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वीकली रिकैप: पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़!

यहाँ आप इस हफ्ते प्रकाशित हुई कुछ बेहतरीन स्टोरीज़ को संक्षेप में पढ़ सकते हैं।

वीकली रिकैप: पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़!

Sunday August 01, 2021 , 8 min Read

इस हफ्ते हमने कई प्रेरक और रोचक कहानियाँ प्रकाशित की हैं, उनमें से कुछ को हम यहाँ आपके सामने संक्षेप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनके साथ दिये गए लिंक पर क्लिक कर आप उन्हें विस्तार से भी पढ़ सकते हैं।

दुनिया के पहले फैशन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कहानी

ये कहानी है दुनिया के पहले फैशन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Hotnot की। Hotnot का विज़न कंज्यूमर्स, क्रिएटर्स, ब्रांड्स और फैशन इंडस्ट्री के स्टैकहोल्डर्स को एक कॉमन प्लेटफॉर्म पर लाकर और सोशल मीडिया की शक्ति के माध्यम से हर एक के लिए वैल्यू बनाकर फैशन को डेमोक्रेटाइज करना है।

hotnot

आंत्रप्रेन्योर फ्रेडरिक देवरमपति ने। उन्होंने दावा किया है कि उन्होंने दुनिया का पहला फैशन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Hotnot बनाया है, लेकिन Hotnot की शुरूआत कैसे हुई; इसके पीछे बड़ा ही दिलचस्प वाकया है।


दरअसल, फ्रेडरिक किसी रविवार दुबई मॉल में थे और तभी उनकी नज़र वहां लगे एक बिलबोर्ड पर पड़ी, जिस पर लिखा था, "The new trend is here" और ये लाइन उनके मन में घर कर गई। इसके बाद वे सोचने लगे कि ये "Trends" बनाता कौन है? और फिर उन्होंने सोचा कि क्यों फैशन इंडस्ट्री पर सिर्फ बड़े ब्रांड/लेबल ही राज कर रहे हैं; यहीं से "Hotnot" का विचार आया।


फ्रेडरिक YourStory से बात करते हुए कहते हैं, "Hotnot खरीदारों को आपके पसंदीदा क्रिएटर्स की पर्सनल फ़ीड बनाने के लिए एक प्लेटफॉर्म देता है, जो उनके साइज, स्किन टोन, फैशन की समझ और कई अन्य फ़िल्टर शेयर करते हैं। ब्रांड कंज्यूमर बिहेवियर पर रीयल-टाइम इनसाइट्स प्राप्त करते हैं, क्रिएटर्स अपनी स्टाइल दिखा सकते हैं, और कंज्यूमर आसानी से उन सभी लुक को एक प्लेटफॉर्म पर ढूंढ और खरीद सकते हैं।"


hotnot एप्लिकेशन आईओएस और एंड्रॉइड दोनों पर उपलब्ध है। फ्रेडरिक बताते हैं, "अभी हमने ऐप का बीटा वर्ज़न लॉन्च किया है, और हमारे प्लेटफॉर्म पर 1000+ क्रिएटर्स और यूजर्स हैं।"

भाई-बहन ने मिलकर पिता के घाटे में चल रहे कारोबार को बदला मुनाफे में

अग्निम गुप्ता और स्तुति गुप्ता ने ग्वालियर में अपने आयुर्वेदिक हेल्थकेयर बिजनेस को पुनर्जीवित करने में अपने पिता की मदद करने के लिए अपनी कॉर्पोरेट नौकरियां छोड़ दी। आज, Amrutam एक आयुर्वेदिक लाइफस्टाइल ब्रांड के रूप में उभरा है, और इसकी यह यात्रा अविश्वसनीय से कम नहीं है।

अग्निम गुप्ता और स्तुति गुप्ता

अग्निम गुप्ता और स्तुति गुप्ता 

ग्वालियर स्थित एक फार्मा कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर अशोक गुप्ता (58) ने कंज्यूमर्स के लिए गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक प्रोडक्ट लाने के दृष्टिकोण के साथ 2006 में Amrutam लॉन्च किया। दुर्भाग्य से, उनका बिजनेस चल नहीं पाया और उन्हें बड़ा नुकसान होने लगा। लेकिन अशोक ने हार नहीं मानी और 10 साल तक लगातार काम करते रहे।


2016 में, बिजनेस को एक बड़ा वित्तीय झटका लगा और वह बंद होने की कगार पर था। लेकिन नियति की अपनी योजनाएँ थीं, और अशोक के बच्चों अग्निम गुप्ता और स्तुति गुप्ता ने बेंगलुरु में अपनी कॉर्पोरेट नौकरियां छोड़ दी और अपने पिता के बिजनेस को बचाने के लिए कमान अपने हाथों में ली।


जो बिजनेस अगस्त 2017 में एक महीने में एक ऑर्डर मिलने के बाद फिर से शुरू हुआ, वह अब 2.78 करोड़ रुपये के कारोबार के साथ प्रति माह 4,000 ऑर्डर प्राप्त कर रहा है। कंपनी ने वित्त वर्ष 21 में रेवेन्यू में 250 प्रतिशत की बढ़ोतरी का भी दावा किया है।


YourStory के साथ बातचीत में, अग्निम और स्तुति ने अपने पिता की बिजनेस ज़र्नी के बारे में बात की, जिसके कारण उन्होंने अमृतम का निर्माण किया, और आयुर्वेद के बारे में लोगों को शिक्षित करने के उनके विज़न के बारे में बताया।

प्रदूषण को घटाने के लिए इन छात्रों की अनूठी पहल

लगातार बढ़ रहे प्लास्टिक कचरे के निदान के लिए अब कुछ छात्रों ने एक अनूठा तरीका खोज निकाला है।

(चित्र साभार: UBS टीम)

(चित्र साभार: UBS टीम)

लगातार बढ़ रहे प्लास्टिक कचरे के निदान के लिए अब कुछ छात्रों ने एक अनूठा तरीका खोज निकाला है। मुंबई के यूनिवर्सल बिजनेस स्कूल में मैनेजमेंट के 10 छात्रों ने ‘प्रोजेक्ट रूप’ पर काम करते हुए प्लास्टिक बोतलों को हाइड्रोपोनिक खेती के लिए तैयार करने का काम किया है। छात्रों द्वारा तैयार किए गए इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य प्लास्टिक कचरे को कम करने के साथ ही खेती के लिए मिट्टी के उपयोग में भी कमी लाना भी है। मालूम हो कि हाइड्रोपोनिक्स तकनीक के जरिये किसान अपनी फसलों को मिट्टी के बजाय पानी में उगाते हैं, जोकि पोषक तत्वों से भरपूर होता है।


ये सभी छात्र सामाजिक उद्यम ENACTUS के सदय हैं, जिसकी दुनिया भर के शैक्षिक संस्थानों में इकाइयां हैं। छात्रों ने इसके लिए एक प्रोटोटाइप विकसित किया है, जिसे एक लीटर वाली पानी की बोतल को आधा काटते हुए उसमें एक पाइप को फिट किया गया है। ये पाइप ही बोतल में लगातार पोषक तत्वों को पहुंचाने का काम करता है और इसी के साथ इसके जरिये अन्य बोतलों को भी जोड़ा जा सकता है।


अपने इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए छात्रों को फंड की आवश्यकता थी, तो इसके लिए छात्रों ने ‘रिडिजाइन टू रीयूज’ नाम के एक इवेंट का आयोजन किया, जहां सभी प्रतिभागियों से पंजीकरण शुल्क के रूप में 50 रुपये लिए गए और फिर इवेंट के विजेता को नकद पुरस्कार दिये जाने के बाद बची हुई राशि को प्रोजेक्ट के संचालन के लिए अलग कर लिया गया। इस खास ड्राइव का संचालन मुंबई के कुछ सार्वजनिक स्थानों पर भी किया गया और इस तरह छात्रों ने कुछ ही दिनों में लगभग 30 किलो प्लास्टिक बोतलें इकट्ठी कर लीं।

एडटेक स्टार्टअप Toppr की कहानी

एडटेक स्टार्टअप 'टॉपर (Toppr)', किसी भी व्यक्ति के मुताबिक सीखने के अनुभवों और नतीजों पर फोकस करता है।

जीशान हयात और हेमंत गोटेती

जीशान हयात और हेमंत गोटेती, Toppr के फाउंडर्स

12वीं कक्षा तक के बच्चों (K-12) की तैयारियों को ध्यान में रखकर जीशान हयात और हेमंत गोटेती 2013 में एडटेक प्लेटफॉर्म टॉपर की स्थापना की। इस सेक्टर में सफलता की संभावना को सूंघते हुए मुंबई स्थित इस स्टार्टअप ने आखिरकार सीखने के विभिन्न रूपों को एक छत के नीचे साथ लाने का फैसला किया।


जीशान ने YourStory से बात करते हुए बताया, "हमने अपने रोडमैप को परिभाषित करने के लिए K-12 छात्र की सीखने की जरूरतों का 360 डिग्री अप्रोच अपनाया। हमने ओलंपियाड और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्रों पर भी ध्यान केंद्रित किया, और उनकी खास आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए टेक्नोलॉजी विकसित की।”


इसने हजारों विशेषज्ञों के लिए एक नई संभावना खोली, जो अपने खाली समय में कमाई कर सकते थे। साथ ही इसने टीम को केवल तीन महीनों में अभ्यास करने और बेहतर सीखने के लिए कक्षा 11 और 12 के लिए तीन महीनों का एमवीपी लॉन्च करने में भी मदद की।


टॉपर का दावा है कि आज उसके पास 3.5 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स हैं।

महामारी के दौरान बच्चों का जीवन बचाने वाली सोशल आंत्रप्रेन्योर

मुंबई की रहने वाली ब्रांड-स्ट्रेटेजिस्ट, जो बाद में सोशल आंत्रप्रेन्योर बनीं - अकांचा श्रीवास्तव ने उन बच्चों को बचाने के लिए एक हेल्पलाइन शुरू की, जिन्होंने अपने माता-पिता को COVID-19 में खो दिया और अकेले रह गए हैं।

अकांचा श्रीवास्तव

अकांचा श्रीवास्तव

आकांचा अगेंस्ट हैरासमेंट (Akancha Against Harassment) और आकांचा श्रीवास्तव फाउंडेशन (Akancha Srivastava Foundation) की फाउंडर आकांचा श्रीवास्तव, एक चाइल्ड रेस्क्यू हेल्पलाइन भी चलाती हैं। इस हेल्पलाइन की मदद से अब तक 23 से ज्यादा बच्चों को रेस्क्यू कर रिहैबिलिटेट किया जा चुका है।


30 अप्रैल को, आकांचा ने एक आर्टिकल पढ़ा, जिसमें उन बच्चों की दुर्दशा के बारे में बात की गई थी, जिन्होंने अपने माता-पिता को COVID-19 महामारी में खो दिया था। उन्हें पता चला कि बहुतों को अपनी देखभाल करने के लिए छोड़ दिया गया था।


वह कहती हैं, "तो, मैंने अपने पांच साथियों को बच्चों के लिए कुछ करने के लिए अपने साथ मिलाया, इस दौरान, हमने सीखा कि आश्रय गृह बच्चों को पैसे की कमी से गुजरने की स्थिति में दूर कर देते हैं।"


टीम ने बाल-चिकित्सकों (paediatricians) और अन्य चाइल्ड-केयर प्रोफेशनल्स के लिए अपने संसाधनों को शामिल किया जो बच्चों रेस्क्यू करने के काम में मदद कर सकते थे।


आकांचा कहती हैं, “हम ऐसे कई बच्चों से मिले, जिनकी तस्करी, अवैध रूप से गोद लिए जाने और कई अन्य चुनौतियों के लिए अतिसंवेदनशील होने का खतरा था। हमने एक हेल्पलाइन बनाई ताकि लोग उन बच्चों की पहचान करने में मदद कर सकें जो COVID-19 महामारी के दौरान अनाथ हो गए हैं या अकेले छोड़ दिए गए हैं।”


3 मई को, उन्होंने चाइल्ड रेस्क्यू के लिए एक हेल्पलाइन शुरू की, लोगों के बीच ऐसे किसी भी बच्चे की रिपोर्ट करने के लिए एक व्हाट्सएप नंबर की घोषणा की और उन्हें बच्चे के कोर्डिनेट्स शेयर करने के लिए कहा ताकि टीम पास की कानून प्रवर्तन एजेंसियों से संपर्क कर सके।


हेल्पलाइन ने करीना कपूर खान और ऋचा चड्ढा सहित कई हस्तियों का ध्यान आकर्षित किया, जिन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर हेल्पलाइन की डिटेल्स शेयर की। "अगली शाम तक, कॉल्स की भारी आमद के कारण, हेल्पलाइन क्रैश हो गई थी!" अकांचा कहती हैं।