बच्चों के लिए अपने ईको-फ्रेंडली कपड़ा ब्रांड के माध्यम से स्वतंत्र कारीगरों और बुनकरों को बढ़ावा दे रही हैं ये महिला उद्यमी

By Nirandhi Gowthaman
March 10, 2020, Updated on : Tue Mar 10 2020 10:31:30 GMT+0000
बच्चों के लिए अपने ईको-फ्रेंडली कपड़ा ब्रांड के माध्यम से स्वतंत्र कारीगरों और बुनकरों को बढ़ावा दे रही हैं ये महिला उद्यमी
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बच्चों के लिए कपड़े खरीदना किसी टफ काम से कम नहीं है। कपड़ा इंडस्ट्री (apparel industry) खुदरा विक्रेताओं और निर्माताओं से भरी हुई है, लेकिन आपको केवल बच्चों के लिए डेडीकेटेड कपड़ों के ज्यादा ब्रांड नहीं मिलेंगे, खासकर तब जब बात शिशुओं यानी नन्हें बच्चों की हो।


शिल्पी शर्मा और सत्या नागराजन इस अंतर को देखकर काफी हैरान थीं। दोनों माताओं को अपने बच्चों के लिए स्थानीय स्तर पर निर्मित, क्वालिटी वाले कपड़े नहीं मिल पाते थे।


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शिल्पी शर्मा और सत्या नागराजन, कॉ-फाउंडर्स, इंडी प्रोजेक्ट स्टोर



शिल्पी को अपने एक साल के बेटे के लिए प्राकृतिक कपड़ों (नेचुरल फैब्रिक) से बने हल्के कपड़े ढूंढने में मुश्किल हुई। जो उन्हें मिले वे या तो बहुत महंगे थे या फिर इम्पोर्टेड थे। दोनों ने बच्चों के लिए स्थानीय स्तर पर उत्पादित कपड़े बेचने वाले एक सामाजिक रूप से जागरूक ब्रांड इंडी प्रोजेक्ट स्टोर (Indie Project Store) शुरू करने का फैसला किया।


द बिजनेस मॉडल

हैदराबाद स्थित इंडी प्रोजेक्ट स्टोर (आईपीएस) 2016 में शुरू किया गया था। सह-संस्थापक न केवल माता-पिता को स्थानीय रूप से निर्मित और पर्यावरण के प्रति जागरूक कपड़े खोजने में मदद करना चाहते थे, बल्कि आय उत्पन्न करने के लिए महिलाओं द्वारा चलाए जाने वाले छोटे पैमाने के व्यवसायों और कारीगरों व बुनकरों की भी मदद करना चाहते थे।


सत्या कहती हैं,

"हम अपने मैन्युफैक्चरिंग वर्क ऑर्डर्स को छोटी सिलाई युनिट्स, गैर सरकारी संगठनों, सामाजिक उद्यमों और घर-आधारित दर्जी से आउटसोर्स करते हैं क्योंकि हम इस तरह के सेटअपों (छोटे संगठनों) के लिए अधिक आय पैदा करने वाले रास्ते बनाना चाहते हैं।"


यह जोड़ी आईपीएस के कामकाजी मॉडल को "दिल वाला बिजनेस मॉडल" के रूप में संदर्भित करती है और यह अपनी वेबसाइट पर 60 अन्य छोटे व्यवसायों के कपड़े भी बेचती हैं। इनमें से नब्बे प्रतिशत व्यवसाय महिला उद्यमियों द्वारा चलाए जाते हैं।


व्यवसायी मॉडल शिल्पी और सत्या की इच्छानुरूप स्वतंत्र कारीगरों और स्थानीय व्यवसायों की मदद करता है। और इसकी झलक इंडी प्रोजेक्ट स्टोर के नाम में दिखती है, जहां 'इंडी' इंडिपेंडेंट का शॉर्ट फॉर्म है। हालांकि, संस्थापक बताती हैं कि उनके लिए स्टार्टअप शुरू करना आसान नहीं था। भले ही दोनों महिलाओं के पास एक ठोस आइडिया था, लेकिन उनके पास व्यवसाय चलाने का कोई अनुभव नहीं था।


वे कहती हैं,

“हमने बहुत सारी ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग की हुई थीं। लेकिन हमारे पास कोई उद्यमी अनुभव नहीं था। इसलिए, स्थायी व्यावसायिक प्रक्रियाओं को स्थापित करने में समय, ऊर्जा और बहुत सारे R & D का समय लगा।"


बढ़ रहा है व्यापार

शिल्पी और सत्या ने 25,000 रुपये के शुरुआती निवेश के साथ अपना कारोबार शुरू किया। सह-संस्थापकों का दावा है कि आईपीएस ने शुरुआत से ही 15 प्रतिशत सालाना विकास के साथ 38 लाख रुपये से अधिक के राजस्व में वृद्धि की है। इस जोड़ी ने फेसबुक और इंस्टाग्राम के जरिए बेचने के साथ शुरुआत की। आज, इसकी अपनी ईकॉमर्स साइट है। इसकी यूएसपी पारंपरिक भारतीय कपड़ों के प्रचुर उपयोग में निहित है।


सत्या कहती हैं,

''हम 100 प्रतिशत शुद्ध सूती कपड़े का इस्तेमाल करते हैं और पारंपरिक भारतीय प्राकृतिक कपड़ों जैसे इकत, कलामकारी, मंगलगिरी, खादी, मुल्मुल, हथकरघा और हैंड ब्लॉक प्रिंट के साथ बड़े पैमाने पर काम करते हैं।''
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आईपीएस अपने सभी कपड़े विक्रेताओं और स्थानीय आपूर्तिकर्ताओं से सोर्स करता है, जो सीधे कारीगरों और बुनकर समुदायों के साथ काम करते हैं। लेटेस्ट स्टाइल्स, डिजाइनों, फेब्रिक आदि के लिए मौसमी रंग पट्टियों के विस्तृत अध्ययन के बाद, कपड़े व्यावहारिक जरूरतों और आराम को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं।


यह ब्रांड सात साल की उम्र तक के बच्चों के लिए क्वालिटी वाले कपड़े उपलब्ध कराता है, जिसकी कीमत 300 रुपये से 2,500 रुपये तक है। शुरू में, इसका बाजार सिर्फ शहरी भारत तक सीमित था। आज, स्टार्टअप को टियर -2 और III शहरों से ऑर्डर मिलते हैं।


इसके पास अमेरिका, सिंगापुर और मध्य पूर्व में एनआरआई आबादी के बीच भी ग्राहक हैं। भविष्य में, सह-संस्थापक IPS के लिए नए खुदरा चैनलों को जोड़ने और अपने प्लेटफॉर्म पर अधिक छोटे व्यवसाय विक्रेताओं को जोड़ने की उम्मीद करते हैं। वे कहते हैं,

“हमारा मुख्य लक्ष्य भारतीय उपभोक्ताओं को छोटे व्यवसायों से 'मेड इन इंडिया’ उत्पादों की सराहना करने और ऐसे उत्पादों को नियमित भारतीय घरों में आसानी से उपलब्ध कराने के लिए प्रोत्साहित करना है।”