शुक्र ग्रह पर यान भेजने की तैयारी में इसरो, अगले 10 सालों में इन 7 अंतरिक्ष अभियानों को करेगी लॉन्च

By yourstory हिन्दी
September 07, 2019, Updated on : Tue Sep 10 2019 05:39:03 GMT+0000
शुक्र ग्रह पर यान भेजने की तैयारी में इसरो, अगले 10 सालों में इन 7 अंतरिक्ष अभियानों को करेगी लॉन्च
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नेशनल एयरोनॉटिक्स एंड स्पेस एडमिनिस्ट्रेशन (नासा) 2024 तक चांद पर अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने की योजना बना रहा है। वहीं दूसरी ओर एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स अगले दस सालों में मंगल ग्रह पर कॉलोनी बनाने की योजना बना रही है। दुनिया भर की कई और अंतरिक्ष एजेंसियां भी अंतरिक्ष को लेकर ऐसी ही योजना बना रही है और इन एजेंसियों में भारत की इसरो भी शामिल है।


इसरो ने हाल ही में RISAT-2B नाम के अर्थ ऑब्जर्वेशन सेटेलाइट का प्रक्षेपण किया है और इसके बाद से ब्रांहाड में नई संभावनाओं को तलाशने में उसकी उत्सुकता जगी है। इसरो इस समय सूर्य के अध्ययन के लिए यान भेजने से लेकर शुक्र ग्रह पर पैर रखने तक कई मिशन में जुटा है। योरस्टोरी आपको भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के ऐसे ही 7 आगामी मिशनों के बारे में जानकारी दे रही है।


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सांकेतिक फोटो

पहला कदम चांद पर: मिशन चंद्रयान -2 (2019)

इसरो ने चंद्रयान-2 को 22 जुलाई 2019 को श्रीहरिकोटा रेंज से भारतीय समयानुसार 02:43 अपराह्न को सफलता पूर्वक प्रक्षेपित किया। इसके लैंडर को 7 सितंबर को चांद की सतह पर उतरना था।


इस मिशन में तीन मॉड्यूल शामिल हैं- विक्रम नाम का एक लैंडर, एक ऑर्बिटर, और प्रज्ञान नाम का छह पहियों वाला रोवर। इन सभी को इसरो ने विकसित किया है। एक आधिकारिक बयान में एजेंसी ने बताया, 'चंद्रयान -2 का वजन करीब 3,290 किलोग्राम है। यह चंद्रमा के चारों ओर परिक्रमा करेगा और वहां रिमोट सेंसिंग के उद्देश्य को पूरा करेगा। रोवर चांद की सतह पर चलेगा और विश्लेषण के लिए मिट्टी, चट्टानों, दूसरी स्थालकृतियों और जीवाश्म रिकॉर्ड से जुड़ी जानकारियां जुटाएगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि चांद की सतह और उपसतह के कितने भाग में पानी है।'

 

2008 में लॉन्च हुए चंद्रयान -1 के बाद यह चांद पर दूसरा भारतीय मिशन है। चंद्रयान-2 को जीएसएलवी मार्क- III रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया था और इसे चांद के दक्षिणी हिस्से में उतरना था।



सूर्य का अध्ययन: मिशन आदित्य एल1 (2019-20)

इसरो पहली बार सूर्य के कोरोना और उसके वायुमंडल का अध्ययन करने के लिए एक खोजी अभियान शुरू करेगा। इसे 2019-20 के दौरान एक पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV) पर लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।


कोरोना सूर्य की बाहरी परत है और इसके चारों ओर फैली दृश्यमान डिस्क से हजारों किमी ऊपर फैली हुई है। सबसे दिलचस्प तथ्य यह है कि इसका तापमान एक लाख डिग्री केल्विन से भी अधिक है, जबकि सूर्य की सतह का तापमान केवल 6,000 डिग्री केल्विन है।


सोलर फिजिक्स के क्षेत्र में यह तथ्य अभी भी एक रहस्य बना हुआ है। इसरो के मुताबिक, यान के साथ विजिबल एमिशन कोरोनोग्राफ, सोलर अल्ट्रावॉयलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (SUIT) जैसे पेलोड्स जाएंगे, जो मैग्निट्यूट को मापने और मैग्निटिक फील्ड की प्रकृति के बारे में पता लगाने में मदद करेंगे। 



मिशन गगनयान 2021-2022

मंगल और चंद्रमा के बाद, भारत अबअपने मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन के लिए पूरी तरह तैयार है। इस मिशन की लागत करीब 10,000 करोड़ रुपये होने का अनुमान है। मिशन के पूरा होते ही भारत एक इंसान को अंतरिक्ष में भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा। इसे देश का अब तक का सबसे बड़ा अंतरिक्ष मिशन बताया जा रहा है। 


गगनयान मिशन के लिए इसरो ने मॉड्यूल, लाइफ सपोर्ट सिस्टम और अंतरिक्ष यान के पर्यावरण को नियंत्रण करने वाले सिस्टम विकसित किए हैं। फिलहाल इसरो की नई फैसलिटी सिस्टम में इस मिशन की टेस्टिंग चल रही है, जिसे खासतौर से मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन के लिए बनाया गया है।


पहले इंसान के बिना एक टेस्ट दिसंबर 2020 में किया जाएगा और उसके बाद दूसरा टेस्ट जूलाई 2021 में होगा। अगर ये टोनों टेस्ट सफल रहते हैं तो अंतिम मिशन को दिसंबर 2021 में लॉन्च किया जाएगा।

मंगल पर एक बार फिर वापसी: मंगलयान -2 (2022-2023)

2014 में इसरो ने तब पूरी दुनिया को चौंका दिया था जब उसने सिर्फ 450 करोड़ रुपये की लागत में मंगल ग्रह के लिए अपने ऑर्बिटर मिशन को लॉन्च किया। इसके साथ ही भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी मंगल पर सफलतापूर्वक उतरने वाली दुनिया की चौथी एजेंसी बन गई थी।


अब फ्रांस के CNES के सहयोग से, इसरो अपना दूसरा MOM-2 मॉड्यूल बना रही है। रिपोर्टों के मुताबिक इस मिशन को 2022 और 2023 के बीच लॉन्च करने की योजना है। यह मॉड्यूल धीमी गति से लैंड होने के लिए और अपने प्रारंभिक एपोपेपिस (शरीर के केंद्र) को कम करने के लिए एरोब्रेकिंग का इस्तेमाल करेगा। मंगल ग्रह से यह यान कई अहम जानकारियों को धरती पर भेजेगा।

चंद्रमा की तीसरी यात्रा: चंद्रयान -3 (2020 के अंत में)

इसरो चीफ डॉ. कैसासवाडिवू सिवन ने मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में बताया, 'चंद्रमा पृथ्‍वी का नज़दीकी उपग्रह है। ऐसे में यह गहन अंतरिक्ष मिशन के लिए जरूरी टेक्‍नोलॉजी आजमाने का एक उपयुक्त परीक्षण केन्‍द्र हो सकता है। चंद्रयान-2 इस तरह की गतिविधियों के लिए चंद्रमा की उपयुक्तता का आकलन करेगा।'


चंद्रयान-2 मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है और चंद्रयान-3 को अगले दशक में लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन चांद पर एक भारतीय रोबोट को भेजने की संभावनाओं के बारे में पता लगाएगा। चांद को लेकर एक साथ इतने मिशनों को देखकर हैरान नहीं होना चाहिए क्योंकि चंद्रयान हमेशा से मल्टी-मिशन स्पेस प्रोग्राम के लिए था।



पृथ्वी की जुड़वां बहन शुक्र की यात्रा: शुक्रयान मिशन 2

शुक्र ग्रह को अक्सर पृथ्वी की जुड़वां बहन कहा जाता है, क्योंकि दोनों ग्रहों के आकार, घनत्व, संरचना और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में कई तरह की समानताएं हैं। धरती से नंगी आंखों से दिखाई देने के कारण शुक्र को सुबह का तारा और शाम का तारा भी कहा जाता है। यह ग्रह पृथ्वी के मुकाबले सूर्य से 30 प्रतिशत ज्यादा करीब है। इसके चलते शुक्र ग्रह पर सौर विकिरण, सौर फ्लेयर्स और अन्य सौर घटनाओं की बहुत अधिक संभावनाएं हैं, जो इसरो को वहां के वातावरण का अध्ययन करने में मदद कर सकता है।


मिशन शुक्रयान का मुख्य उद्देश्य शुक्र के घने वातावरण का अध्ययन करना है। इसरो की वेबसाइट के मुताबिक, प्रस्तावित 500w शक्ति वाले उपग्रह का वजन 175 किलो है, हालांकि अंतिम कॉन्फिगरेशन के आधार पर इसके वजन और शक्ति में और बढ़ोतरी होगी। 

ग्रहों पर खोजी अभियान: एक्सपोसैट (2020 के अंत में)

इसरो का एस्ट्रोसैट, एक मल्टी-वेबलेंथ एक्स-रे एस्ट्रोनॉमी वेधशाला है। इसे सितंबर 2015 में लॉन्च किया गया था और यह वर्तमान में ब्रह्मांड में एक्स-रे की उत्पत्ति का अध्ययन कर रहा है। मिशन के दौरान इसरो का एक्सपोसैट ब्रह्मांड में एक्स-रे, खासतौर से हमारे ब्रह्मांड में मौजूद चमकीले एक्स-रे स्रोतों के ध्रुवीकरण का पता लगाएगा।


इन रौशनियों के मूल स्त्रोत न्यूट्रॉन तारे, सुपरनोवा, अवशेष या ब्लैक होल के आसपास के क्षेत्र भी हो सकते हैं। इस अध्ययन से भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी को भविष्य में अंतरिक्ष में इस तरह के विकिरणों से बचाने के लिए अंतरिक्ष यान को बेहतर ढंग से डिजाइन करने में मदद मिलेगी।