साइबर अटैक से डरीं कंपनियां हर साल भारत के हैकरों को दे रहीं करोड़ों का इनाम

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साइबर अटैक की बढ़ती घटनाओं से सहमीं कंपनियां ही नहीं, सरकारें तक आत्मरक्षा के लिए अब अपने बजट से करोड़ों रुपए इनाम में खर्च करने लगी हैं। इससे भारत में इथिकल हैकर्स की सालाना लाखों डॉलर की कमाई हो रही है। हमारे देश में बग हंटिंग का काम करने वाले ये ज्यादातर हैकर अठारह से तीस साल तक के युवा हैं।

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सांकेतिक फोटो (Shutterstock)

गुरुदासपुर (पंजाब) के तीस वर्षीय राहुल त्यागी को भारत का सबसे बड़ा कम्यूवालेटर सिक्युरिटी एंड एथिकल हैकिंग ट्रेनर माना जाता है। हमारे देश में इस समय कुछ इथिकल हैकर भारी कमाई कर रहे हैं। चंडीगढ़ में बतौर साइबर सिक्युरिटी स्पेाशलिस्ट राहुल त्यागी के अलावा, हमारे देश में सैमसंग के ग्लोबल वाइस प्रेजिडेंट गुजरात के प्रणव मिस्त्री, टीवी होस्ट और ऑथर अंकित फादिया, माइक्रोसॉफ्ट के साथ इंटरर्नशिप कर चुके एवं फोन हैकिंग में महारत कौशिक दत्त, वर्ष 2006 में सिक्यूजरिटी शॉटआउट प्रतियोगिता के विनर रहे आईआईटी गुवाहाटी से बी-टेक विवेक रामचंद्रन के नाम भी उल्लेखनीय हैं।


बग हंटिंग का काम करने वाले ज्यादातर हैकर युवा हैं। एक अनुमान के मुताबिक, इन हैकरों में दो तिहाई की उम्र अठारह से तीस साल के बीच है। इनको बड़ी कंपनियां कोई भी खामी बताने पर बड़े-बड़े इनाम दे रही हैं। 

ये हैकर किसी साइबर अपराधी से पहले वेब कोड की कमी का पता लगा ले रहे हैं। जिन बग का पहले पता नहीं चल पाया हो, उन्हें तलाशना बेहद मुश्किल काम होता है, लिहाजा इस काम के लिए उन्हें हज़ारों डॉलर के पेमेंट किए जा रहे हैं।


पुणे के इथिकल हैकर 1 बताते हैं कि कोड की मदद से कोई भी वीडियो डिलीट किया जा सकता है। वह चाहते तो मार्क जुकरबर्ग का अपलोड किया वीडिया भी डिलीट कर सकते थे। जब उन्होंने इस बात को फ़ेसबकु प्रबंधन को बताया तो दो सप्ताह में उन्हे फ़ेसबुक से डॉलर में पांच अंकों का इनाम मिला। अब वह फुल टाइम हैकिंग करते हैं।





एक साल में सवा लाख डॉलर तक की कमाई कर रहे इथिकल हैकर शिवम वशिष्ठ बताते हैं कि इनामी रकम ही उनकी आमदनी का एकमात्र जरिया है। वह दुनिया की बड़ी कपंनियों के लिए क़ानूनी तौर पर हैकिंग का काम कर रहे हैं। यह एक चुनौतीपूर्ण काम है। वह कहते हैं कि इस क्षेत्र में कामयाबी हासिल करने के लिए किसी आधिकारिक डिग्री या अनुभव की ज़रूरत नहीं। उन्होंने अन्य हैकर्स की तरह ही यह काम ऑनलाइन रिसोर्सेज और ब्लॉग के जरिए सीखा है।


हैकिंग सीखने के लिए उन्हे कई-कई रातें जागकर बितानी पड़ी हैं ताकि वह किसी भी सिस्टम पर अटैक कर सकें। हैकिंग में कामयाब होने के दूसरे साल उन्होंने अपनी यूनिवर्सिटी की पढ़ाई छोड़ दी थी। अब उन्होंने अमेरिकी हैकर जेसे किन्सर की तरह कोड में कमी तलाशने के काम को अपने करियर बना लिया है।


इस टेक्निकल खेल के जानकार बताते हैं कि कंपनियों से मिलने वाले इनाम हैकरों को मोटिवेट करते रहते हैं। कंपनियां जानती हैं कि उन्हे इनाम न दिया जाए तो वे डाटा चुराकर बेचने लगेंगे। पिछले साल 2018 में अमरीका और भारत के हैकरों ने कंपनियों से खूब इनाम जीते हैं। उनकी साढ़े तीन लाख डॉलर से भी ज्यादा कमाई हुई।





गीकब्वॉय के नाम से चर्चित हैकर संदीप सिंह बताते हैं कि उन्हे हैकिंग में काफ़ी मेहनत करनी पड़ती है। उनको एक कंपनी का इनाम जीतने में तो छह महीने लग गए थे। एक हैकर ऑपरेशन प्रमुख ने बताया कि साढ़े पांच लाख हैकरों से जुड़ी उनकी कंपनी अब तक 70 मिलियन डॉलर हैकरों को दे चुकी है। वह बताते हैं कि टेक इंडस्ट्री में बग की पहचान पर इनाम देने का चलन नया है, फिर भी हैकरों की इनामी रकम बढ़ती जा रही है क्योंकि कंपनियां अपना डाटा किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखना चाहती हैं। 


गौरतलब है कि दिन ब दिन साइबर अटैक की घटनाओं में अस्सी फीसदी तक इजाफा हो चुका है।  साइबर हमलों के डर से अब तो बड़ी कंपनियों के साथ सरकारें भी इनाम देकर हैकरों की मदद लेने लगी हैं क्योंकि डेटा चोरी हो जाने पर आर्थिक नुकसान के साथ साख पर भी बट्टा लगता है।


साइबर सिक्यूरिटी फर्म भी विश्वसनीय हैकरों की मदद लेने लगी हैं। फ़ेसबुक और गूगल जैसी कंपनिया तो हैकरों को संवेदनशील डिजिटल संपत्ति का तक एक्सेस दे दे रही हैं। 2017 में जब एक हैकर ने ग्लोबल रेस्टोरेंट गाइड जोमेटो को धमकी दी थी अगर उसने बगों के लिए इनाम देने शुरू नहीं किए तो वह 17 मिलियन लोगों का डेटा डार्क वेब मार्केट में बेच देगा।




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