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भारत का सी-फूड एक्सपोर्ट FY2022-23 में अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा

भारत का समुद्री खाद्य वस्तुओं का निर्यात वित्त वर्ष 2022-23 में अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा; वित्त वर्ष 2021-22 के मुकाबले मात्रा के संदर्भ में 26.73 प्रतिशत और मूल्य के संदर्भ में 4.31 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

भारत का सी-फूड एक्सपोर्ट FY2022-23 में अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा

Thursday June 15, 2023 , 7 min Read

हाइलाइट्स

  • वित्त वर्ष 2022-23 में 8.09 बिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का 17,35,286 मीट्रिक टन समुद्री खाद्य का निर्यात मूल्य और मात्रा दोनों के संदर्भ में सबसे अधिक है
  • संयुक्त राज्य अमेरिका भारतीय समुद्री खाद्य पदार्थ का सबसे बड़ा आयातक है, इसके बाद चीन, यूरोपीय संघ, दक्षिण पूर्व एशिया, जापान और मध्य पूर्व का स्थान है
  • प्रमुख निर्यात समुद्री खाद्य वस्तु के रूप में सुखाई हुई झींगा मछली का शीर्ष स्थान बरकरार है

भारत ने 17,35,286 मीट्रिक टन समुद्री खाद्य पदार्थ की शिपिंग करके मात्रा और मूल्य (दोनों अमेरिकी डॉलर और रुपये दोनों) के संदर्भ में संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे प्रमुख निर्यात बाजारों में कई चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान 63,969.14 करोड़ (8.09 बिलियन अमरीकी डॉलर) के समुद्री खाद्य पदार्थ का अब तक का सर्वाधिक निर्यात किया है.

वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान, मात्रा के संदर्भ में निर्यात में 26.73 प्रतिशत, रुपये के संदर्भ में 11.08 प्रतिशत, अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में 4.31 प्रतिशत की वृद्धि हुई. भारत ने वित्त वर्ष 2021-22 में 57,586.48 करोड़ रुपये (7,759.58 मिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के 13,69,264 मीट्रिक टन समुद्री खाद्य पदार्थ का निर्यात किया था.

सुखाई हुई झींगा मछली मात्रा और मूल्य दोनों के संदर्भ में प्रमुख निर्यात वस्तु बनी रही जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन, भारत के समुद्री खाद्य पदार्थ के प्रमुख आयातक बन गए हैं. सुखाई हुई झींगा मछली के निर्यात से 43,135.58 करोड़ रुपये (5481.63 मिलियन अमेरिकी डॉलर) कमाए गए और समुद्री खाद्य निर्यात के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण वस्तु के रूप में अपनी मज़बूत स्थिति बनाए रखी. मात्रा के संदर्भ में इसकी 40.98 प्रतिशत की हिस्सेदारी और कुल अमेरिकी डॉलर की कमाई का 67.72 प्रतिशत हिस्सा है. इस अवधि के दौरान सुखाई हुई झींगा मछली के निर्यात के रूप में रुपये के संदर्भ में 1.01 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

वित्त वर्ष 2022-23 के दौरान सुखाई हुई झींगा मछली का कुल निर्यात 7,11,099 मीट्रिक टन दर्ज किया गया था. सुखाई हुई झींगा मछली का आयात (2,75,662 मीट्रिक टन) के साअथ संयुक्त राज्य अमेरिका, सबसे बड़ा बाजार है. इसके बाद चीन (1,45,743 मीट्रिक टन), यूरोपीय संघ (95,377 मीट्रिक टन), दक्षिण पूर्व एशिया (65,466 मीट्रिक टन), जापान (40,975 मीट्रिक टन), और मध्य पूर्व (31,647 मीट्रिक टन) का स्थान है.

वर्ष 2022-23 में ब्लैक टाइगर (बीटी) झींगा मछली के निर्यात में मात्रा, रुपये के मूल्य और अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में क्रमशः 74.06 प्रतिशत, 68.64 प्रतिशत और 55.41 प्रतिशत की वृद्धि हुई. 31,213 मीट्रिक टन ब्लैक टाइगर (बीटी) झींगा मछली के निर्यात का मूल्य का 2,564.71 करोड़ रुपये (321.23 मिलियन अमेरिकी डॉलर) हुआ. अमरेकी डॉलर मूल्य के मामले में 25.38 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ जापान ब्लैक टाइगर झींगा मछली के निर्यात के लिए प्रमुख बाजार बन गया, इसके बाद यूरोपीय संघ (25.12 प्रतिशत) और संयुक्त राज्य अमेरिका (14.90 प्रतिशत) का स्थान है. वन्नामेई झींगा का निर्यात वर्ष 2022-23 में वर्ष 2021-22 की तुलना में 5234.36 मिलियन अमेरिकी डॉलर से 8.11 प्रतिशत घटकर 4809.99 मिलियन अमेरिकी डॉलर पर आ गया.

निर्यात की जाने वाली दूसरी सबसे बड़ी वस्तु सुखाई गई मछली मूल्य के संदर्भ में 5,503.18 करोड़ रुपये (687.05 मिलियन अमेरिकी डॉलर) और मात्रा के संदर्भ में 21.24 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर के रूप में आय के संदर्भ में 8.49 प्रतिशत है. इस वर्ष सुखाई हुई मछली के निर्यात में मात्रा, रुपये और अमेरिकी डॉलर मूल्य के संदर्भ में क्रमश: 62.65 प्रतिशत, 58.51 प्रतिशत और 45.73 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

अन्य वस्तुओं के अंतर्गत, सुरीमी ने 658.84 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात की वस्तु रही है, जिसका मूल्य 2,013.66 करोड़ रुपये (253.89 मिलियन अमेरिकी डॉलर) है. अन्य उत्पादों के अंतर्गत सुखाए हुए ऑक्टोपस से 725.71 करोड़ रुपये (91.74 मिलियन अमेरिकी डॉलर), सुरिमी एनालॉग उत्पादों ने 558.51 करोड़ रुपये (70.35 मिलियन अमेरिकी डॉलर), डिब्बाबंद उत्पादों ने 326.48 करोड़ रुपये ( 41.56 मिलियन अमेरिकी डॉलर), सुखाए हुए लॉबस्टर ने 215.15 करोड़ रुपये (27 मिलियन अमेरिकी डॉलर) का निर्यात हुआ है.

चौथी सबसे बड़ी निर्यात की गई वस्तु सुखाई हुई स्क्वीड ने 3593.75 करोड़ रुपये (454.61 मिलियन अमेरिकी डॉलर) प्राप्त किए, जिसकी मात्रा के संदर्भ में 4.83 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर आय में 5.62 प्रतिशत की हिस्सेदारी है. सुखाई हुई मछली के निर्यात में रुपये के मूल्य में 28.07 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर मूल्य में 18.58 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

सूखे वस्तुओं का निर्यात 2,52,918 मीट्रिक टन आंका गया, मात्रा के संदर्भ में 243.27 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में 167.70 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि प्रदर्शित करता है और इससे 3,080.92 करोड़ रुपये (384.05 मिलियन अमेरिकी डॉलर) अर्जित किए गए. इस संदर्भ में सूखाई गई मछली और झींगा मछली ने मिलकर 307.96 मिलियन अमेरिकी डॉलर का योगदान दिया और सूखाई गई मछली के निर्यात से 24.88 मिलियन अमेरिकी डॉलर प्राप्त हुए.

सूखाई गई कटलफिश का निर्यात, 54,919 मीट्रिक टन आंका गया, जो कि रुपये के मूल्य में 14.09 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर के मूल्य के रूप में 5.50 प्रतिशत की वृद्धि है और इससे 2353.34 करोड़ रुपये (295.49 मिलियन अमेरिकी डॉलर) अर्जित हुए हैं.

ठंडी वस्तुओं का निर्यात, जिसे एक आशाजनक क्षेत्र माना जाता है, में भी अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में 20.73 प्रतिशत और मात्रा के संदर्भ में 12.63 प्रतिशत की वृद्धि हुई. सजीव वस्तुओं का निर्यात 7,824 मीट्रिक टन आंका गया जो कि रुपये के संदर्भ में 24.53 प्रतिशत और आमेरिकी डॉलर मूल्य के रूप में 15.61 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. सुखाई गई स्क्वीड (7.13 प्रतिशत), फ्रोजन कटलफिश (13.33 प्रतिशत), ठंडी वस्तुएं (7.19 प्रतिशत) और सजीव वस्तुओं (3.90 प्रतिशत) के इकाई मूल्यों में वृद्धि देखी गई है.

जहां तक विदेशी बाजारों की बात है, तो अमेरिका मूल्य के संदर्भ में भारतीय समुद्री खाद्य पदार्थ का प्रमुख आयातक बना हुआ है, जिसका आयात 2,632.08 मिलियन अमेरिकी डॉलर है, जो अमेरिकी डॉलर मूल्य के हिसाब से 32.52 प्रतिशत का हिस्सा है. सुस्त मांग के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका में निर्यात अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में 21.94 प्रतिशत तक कम हो गया है. अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में 92.70 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ सुखाई हुई झींगा अमेरिका को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तु बनी रही. संयुक्त राज्य अमेरिका में ब्लैक टाइगर झींगा का निर्यात मात्रा के संदर्भ में 4.06 प्रतिशत और रुपये के संदर्भ में 0.26 प्रतिशत बढ़ गया है.

मात्रा और अमेरिकी डॉलर दोनों के संदर्भ में चीन, भारत से दूसरे सबसे बड़े खाद्य पदार्थ का निर्यात वाले देश के रूप में उभरा है, जिसमें 1,508.43 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य का 4,05,547 मीट्रिक टन का आयात हुआ, जिसका मात्रा के संदर्भ में 23.37 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में 18.64 प्रतिशत का हिस्सा है. चीन के बाजार में निर्यात मात्रा के संदर्भ में 51.90 प्रतिशत, रुपये के मूल्य में 32.02 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर मूल्य में 28.37 प्रतिशत की वृद्धि हुई. सुखाई हुई झींगा, चीन को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तु, मात्रा के संदर्भ में 35.94 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर मूल्य में 60.92 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी जबकि चीन को कुल निर्यात में से सुखाई हुई मछली की मात्रा में 34.88 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर मूल्य के संदर्भ में 18.56 प्रतिशत का दूसरा सबसे अधिक हिस्सा था. चीन को सुखाई हुई झींगा और सुखाई हुई मछली ने मात्रा और मूल्य दोनों में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की है.

यूरोपीय संघ 1,263.71 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के 2,07,976 मीट्रिक टन के आयात के साथ तीसरा सबसे बड़ा आटक देश बना हुआ है. इस बाजार में सुखाई हुई झींगा निर्यात की सबसे प्रमुख वस्तु है, जिसमें रुपये और अमेरिकी डॉलर के मूल्य में क्रमश: 15.12 प्रतिशत और 7.20 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. इस बाजार में इकाई मूल्य ने 3.77 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है.

दक्षिण पूर्व एशिया 1191.25 मिलियन अमेरिकी डॉलर मूल्य के 4,31,774 मीट्रिक टन के आयात के साथ चौथा सबसे बड़ा बाजार है. सुखाई हुई झींगा 46.08 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मात्रा के हिसाब से 15.16 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर के हिसाब से 35.17 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तु है. सुखाई हुई मछली 46.84 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मात्रा के हिसाब से 36.02 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर मूल्य के हिसाब से 20.57 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ, निर्यात की दूसरी प्रमुख वस्तु है.

जापान 9.99 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मात्रा के संदर्भ में 6.29 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर मूल्य के संदर्भ में 5.99 प्रतिशत की हिस्सेदारी के साथ पांचवां सबसे बड़ा आयातक बना रहा. सुखाई हुई झींगा 71.35 प्रतिशत की प्रतिशत हिस्सेदारी और अमेरिकी डॉलर मूल्य में 5.26 प्रतिशत की वृद्धि के साथ जापान को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तु बनी रही.

मात्रा के हिसाब से मध्य पूर्व में निर्यात 77,677 मीट्रिक टन था, जिसकी कीमत 330.68 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी. इस बाजार ने मात्रा के संदर्भ में 32.95 प्रतिशत, रुपये के संदर्भ में 17.33 प्रतिशत और अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में 9.09 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की है.

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