पीएम मोदी को ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ की प्रेरणा देने वाले उन्नाव के प्रवासी श्रमिक इस पहल से खुश

By भाषा पीटीआई
June 21, 2020, Updated on : Sun Jun 21 2020 05:31:30 GMT+0000
पीएम मोदी को ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ की प्रेरणा देने वाले उन्नाव के प्रवासी श्रमिक इस पहल से खुश
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विनोद ने बताया कि उन्होंने खुद अपनी तरफ से विद्यालय की रंगाई-पुताई की पेशकश की थी और ग्राम प्रधान ने उनका इस काम में सहयोग किया, हालांकि उन्होंने इस काम के लिए मजदूरी नहीं ली।

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उन्नाव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 50,000 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किए गए ‘गरीब कल्याण रोजगार अभियान’ का श्रेय उत्तर प्रदेश में उन्नाव जिले के नरायणपुर गांव के तीन प्रवासी मजदरों को दिया, जिन्होंने पृथक-वास के दौरान एक सरकारी विद्यालय की रंगाई-पुताई कर उसका कायाकल्प कर दिया।


दरअसल कोरोना वायरस महामारी के दौरान नरायणपुर गांव के एक सरकारी विद्यालय में पृथक-वास केंद्र बनाया गया था, जहां हैदराबाद से आए तीन प्रवासी श्रमिकों को रखा गया, जो रंगाई-पुताई और पुट्टी के काम में माहिर थे। उन्होंने ग्राम प्रधान के सहयोग से पृथक-वास के दौरान विद्यालय की रंगाई-पुताई की और इस काम के लिए कोई मजदूरी नहीं ली।


इस घटना का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा,

‘‘जब मैंने इस काम को जाना, उनकी देशभक्ति ने, उनके कौशल ने, मुझे प्रेरणा दी और उसी से इस योजना (गरीब कल्याण रोजगार अभियान) का जन्म हुआ।’’

इस योजना का मकसद दूसरे राज्यों से लौटकर आए प्रवासी मजदूरों को उनके घर के आसपास ही रोजगार देना है।


विद्यालय की रंगाई-पुताई करने वाले तीन प्रवासी मजदूरों में एक विनोद ने पीटीआई-भाषा को बताया, ‘‘हमारे लिए गौरव की बात है कि प्रधानमंत्री ने हमारे काम का जिक्र किया। हमारे यहां कोई काम धंधा नहीं है, इसलिए दूर जाना पड़ता है।’’


उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें आम की आढ़त में काम मिल गया है, लेकिन ये मौसमी काम है और कुछ दिन ही चलेगा। आगे दिक्कत बनी रहेगी।


उन्होंने कहा,

‘‘प्रधानमंत्री ने आज जिस योजना की शुरुआत की है, उससे अगर हमें यहां बराबर काम मिले, तो इससे बड़ी खुशी की बात और क्या हो सकती है। यहां अगर हमारा घर परिवार चल जाए, तो हम यहां से क्यों जाएंगे।’’

उनके साथ पृथक-वास में रहे अरुण और कमलेश के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया,

‘‘कमलेश काम के लिए चंडीगढ़ चला गया है, जबकि अरुण गांव में ही खेतीबाड़ी का कुछ काम कर रहा है।’’





उन्होंने ने बताया,

‘‘यहां 200-300 मजदूरी मिलती है और बराबर काम भी नहीं मिलता है, जबकि बाहर 500 रुपये मिलते हैं, इसलिए हम वहां चले जाते हैं।’’

विनोद ने बताया कि उन्होंने खुद अपनी तरफ से विद्यालय की रंगाई-पुताई की पेशकश की थी और ग्राम प्रधान ने उनका इस काम में सहयोग किया, हालांकि उन्होंने इस काम के लिए मजदूरी नहीं ली।


मजदूरी न लेने की वजह पूछने पर उन्होंने कहा,

‘‘हम बचपन में इसी विद्यालय में पढ़े हैं। हम ज्यादा तो पढ़े नहीं है, लेकिन हमें अच्छा लगा अपने विद्यालय को सही करके। हमारे तीनों बच्चे भी इसी विद्यालय में पढ़ते हैं।’’

नरायणपुर के ग्राम प्रधान राजू यादव ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा, ‘‘हमारे जिले में हमारी ग्राम पंचायत का नाम होगा, इसकी हमें बहुत खुशी है।’’


उन्होंने कहा,

‘‘इन्हें विद्यालय में रखा गया था। ये तीन लोग थे। जब उन्होंने विद्यालय की रंगाई-पुताई की इच्छा जताई तो हमने पेंट मंगवा कर उनको दे दिया। इस पर लगभग 30,000 रुपये का खर्च आया।’’ उन्होंने बताया कि गांव के कम से कम 100 लोग बाहर रहते हैं।

गरीब कल्याण रोजगार योजना प्रवासी मजदूरों को एक बार रोजगार देने के लिए शुरू की गई है और फिलहाल 116 जिलों में लागू है। इसके तहत शुरुआत में 125 दिन का काम दिया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि बाद में इस योजना का विस्तार किया जा सकता है।