वीकली रिकैप: पढ़ें इस हफ्ते की टॉप स्टोरीज़!

यहाँ आप इस हफ्ते प्रकाशित हुई कुछ बेहतरीन स्टोरीज़ को संक्षेप में पढ़ सकते हैं।

इस हफ्ते हमने कई प्रेरक और रोचक कहानियाँ प्रकाशित की हैं, उनमें से कुछ को हम यहाँ आपके सामने संक्षेप में प्रस्तुत कर रहे हैं, जिनके साथ दिये गए लिंक पर क्लिक कर आप उन्हें विस्तार से भी पढ़ सकते हैं।

फॉरेस्टमैन ऑफ इंडिया

पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित जादव पायेंग आज देश भर में ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाने जाते हैं। आसाम के निवासी जादव ने साल 1979 में भयंकर बाढ़ का मंजर देखा था। इस बाढ़ ने पूरी तरह इलाके में तबाही मचा दी थी। बाढ़ के बाद पूरे इलाके में सिर्फ मिट्टी और कीचड़ ही नज़र आ रहा था।

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पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित जादव पायेंग आज देश भर में ‘फॉरेस्ट मैन ऑफ इंडिया’ के नाम से जाने जाते हैं। (फोटो साभार : TheLogicalIndian)

1963 में जन्मे जादव ने अपने इस नेक काम की शुरुआत 16 साल की उम्र से कर दी थी और इस दौरान वह उस द्वीप को एक नए सिरे से जंगल में तब्दील करना चाहते थे। शुरुआत में तो जादव के प्रयासों का स्थानीय स्तर पर मज़ाक बनाया गया लेकिन जल्द ही गाँववालों ने भी जादव का समर्थन करते हुए उन्हे कुछ बांस के पौधे और बीज उपलब्ध कराने शुरु कर दिये। इसके बाद से जादव ने लगातार नए पौधे लगाए और उनकी देखरेख करने लगे। 


जादव के अथक प्रयास का नतीजा था कि इतने सालों बाद आज उस जमीन पर एक घने जगल का विकास हो चुका है। जोरहाट स्थित जंगल मोलाई फॉरेस्ट का नाम उन्ही के नाम पर पड़ा है। यह करीब 1360 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यहाँ आज रॉयल बंगाल टाइगर और गेंडे तमाम विभिन्न प्रजातियों के पशु और पक्षी पाये जाते हैं।


जाधव के अथक प्रयास को देखते हुए साल 2015 में भारत सरकार ने उन्हे पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया था। जादव को इसी साल फ्रांस में आयोजित हुई ‘ग्लोबल कॉन्फ्रेंस ऑफ सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ की मीटिंग में भी सम्मानित किया गया था। अब जादव की इस कहानी को अमेरिका के छात्रों को पढ़ाया जाएगा। 

20 हजार से शुरू किया बिजनेस, आज है 18 करोड़ का रेवेन्यू

अमरदीप बर्धन और वैभव जयसवाल ने 2012 में दिल्ली में प्रकृती कल्टीवेटिंग ग्रीन (Prakritii Cultivating Green) की शुरुआत की। उन्होंने अपनी तमिलनाडु फैसिलिटी में बायोडिग्रेडेबल प्लेट बनाने के लिए असम से ऐरेका नट की पत्तियों की सोर्सिंग की।

अमरदीप बर्धन और वैभव जयसवाल ने 2012 में दिल्ली में प्रकृती कल्टीवेटिंग ग्रीन की शुरुआत की।

अमरदीप बर्धन और वैभव जयसवाल ने 2012 में दिल्ली में प्रकृती कल्टीवेटिंग ग्रीन की शुरुआत की।

अमरदीप YourStory को बताते हैं, “हमने छोटे पैमाने पर संसाधनों की व्यवस्था की और 20,000 रुपये के साथ प्रकृती शुरू की। तमिलनाडु के कोयम्बटूर में एक विनिर्माण इकाई की स्थापना करते हुए, हमने असम में पायी जाने वाली पत्तियों का उपयोग करके विभिन्न शेप और साइज में ऐरेका नट लीफ प्लेट का प्रोडक्शन शुरू किया।”


शुरू में, दोनों ने अपनी प्लेटें कैटरर्स और इवेंट आयोजकों को बेचीं जो बड़े समारोहों और पार्टियों में उनका इस्तेमाल करते थे। बढ़ती लोकप्रियता को देखने के बाद, उन्होंने इको-फ्रेंडली कटलरी, ग्लास, स्टिरर आदि को शामिल करके अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो का विस्तार किया। संस्थापकों का दावा है कि आज, प्रकृती 18 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार कर रही है, और 120 लोगों के लिए सीधे व 700 लोगों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार पैदा कर रही है। 


ऐरेका के पत्तों से बने प्रकृति की टेबलवेयर रेंज के बारे में बताते हुए वैभव कहते हैं, “हमारी रेंज केमिकल, लाह (lacquers), ग्लू, बॉन्डिंग एजेंट्स या भोजन और हमारे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले कुछ भी टॉक्सिक से 100 प्रतिशत मुक्त है। हम केवल स्टीम, हीट और प्रेसर का उपयोग करके अपने ऐरेका लीफ प्रोडक्ट्स को बनाते हैं।" 

चौकीदार बना IIM रांची में प्रोफेसर

रामचंद्रन के संघर्ष की कहानी सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रही है। शनिवार को रामचंद्रन ने केरल के अपने घर की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'आईआईएम के प्रोफेसर का जन्म इसी घर में हुआ है।'


एक चौकीदार (पहरेदार) से आईआईटी और अब आईआईएम-रांची में सहायक प्रोफेसर बनने तक, 28 वर्षीय रंजीत रामचंद्रन का सफर काफी संघर्ष भरा रहा है। उनकी मेहनत, लगन, हौसले और सफलता की कहानी अपने जीवन में प्रतिकूल परिस्थितियों से लड़ने के लिए कई लोगों को प्रेरित करती है।

रामचंद्रन ने केरल के अपने घर की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की और लिखा कि 'आईआईएम के प्रोफेसर का जन्म इसी घर में हुआ है'

रामचंद्रन ने केरल के अपने घर की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट की और लिखा कि 'आईआईएम के प्रोफेसर का जन्म इसी घर में हुआ है'

रामचंद्रन कासरगोड के पनाथुर में एक बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज में रात को चौकीदार के रूप में काम कर रहे थे, जबकि उन्होंने जिले के सेंट पियस एक्स कॉलेज से अर्थशास्त्र की डिग्री हासिल की।


उन्होंने कहा, "स्कूली शिक्षा के बाद, मैंने अर्थशास्त्र में बीए करने के लिए राजापुरम में सेंट पायस एक्स कॉलेज में प्रवेश लिया। परिवार की आर्थिक मदद करने के लिए मैं पढ़ाई छोड़ने का विचार कर रहा था, लेकिन तभी मैंने पनाथुर में बीएसएनएल टेलीफोन एक्सचेंज में रात के चौकीदार की नौकरी का विज्ञापन देखा। मैंने आवेदन किया है, और 'सौभाग्य से' मुझे काम मिल गया है।"


आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने सफलता का स्वाद चखते हुए पिछले साल अपनी डॉक्टरेट की उपाधि हासिल की। पिछले दो महीनों से, वह क्राइस्ट यूनिवर्सिटी, बेंगलुरु में एक सहायक प्रोफेसर थे।


रामचंद्रन ने अपनी पोस्ट में बताया कि वित्तीय कठिनाइयों के कारण उन्होंने लगभग अपनी स्कूली शिक्षा छोड़ दी थी। उनके पिता एक दर्जी और मां, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत एक दिहाड़ी मजदूर हैं।


केरल के वित्त मंत्री टी एम थॉमस इसाक ने भी रामचंद्रन को बधाई देते हुए कहा कि वह सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

बिन्नी बंसल: किताब बेचने वाला बन गया अरबपति

बिन्नी बंसल ने 2007 में एक सहयोगी के साथ मिलकर फ्लिपकार्ट की स्थापना की और इसे मार्केट की अगुआई करने वाली एक दिग्गज कंपनी बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई। 2018 में वालमार्ट ने इस कंपनी को 16 अरब डॉलर की भारी भरकम राशि में खरीद लिया।

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बिन्नी बंसल ने 2007 में एक सहयोगी के साथ मिलकर फ्लिपकार्ट की स्थापना की थी।

2007 में जब बिन्नी बंसल ने अपने एक सहयोगी के साथ मिलकर फ्लिपकार्ट की स्थापना की थी, तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि 2018 में वॉलमार्ट इसका 16 अरब डॉलर में लिए अधिग्रहण करेगी, जो अपने आप में एक इतिहास होगा।


बिन्नी खुद फ्लिपकार्ट में अपने सफर के दौरान तेज ग्रोथ और उसके साथ उतनी ही चुनौतियों के कई दौर से गुजरे हैं।


जीजीवी कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर, हंस तुंग के साथ बातचीत में, एजेंल इनवेस्टर और मेंटॉर बिन्नी बंसल ने अपने भूतकाल, वर्तमान और भविष्य को लेकर खुलकर बातचीत की।


उन्होंने बताया, “फ्लिपकार्ट के मेरे दिनों के दौरान मुझे एहसास हुआ कि कई दूसरे फाउंडर्स भी इसी तरह की चुनौतियों से गुजर रहे थे। हम अलग-अलग वर्टिकल से आए थे लेकिन हम अभी भी एक ही जैसे मुद्दों का सामना कर रहे थे। उस समय, कई हेल्पलाइन नहीं था। साथ ही मुझे अपनी सीमाओं का भी एहसास हुआ - मैं एक समय पर सिर्फ 10 से 15 फाउंडर्स की ही मदद कर सकता हूं।”

गूगल का टाइमलैप्स फीचर

गूगल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई ने गूगल अर्थ में 'टाइमलैप्स' फीचर पेश करने की घोषणा की है। यह 2017 के बाद सबसे बड़ा अपडेट है। इसके जरिये कोई भी व्यक्ति चार दशक के ग्रहों के बदलाव को देख सकेगा। इसके लिए गूगल ने ने पिछले 37 वर्षों से 2.4 करोड़ उपग्रह चित्रों को संवादात्मक, खोजपूर्ण, 4डी अनुभव में संकलित किया है।

गूगल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई

गूगल के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) सुंदर पिचाई

Google ने एक ब्लॉग पोस्ट में कहा, “2017 से Google अर्थ के सबसे बड़े अपडेट में, अब आप हमारे ग्रह को एक बिल्कुल नए आयाम - समय में देख सकते हैं। Google अर्थ में टाइमलैप्स के साथ, पिछले 37 वर्षों के 24 मिलियन उपग्रह तस्वीरों को संवादात्मक 4D अनुभव में संकलित किया गया है। अब कोई भी ग्रह परिवर्तन के लगभग चार दशक के समय को देख सकता है।"


यूज़र्स going g.co/Timelapse ’पर जाकर Google अर्थ के टाइमलैप्स का पता लगा सकते हैं, जहां वे अपनी पसंद के शहर या अन्य क्षेत्र को देखने के लिए सर्च बार का उपयोग कर सकते हैं। टाइमलैप्स से लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि पृथ्वी कैसे बदल रही है


Google जलवायु परिवर्तन और हमारे कार्बन पदचिह्न जैसे विषयों पर जागरूकता पैदा करने के लिए लोगों को टाइमलैप्स का उपयोग करने और साझा करने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है। एक पाठ्यपुस्तक में शब्दों की तुलना में दृश्य प्रमाण अधिक प्रभावशाली होते हैं, टाइमलैप्स एक ऐसा उपकरण हो सकता है जो "कार्रवाई को शिक्षित और प्रेरित (educate and inspire action)" कर सकता है।