लगातार बढ़ रहा है फूड डिलिवरी का कारोबार, अरबों रुपये हो रहे निवेश

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अब वो जमाना गया, जब दाने-दाने पर लिखा होता था खाने वाले का नाम। अब तो ऐप पर घर बैठे फटाफट लजीज व्यंजनों का मजा लेने का दौर आ गया है। गूगल समेत तमाम कंपनियां कई सौ करोड़ डॉलर के इस कारोबार में उतर पड़ी हैं। कंपनियां करोड़ों का असंगठित नेटवर्क जोड़कर गुरुग्राम, बेंगलुरू, मुंबई की ओर कदम बढ़ा रही हैं।

Food Delivery Startups

सांकेतिक तस्वीर


समय के साथ तेजी से पूरी दुनिया भाग रही है। जो जहां है, वहीं इतना व्यस्त कि खाने की टेबल पर बैठने तक की फुर्सत नहीं। हां, अगर फटाफट ऐप के सहारे कोई घर बैठे गरमा-गर्म खाना परोस दे, फिर दिनचर्या कितनी आसान सी हो जाती है। यद्यपि इस सुविधा के लिए ट्रेडिशनल टिफिन सिस्टम तो हर शहर में बहुत पहले से चल रहा है लेकिन अब यही काम तमाम शहरों में स्टार्टअप के रूप में व्यापक स्तर पर हो रहा है, जिसमें कंपनियां भी कूद पड़ी हैं, तो तरह-तरह के पकवानों से लदा-फदा रेडिमेड किचन सिस्टम बड़ी आसानी से अब लाखों लोगों के घरों में दस्तक दे रहा है।


ऐसे फूड डिलीवरी ऐप की बात करें तो फ्रेश मेनू (FreshMenu), फूड पंडा (FoodPanda), जोमैटो (Zomato), उबर इट्स (Uber Eats) की सेवाएं भारत के एक-दो नहीं, हजारों शहरों में पहुंच चुकी हैं। कैब सर्विस देने वाली कंपनी उबर ने तो अभी पिछले साल ही भारत में फूड डिलीवरी सर्विस शुरू की है। कंपनी का दावा है कि वह किसी भी दूसरे ऐप के मुकाबले फास्ट डिलीवरी करती है लेकिन इन सब के बीच पांचवें 'स्विगी डेली' ऐप की खासियत यह है कि ऑर्डर करने के बाद खाना खुद भी जाकर ले आया जा सकता है। इस ऐप से कई बार कैशबैक ऑफर भी मिलता है।


आज से चार-पांच वर्ष बाद, एक अनुमान के मुताबिक विश्व में फूड डिलीवरी मार्केट 16,400 हजार करोड़ डॉलर (करीब 11 लाख करोड़ रुपए) का हो जाएगा। स्मार्टफोन, इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ने से दुनियाभर में फूड डिलीवरी बिजनेस में तेजी आई है। भारत में पांच-छह साल पहले तक यह मार्केट सालाना लगभग 1.18 लाख करोड़ रुपए तक रही थी, जो 16.2 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़ रही है। अब इस बाजार में तमाम बड़ी कंपनियां होड़ में हैं। यहां तक कि विशाल मल्टीनेशनल कंपनी गूगल भी अब इस बाजार में कूद पड़ी है।





उसके माध्यम से ग्राहक अलग-अलग ऐप डाउनलोड किए बिना पसंदीदा रेस्टोरेंट से खाना मंगा सकता है। कोई अगर पसंदीदा खाने के लिए गूगल सर्च का इस्तेमाल कर रहा है तो उसे बता दिया जाता है कि उसे कैसे, कहां ऑर्डर करना होगा। वह गूगल पे के जरिए ही तुरंत ऑर्डर का पेमेंट भी कर सकता हैं। फिलहाल, अभी गूगल ने अपने को यहीं तक रखते हुए खुद फूड डिलीवरी बिजनेस में नहीं आना तय कर रखा है लेकिन वह बिजनेस से जुड़ी कंपनियों के साथ करार कर रही है। इस कड़ी में वह अमेरिका में डोर डैश, पोस्टमेट्स, डिलीवरी डॉट कॉम, स्लाइस और चाउ नाऊ से करार कर चुकी है।


दरअसल, अब लजीज पकवानों का ऐप डिलिवरी सिस्टम कंपनी लेबल पर अच्छी-खासी कमाई का जरिया बन चुका है। घर बैठे व्यंजनों का लुत्फ सिर्फ घर के लोग ही नहीं, मेहमान भी उठाने लगे हैं। 'स्विगी डेली' ने कंपनी लेबल पर गुरुग्राम (हरियाणा) में ऐप डिलिवरी शुरू करने के बाद अब बेंगलुरु और मुंबई में अपना विस्तार करने जा रही है। इस कंपनी के सीईओ श्रीहर्ष मजेती बताते हैं कि इस ऐप पर ग्राहकों को अपने खाने की डिलीवरी का समय तय करने का भी विकल्प होता है। दैनिक, साप्ताहिक या मासिक सब्सक्रिप्शन लिया जा सकता है। स्विगी डेली की मदद से किफायती कीमतों पर संगठित वेंडर, घरेलू रसोइए और टिफिन सेवा देने वाले खाने की डिलिवरी कर रहे हैं।


स्विगी ऐप पर हर तरह के खाने के दो दर्जन से अधिक ऑब्शन हैं। कंपनी अपने नेटवर्क में संगठित वेंडरों की संख्या बढ़ाने के साथ ही स्थानीय स्तर पर अधिक डिमांड वाली टिफिन सेवाओं को भी अपने साथ जोड़ती जा रही है। आलोक जैन का कहना है कि भारत में डेली मील सब्सक्रिप्शन मार्केट इस समय बेहद असंगठित है। स्विगी डेली प्रबंधन इस तरह की असंगठित सेवाओं को संगठित कर मुनासिब कीमत पर स्वादिष्ट भोजन के लिए एक बड़ा प्लेटफॉर्म मुहैया करा रहा है। उधर, फूडपांडा कंपनी की फूड सर्विस इस समय दुनिया के चौबीस देशों में चल रही है। यह कंपनी संबंधित देशों में 45 मिनट में फूड डिलीवरी की गारंटी देती है। जोमैटो की सर्विस इस समय भारत के दस हजार शहरों तक पहुंच चुकी है। फ्रेश मेन्यू ऐप के जरिए चौबीसो घंटे हर रोज नए-नए व्यंजनों की सेवा दी जा रही है।





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