह कंपनी एक रजिस्टर्ड सोशल एंटरप्राइज है, जिसका मकसद साफ हवा की लागत कम करके उसे लोगों को लिए सुलभ बनाना है। इस ऑर्गनाइजेशन के अंदर अपने स्मार्ट बिजनेस मॉडल के दम पर ऐसा करने की काबिलियत है। स्मार्ट एयर बिचौलियों को हटाकर अधिकांश प्यूरिफायर अपने दम पर बेचता है।


राठौड़ कहते हैं,

‘‘हम एयर प्यूरीफायर में गैरजरूरी चीजें जोड़ने से परहेज करते हैं। इनमें चमकती लाइट, परेशान करने वाले ऐप्स और बगैर प्रभाव वाले आयनर्स जैसी चीजें हैं।’’


चूंकि स्मार्ट एयर सामाजिक उद्यम है, इसलिए मुनाफा कमाना इसका पहला मकसद नहीं है। वह कहते हैं, 'हम जानबूझकर अपने प्रोडक्ट्स का दाम जहां तक हो सके, कम रखते हैं। हम प्रॉफिट मार्जिन इंडस्ट्री के तय मानकों से भी काफी कम है। हम इस मुनाफे को भी ओपन-सोर्स टेस्टिंग, वर्कशॉप, और नई मशीनों को डिजाइन करने में फिर से निवेश कर देते हैं। हमारे ऑर्गनाइजेशन का शत प्रतिशत मुनाफा हवा को साफ बनाने में खर्च होता है।'


राठौड़ के मुताबिक, उनका बिजनेस मॉडल मॉडल पॉजिटिव फीडबैक लूप पर आधारित है।


उनका कहना है कि

‘‘हम जितने प्यूरिफायर बेचते हैं, हमें उतनी ही ज्यादा कमाई होती है। हमें जितनी ज्यादा कमाई होती है, हम लोगों को साफ हवा मुहैया कराने के लिए उसे फिर से निवेश कर देते हैं। इसका मतलब है कि आपके द्वारा खरीदा गया हर स्मार्ट एयर प्यूरीफायर, और भी अधिक लोगों को वायु प्रदूषण से बचाने में मदद करता है।’’


स्मार्ट एयर का सबसे सिंपल प्यूरीफायर 'DIY 1.1’ है, जिसकी कीमत 3,500 रुपये है। इसका इस्तेमाल सामान्य आकार के बेडरूम में किया जा सकता है। इसने हाल ही में अपना नया एयर प्यूरीफायर- 'द स्केयर' लॉन्च किया है। राठौड़ का दावा है कि यह दुनिया का सबसे कॉस्ट इफेक्टिव एयर प्यूरीफायर है।


उनका कहना है,

‘‘द स्केयर दो साल के डिजाइन वर्क और हजारों घंटे की टेस्टिंग का नतीजा है। यह काफी तेज और मजबूत है। इसके बावजूद ज्यादा आवाज नहीं करता है। यह बड़े बेडरूम और लिविंग रूम की हवा साफ रखने में सक्षम है।’’


कंपनी बच्चों और नौजवानों के लिए पॉल्यूशन मास्क भी बनाती है। इसके पास दफ्तर और स्कूल जैसी बड़े जगहों के लिए लद्दाख एयर प्यूरीफायर है।


राठौड़ कहते हैं,

‘‘हमारे इन-हाउस एयरोनॉटिकल इंजीनियर ने इसे करीब 1400 वर्गफुट तक की जगह को साफ करने के हिसाब से डिजाइन किया है।’’


भारत में कामकाज शुरू करने के बाद से स्मार्ट एयर ने 8,000 से अधिक DIY एयर प्यूरिफायर बेचे हैं।


राठौड़ बताते हैं,

‘‘फिलहाल स्केयर हमारा सबसे मशहूर एयर प्यूरीफायर है। इसे हमारे किकस्टार्टर कैंपेन के जरिेए सफलतापूर्वक फंड किया गया था। हमारे लद्दाख एयर प्यूरीफायर जोमैटो, फोर्ड, बीबीसी इंडिया और ईपीओडी के दफ्तरों में साफ हवा दे रहे हैं।’’


सफलता का राज है आत्मनिर्भरता


थॉमस कहते हैं,

‘‘हमने कभी भी बाहरी निवेश स्वीकार नहीं किया है। पहले दिन से हम आत्मनिर्भर रहे हैं। यह चीज हमें मनमुताबिक फैसले लेने की आजादी देती है। हमें वे फैसले नहीं लेने पड़ते हैं, जो अमीर निवेशक चाहते हैं। इसलिए हम आम लोगों तक साफ हवा पहुंचाने की ईमानदारी कोशिश कर पाते हैं।’’


उन्होंने आगे कहा कि कंपनी केवल उन लोगों से बाहरी फंडिंग लेने पर विचार करती है, जो साफतौर पर कहते हैं कि उनका मकसद भारत में लोगों को साफ हवा मुहैया कराना है। थॉमस अब शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस में बिहेवियर साइंस के एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वह दुनिया भर में लोगों को स्वच्छ हवा उपलब्ध कराने के लिए समय देते रहते हैं। स्मार्ट एयर का संचालन कई हेड कर रहे हैं, जो कंपनी के साथ फुल टाइम बेसिस पर जुड़े हैं।


भविष्य की बात


भारत का पॉल्यूशन लेवल काफी खतरनाक बना हुआ है और आने वाले सालों में एयर प्यूरिफायर की मांग में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।


धरियश कहते हैं,

‘‘स्मार्ट एयर अभी भी एक छोटा सामाजिक उद्यम है। अगर मार्केट शेयर की बात की जाए तो हमारे पास भारत के कुल बाजार का मात्र 0.5% हिस्सा है। इसका मतलब है कि अभी केवल मार्केट शेयर के लिहाज से ही नहीं बल्कि अपनी वर्कशॉप्स के जरिए अधिक से अधिक मिडिल और लॉअर मिडिल क्लास के लोगों तक पहुंचने के भी काफी अवसर हैं।’’


स्मार्ट एयर अपने प्रोडक्ट को उन इलाकों तक पहुंचाना चाहता है जहां पर लोग वायु प्रदूषण से होने वाले खतरों से अनजान हैं। इसके लिए वर्कशॉप की संख्या बढ़ाने, चुने हुए शहरों में लोगों को समझाने के लिए वायु प्रदूषण ट्रेनर और लीडर्स तैयार किए जा रहे हैं ताकि वे अपने-अपने समुदायों के लोगों को इस गंभीर समस्या के बारे में जागरूक कर सकें।


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स्मार्ट एयर इंडिया द्वारा एक स्कूल में आयोजित किया गया वर्कशॉप

धरियश कहते हैं,

‘‘अगले दो सालों के लिए हमारा लक्ष्य अपनी प्रोडक्ट लिस्ट में ऐसे अधिक प्रोडक्ट जोड़ना है जो हर वर्ग और श्रेणी के लोगों के काम के हों। हमारा लक्ष्य कंपनी की उपलब्धता को देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में बढ़ाना है। आखिरकार, हम अधिक से अधिक ऑफिस, कैफे, रेस्ट्रॉन्ट और जिम्स में बड़े स्तर पर एयर प्यूरिफिकेशन सिस्टम लगाना चाहते हैं।’’


दिल्ली के गंभीर वायु प्रदूषण पर टिप्पणी करते हुए धरियश कहते हैं कि दिल्ली में सर्दियों की हवा काफी खतरनाक होती है। यहां लोग गर्माहट के लिए कोयले और कचरा जलाकर आग तापते हैं। साथ ही पड़ोसी राज्यों के किसान पराली जलाते हैं। इसका परिणाम है कि दिल्ली एक गैस जैंबर में तब्दील हो चुकी है।


वह कहते हैं,

‘‘वायु प्रदूषण की समस्या केवल दिल्ली ही नहीं बल्कि देश के बाकी शहरों के लिए भी खतरनाक है। देश के बाकी शहरों में भी तेजी से हो रहे शहरीकरण के कारण वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर जा चुका है। इस परेशानी से पार पाने के लिए हम सबको एक साथ मिलकर सामूहिक प्रयास करने होंगे। साथ ही सरकार को इस समस्या से निपटने के लिए कठोर कदम उठाने होंगे ताकि हम सब साफ हवा में सांस ले सकें।’’