क्या है SCO समिट, जिसमें भाग लेने उज्बेकिस्तान गए हैं पीएम मोदी

By yourstory हिन्दी
September 16, 2022, Updated on : Fri Sep 16 2022 07:08:42 GMT+0000
क्या है SCO समिट, जिसमें भाग लेने उज्बेकिस्तान गए हैं पीएम मोदी
SCO का पिछला प्रत्यक्ष सम्मेलन 2019 में किर्गिस्तान के बिश्केक में हुआ था.
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शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का शिखर सम्मेलन 15 सितंबर को उज्बेकिस्तान के समरकंद में शुरू हो गया. कोविड महामारी के कारण दो साल के अंतराल के बाद इस सम्मेलन में सदस्य राष्ट्रों के प्रमुख प्रत्यक्ष उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं. यह दो दिवसीय सम्मेलन समूह के सभी 8 सदस्य देशों के प्रमुखों को मुख्य बैठक से इतर साझा चिंता के ज्वलंत वैश्विक एवं क्षेत्रीय मुद्दों पर आमने-सामने वार्ता का अवसर देगा. इस शिखर सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा चनौतियों, व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को बढ़ावा देने समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा होने की तैयारी है.


एससीओ का पिछला प्रत्यक्ष सम्मेलन 2019 में किर्गिस्तान के बिश्केक में हुआ था. उसके बाद 2020 में मॉस्को सम्मेलन कोविड-19 महामारी के कारण डिजिटल तरीके से हुआ था. वहीं 2021 का सम्मेलन दुशान्बे में मिश्रित प्रारूप में आयोजित किया गया था.

कब हुई थी शुरुआत

एससीओ की शुरुआत जून 2001 में शंघाई में हुई थी. इसके 6 संस्थापक सदस्य समेत 8 पूर्णकालिक सदस्य हैं. संस्थापक सदस्य देशों में चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान हैं. भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके पूर्णकालिक सदस्यों के रूप में शामिल हुए थे. एससीओ के पर्यवेक्षक देशों में अफगानिस्तान, बेलारूस और मंगोलिया शामिल हैं, वहीं संवाद साझेदारों में कंबोडिया, नेपाल, श्रीलंका, तुर्की, आर्मीनिया एवं आजरबैजान हैं. समरकंद में एससीओ शिखर सम्मेलन दो सत्र में होगा. एक प्रतिबंधित सत्र, जो केवल एससीओ के सदस्य देशों के लिए है और फिर एक विस्तारित सत्र, जिसमें पर्यवेक्षक देश और अध्यक्ष देश की ओर से विशेष रूप से आमंत्रित नेताओं की भागीदारी की संभावना है.

जिनपिंग के शामिल होने की आकस्मिक घोषणा

साल 2020 में कोविड महामारी आने के बाद यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिवसीय सम्मेलन में भाग ले रहे हैं. कोविड की चिंताओं को छोड़ते हुए एससीओ सम्मेलन में जिनपिंग के शामिल होने की आकस्मिक घोषणा हुई. वह बुधवार को दो साल से अधिक समय की अवधि के बाद पहली बार चीन के बाहर गये हैं. वह जनवरी 2020 के बाद से अपनी पहली राजकीय यात्रा पर कजाकिस्तान गये और वहां से समरकंद में एससीओ सम्मेलन में भाग लेने के लिए उज्बेकिस्तान गए.

PM मोदी ने शुक्रवार को लिया हिस्सा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और एससीओ के अन्य सदस्य देशों के नेताओं के साथ इस प्रभावशाली संगठन के वार्षिक शिखर सम्मेलन में शुक्रवार को हिस्सा लिया. मोदी करीब 24 घंटे के दौरे पर गुरुवार की रात पहुंचे. शिखर सम्मेलन के परिसर पर उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शवकत मिर्जियोयेव ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया. गलवान घाटी में जून 2020 में हुई हिंसक झड़प के कारण भारत एवं चीन के बीच सीमा पर गतिरोध की स्थिति पैदा होने के बाद शी और मोदी पहली बार आमने-सामने आएंगे. सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी और मध्य एशियाई देशों के अन्य नेता भाग ले रहे हैं. शिखर सम्मेलन के सीमित प्रारूप के दौरान विचार-विमर्श से पहले समूह के स्थायी सदस्यों के नेताओं ने एक साथ तस्वीर खिंचवाई.

what-is-sco-summit-for-which-pm-narendra-modi-has-gone-to-uzbekistan-shanghai-cooperation-organisation-samarkand

Image: PIB Twitter

कुछ द्विपक्षीय बैठकें भी करने का कार्यक्रम

शिखर सम्मेलन के बाद मोदी की कुछ द्विपक्षीय बैठकें भी करने का कार्यक्रम है. वह पुतिन, मिर्जियोयेव और रईसी से मुलाकात कर सकते हैं. मोदी ने समरकंद रवाना होने से पहले एक बयान जारी कर कहा, ‘मैं एससीओ शिखर सम्मेलन में सामयिक, क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करने, एससीओ के विस्तार और संगठन के भीतर बहुआयामी और परस्पर लाभकारी सहयोग को और गहरा करने को लेकर उत्सुक हूं.’ उन्होंने कहा कि उज्बेकिस्तान की अध्यक्षता में व्यापार, अर्थव्यवस्था, संस्कृति और पर्यटन के क्षेत्रों में आपसी सहयोग के लिए कई फैसले लिए जाने की उम्मीद है.


Edited by Ritika Singh