12वीं के एग्जाम छोड़े, सिलेक्शन में 2 बार रिजेक्ट हुए तब जाकर गेंद जैसी घूमी जिंदगी, भारतीय टीम का सितारा बनकर उभरे 19 साल के रवि

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'प्रतिभाएं संसाधनों की मोहताज नहीं होतीं', यह कहने को भले ही एक साधारण सा वाक्य हो लेकिन इसे सही साबित करने में बहुत मेहनत लगती है। पहले भारत की U-19 टीम भले ही फाइनल में बांग्लादेश से हारकर खिताब ना जीत पाई हो लेकिन पूरे टूर्नामेंट के दौरान भारतीय खिलाड़ियों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा।


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लेग स्पिनर रवि बिश्नोई (फोटो क्रेडिट: Sevabharati)



इनमें यशस्वी जायसवाल, दिव्यांश सक्सेना, कार्तिक त्यागी, रवि बिश्नोई और अथर्व अंकोलेकर जैसे नाम शामिल हैं। इन्हीं में से एक हैं जोधपुर के लेग स्पिनर रवि बिश्नोई। पूरे टूर्नामेंट में उन्होंने अपनी स्पिन गेंदबाजी से विपक्षी बल्लेबाजों को परेशान करके रखा।


उन्होंने टूर्नामेंट में कुल 17 विकेट झटके जिनमें बांग्लादेश के खिलाफ फाइनल में लिए गए 4 विकेट शामिल हैं। उनकी बोलिंग ऐसी कि लोग उन्हें भारत का अगला अनिल कुंबले बता रहे हैं। हालांकि ऐसा कहना अभी जल्दबाजी है। रवि की जिंदगी ने भी उनकी गेंदबाजी की तरह ही टर्न लिया है।





साल 2018 में रवि के 12वीं के बोर्ड एग्जाम थे। उसी साल उन्हें राजस्थान रॉयल्स के लिए नेट बोलिंग करने का मौका मिला। पिताजी ने रवि से बोलिंग छोड़ एग्जाम देने के लिए कहा। एक बार रवि तैयार भी हो गए लेकिन उनके कोच से बात करने के बाद उन्होंने अपना फैसला बदला और क्रिकेट प्रैक्टिस की। वहां से रवि ने लेग स्पिन के मामले में अपनी अलग पहचान बनाई और जल्द ही भारत की अंडर 19 टीम में सेलेक्ट हुए।

राजस्थान के जोधपुर में एक क्रिकेट एकैडमी चलाने वाले कोच प्रद्योत सिंह बताते हैं कि मार्च 2018 में रवि राजस्थान रॉयल्स के बैट्समैन को बोलिंग करने के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। तभी एग्जाम देने के लिए पापा का फोन आया। एक बार रवि तैयार हो गए लेकिन किस्मत में कुछ और ही लिखा था। रवि वहीं रुके और एग्जाम छोड़ दिए। इससे पहले रवि अंडर-19 टीम के लिए दो बार रिजेक्ट हुए थे। अंडर 19 टीम के ट्रायल में वह दो बार रिजेक्ट किए गए। राजस्थान रॉयल्स के लिए नेट बोलिंग करने के बाद क्रिकेट से जुड़े लोगों की नजर उन पर पड़ी और यहां से उनकी किस्मत ने टर्न लेना शुरू कर दिया।


इस बार आईपीएल की नीलामी में रवि को किंग्स इलेवन पंजाब ने 2 करोड़ रुपये में खरीदा है। रवि बिश्नोई महान ऑस्ट्रेलियन लेग स्पिनर शेन वार्न को अपना आदर्श मानते हैं। इससे पहले हमने आपको ऐसी ही कहानी भारतीय अंडर-19 टीम के ओपनर बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल की बताई थी।


वह भी काफी परेशानियों का सामना करते हुए, मुसीबतों से जूझते हुए इस मुकाम पर पहुंचे। यशस्वी ने तो मुंबई के आजाद मैदान पर गोलगप्पे तक बेचे हैं जिसकी तस्वीर काफी वायरल भी हुई।


इस टूर्नामेंट में यशस्वी जायसवाल को प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। यशस्वी ने फाइनल में 88 रनों सहित कुल छह मैचों में 400 रन बनाए।




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