तमिलनाडु के गांवों में सांप के डसने से हर वर्ष होती है 10 हजार से अधिक लोगों की मौत

तमिलनाडु के गांवों में सांप के डसने से हर वर्ष होती है 10 हजार से अधिक लोगों की मौत

Monday December 30, 2019,

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तमिलनाडु के गांवों में सांपों के डसने से हर साल कम से कम 10,000 लोगों की मौत हो जाती है। ब्रिटेन स्थित ‘यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग’ के एक सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है।


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प्रतीकात्मक चित्र



विश्वविद्यालय ने यह पता लगाने के लिए राज्य के ग्रामीण इलाकों में 30,000 घरों का सर्वेक्षण किया कि सांपों के डसने की कितनी घटनाएं होती हैं और इन घटनाओं के स्वास्थ्य पर और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव क्या हैं।


विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर शक्तिवेल वाइयापुरी ने यहां शनिवार को संवाददाताओं को बताया कि अध्ययन में यह बात सामने आई कि जिन लोगों को सर्वेक्षण में शामिल किया गया, उनमें से चार प्रतिशत लोग सर्पदंश के शिकार हुए हैं और इसके शिकार मुख्य रूप से कृषि श्रमिक होते हैं।





जिन लोगों को सांप ने डसा, उनमें से 79 प्रतिशत लोग खेतों में थे और करीब 72 प्रतिशत लोग उस समय काम कर रहे थे।


उन्होंने बताया कि

‘‘इसके अलावा 19 प्रतिशत लोगों को सांप ने उस समय डसा, जब वे अपने घर के पास थे। सांपों ने अधिकतर लोगों (करीब 82 प्रतिशत लोगों) को पैरों में डसा।’’

वाइयापुरी ने कहा कि इसका उपचार की कीमत, कामकाजी दिनों का नुकसान, आमदनी का नुकसान, स्वास्थ्य पर दीर्घकालीन प्रभाव, शारीरिक अक्षमता एवं काम करने की क्षमता के संदर्भ में बड़ा सामाजिक-आर्थिक प्रभाव है।


उन्होंने कहा कि सरकार को सर्पदंश को बारे में जागरुकता फैसले के लिए मुहिम चलानी चाहिए और इसके उपचार के लिए मेडिकल पॉलिसी योजनाओं के जरिए पूरा कवर मुहैया कराना चाहिए।


आपको बता दें कि दुनिया भर में हर साल सर्पदंश से लगभग एक लाख लोग मारे जाते हैं। इनमें से आधी मौतें अकेले भारत में होती हैं। भारत में होने वाली 97 प्रतिशत मौतें ग्रामीण इलाकों में होती हैं।


मशहूर सर्पविज्ञानी और भारत में स्नेक मैन नाम से मशहूर रोमुलस व्हिटकर की एक रिपोर्ट पब्लिक लाइब्रेरी ऑफ सांइस नाम के जर्नल में 2011 में छपी थी। इसके मुताबिक, भारत में हर साल सांप के काटने से 45,900 से 50,900 लोगों की मौत हो जाती है। जिन प्रदेशों में सबसे ज्यादा मौतें हुईं उनमें उत्तर प्रदेश (8,700) आंध्र प्रदेश (5,200) और बिहार (4,500) सबसे ऊपर हैं।


(Edited by रविकांत पारीक )