डॉक्टरों का जीवन आसान करने आया स्टार्टअप 'मेलडॉक', बनेगा उनका पर्सनल असिस्टेंट

By Vishal Krishna
February 20, 2020, Updated on : Thu Feb 20 2020 07:31:30 GMT+0000
डॉक्टरों का जीवन आसान करने आया स्टार्टअप 'मेलडॉक', बनेगा उनका पर्सनल असिस्टेंट
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

डॉक्टरों का जीवन कभी आसान नहीं रहा। लगातार काम करते हुए अपने और परिवार के लिए समय निकालना उनके लिए एक सपने की तरह बना रहा, लेकिन अब मेलडॉक नाम का यह स्टार्टअप डॉक्टरों के लिए पर्सनल असिस्टेंट लेकर आया है, जो उनका जीवन आसान कर देगा।

मेलडॉक के संस्थापक राजेश पोथुगुंटा

मेलडॉक के संस्थापक राजेश पोथुगुंटा



अधिक काम, परिवार और खुद के लिए ना के बराबर समय, कुछ इसी तरह एक डॉक्टर की जिंदगी चलती है। एक डॉक्टर का जीवन कतई आसान नहीं है, लेकिन बेंगलुरु स्थित स्टार्टअप मेलडॉक अब इस स्थिति को बदलने कि दिशा में आगे बढ़ रहा है।


चिकित्सकों के लिए, एक चिकित्सक द्वारा निर्मित मेलडॉक एक डॉक्टर का "वर्चुअल पर्सनल असिस्टेंट" है, जो  उन्हे कनेक्ट, स्मार्ट और अपस्किल से जोड़ता है।

यह स्वचालित नियुक्ति प्रणाली, क्लाउड में डॉक्युमेंट स्टोर, बचत के साथ ही बीमा प्रीमियम भुगतान के लिए रिमाइन्डर जैसी सेवाएं भी प्रदान करता है।


देश के वर्तमान जनसंख्या अनुमान के अनुसार भारत में हर 1,457 लोगों पर एक डॉक्टर है। 31 जनवरी, 2019 तक 11.57 लाख से अधिक एलोपैथिक डॉक्टर राज्य चिकित्सा परिषदों और भारतीय चिकित्सा परिषद के साथ पंजीकृत हैं।


मेलडॉक के संस्थापक राजेश पोथुगुंटा का मानना है कि जैसे-जैसे डॉक्टरों का पूल बढ़ता है, प्रौद्योगिकी उनके जीवन को बेहतर बनाने में एक प्रमुख भूमिका निभा सकती है।

ऐसे हुई शुरुआत

39 साल के राजेश ने एक दशक से अधिक समय तक बेंगलुरु के वैदेही इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर में आर्थोपेडिक सर्जन के रूप में काम किया। वो 2008 में एम एस रामैया मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु से पासआउट हैं और उन्होने 2011 में वैदेही मेडिकल कॉलेज से पोस्ट-ग्रेजुएशन पूरा किया।





समय के साथ उन्होने महसूस किया कि वह बहुत अधिक काम कर रहे थे और उन्होने वास्तव में अपने जीवन की योजना नहीं बनाई थी। उसके पास कमाई थी, लेकिन निवेश, प्रशिक्षण और सहयोग के लिए उनके पास कोई विचार नहीं था।


वह कहते हैं,

“मैंने बहुत सारे स्टार्टअप को आगे बढ़ते देखा। अस्पतालों के लिए ईएमआर बनाने के लिए स्टार्टअप, डॉक्टर की नियुक्तियों को ठीक करने के लिए स्टार्टअप ... लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं था जो उनके समय, धन, रीस्किलिंग और सहयोग को प्रबंधित करता हो। मैंने एक सुपर सहायक बनाने का फैसला किया क्योंकि इस क्षेत्र में इकोसिस्टम पहले से ही मौजूद था।”

साल 2017 में उन्होंने डॉक्टरों के लिए एक निजी सहायक मेलडॉक की अवधारणा बनाई। उन्होंने मंच बनाने के लिए अपनी ओर से 1 करोड़ रुपये का निवेश किया।


राजेश कहते हैं,

“मैं एक इंजीनियर नहीं हूँ और मैं जानबूझकर इसे बाहर से निर्माण करने का फैसला किया, लेकिन मुझे एहसास हुआ कि उत्पाद के पीछे के विचार को समझने के लिए मुझे कभी भी फ्रीलांसर नहीं मिल सकते हैं। मैंने तब कंपनी में इंजीनियरों को नियुक्त करना शुरू किया।"

उनका कहना है कि उनका ब्रीफ सरल था: एक व्यक्तिगत सहायक का निर्माण करना जो एक डॉक्टर के व्यस्त जीवन को सरल कर सकता था। शुरुआत से समस्याएँ जरूर आई, लेकिन साल 2018 में यह प्लेटफॉर्म अपने को साबित करने के लिए तैयार था।



वर्चुअल असिस्टेंट काम कैसे करता है?

सभी डॉक्टर को ऐप डाउनलोड करने के बाद रजिस्टर और फिर अपने डेटा को इनपुट करना होगा। यह डॉक्टर को मेलडॉक नेटवर्क के आधार पर अन्य क्षेत्रों में काम कर रहे डॉक्टरों के साथ भी जोड़ता है। इस तरह कानपुर में एक सामान्य सर्जन एक मरीज की मदद करने के लिए मामले की खूबियों और आगे के आकलन पर चर्चा करने के लिए दिल्ली स्थित सुपर स्पेशलिस्ट से आसानी से जुड़ सकता है।


प्लेटफॉर्म विभिन्न तरह के ऑनलाइन पाठ्यक्रम भी प्रदान करता है, जिसमें डॉक्टर लाइव व्याख्यान और सर्जरी में भाग ले सकते हैं।


मेलडॉक बीमा और म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए एक मंच के रूप में काम करते हुए बचत या निवेश उत्पादों का सुझाव देता है। यह स्टोरेज प्लेटफॉर्म के रूप में भी काम करता है, जिससे डॉक्टर क्लाउड में दस्तावेज़ अपलोड और सहेज सकते हैं।


राजेश कहते हैं,

“सहायक स्वचालित है और डॉक्टर इसे नियंत्रण में ले सकते हैं। यह निवेश/बचत विकल्पों के साथ सहयोगी अनुभव प्रदान करता है।"

संस्थापक का मानना है कि पर्सनल असिस्टेंट डॉक्टरों पर मुकदमों पर भी कमी ला सकता है, क्योंकि मरीज का पूरा और उपचार के कार्यक्रम से संबन्धित जानकारी इस ऐप में संरक्षित है।





वर्तमान में राजेश के पास पांच अस्पतालों में PoCs है, लेकिन वे नामों का खुलासा नहीं करना चाहते थे। अभी वे एमसीआई की मंजूरी का भी इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि डॉक्टरों के लिए ऐप में बहुत सारी जानकारी होगी जो "सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड" होनी चाहिए।

आगे का रास्ता

यह स्टार्टअप, जिसमें चार सदस्यीय टीम है, इनके पास 1,000 डॉक्टर हैं। संस्थापक का कहना है कि अभी उन्हें 10,000 डॉक्टरों की आवश्यकता है।


राजेश कहते हैं,

"अभी हम ऑर्गेनिकली आगे बढ़े हैं , इसके लिए हमने आक्रामक तरीके से मार्केटिंग नहीं की है। मेलडॉक डॉक्सऐप, प्रैक्टो, और एमफीन के साथ प्रतिस्पर्धा करता है, लेकिन यह पेशकश अद्वितीय है क्योंकि यहाँ प्रतियोगिता बंद हो जाती है। "

राजेश का लक्ष्य आगे बढ़ने वाली बीमा कंपनियों के साथ गठजोड़ करना है। वह सक्रिय रूप से रीस्किलिंग के लिए ऐप पर चिकित्सा साहित्य को जोड़ने पर भी काम कर रहे हैं। वह मंच को स्केल करने के लिए $3 मिलियन के निवेश पर लक्ष्य साधे हुए हैं।


राजेश के अनुसार

“भविष्य में, हम एक डेटा प्ले होंगे क्योंकि हम जानेंगे कि डॉक्टर क्या चाहते हैं। हम अपनी शिक्षा और बीमा उत्पादों से कमीशन लेंगे और डॉक्टरों से सदस्यता शुल्क भी लेंगे।"