जानिए कैसे होती है एक्वापोनिक फार्मिंग, मछलियों की मदद से उगती हैं ऑर्गेनिक सब्जियां, बिकती हैं बेहद महंगी

एक्वापोनिक फार्मिंग के जरिए आप करीब 95 फीसदी पानी की बचत कर सकते हैं. इसमें आप ऑर्गेनिक सब्जियां और सलाद उगा सकते हैं, जो बेहद महंगे बिकेंगे.

जानिए कैसे होती है एक्वापोनिक फार्मिंग, मछलियों की मदद से उगती हैं ऑर्गेनिक सब्जियां, बिकती हैं बेहद महंगी

Saturday August 27, 2022,

3 min Read

एक वक्त था जब भारत में सिर्फ परंपरागत तरीकों से ही खेती होती थी, लेकिन आज खेती में ढेर सारे एक्सपेरिमेंट हो रहे हैं. बिना मिट्टी के की जाने वाली हाइड्रोपोनिक फार्मिंग (Hydroponic Farming) और बिना तालाब के बायोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन (Fish Farming by Biofloc Technique) के बारे में तो आप जान ही चुके हैं. आज हम बताएंगे एक्वापोनिक फार्मिंग (Aquaponic Farming) के बारे में, जो एक्वाकल्चर और हाइड्रोपोनिक्स से मिलकर बना है. इसमें मछली पालन होता है और उससे निकले पानी पर खेती होती है. आइए जानते हैं एक्वापोनिक खेती के बारे में.

क्या होती है एक्वापोनिक फार्मिंग?

एक्वापोनिक फार्मिंग में एक तरफ टैंक में मछली पालन किया जाता है और दूसरी तरफ मछली के पानी से हाइड्रोपोनिक खेती की जाती है. टैंक में मछलियां फीड खाने के बाद करीब 70 फीसदी तक मल निकालती हैं. उनका मल अगर टैंक में ही पड़ा रहेगा तो पानी में अमोनिया का लेवल बहुत अधिक बढ़ जाएगा. अगर ऐसा होता है तो वह मछलियों के लिए जानले साबित हो सकता है. हालांकि, मछलियों के टैंक का वह अमोनिया वाला पानी हाइड्रोपोनिक खेती के लिए इस्तेमाल हो सकता है.

जब ये पानी पौधों की जड़ों तक पहुंचता है तो वहां पर जड़ों में मौजूद बैक्टीरिया पानी के अमोनिया को नाइट्रोजन में तोड़ देते हैं. नाइट्रोजन पौधों के विकास के लिए बहुत ही खास होता है. इससे पौधों को न्यूट्रिशन मिलता है और वह विकास करते हैं. इसके बाद पानी को फिर से प्यूरिफाई किया जाता है और मछलियों के टैंक में भेज दिया जाता है. यानी एक ही पानी को बार-बार इस्तेमाल किया जाता है. इससे एक तो पानी की बचत होती है और दूसरा इससे पौधों के लिए पोषण भी मिलता है. कई जगह पर तो टैंक के ऊपर ही सब्जियां उगाई जाती हैं, लेकिन उस सिस्टम में पानी को कुछ-कुछ दिनों में बदलने की जरूरत होती है.

एक्वापोनिक फार्मिंग से होते हैं ये फायदे

यह खेती उन जगहों के लिए सबसे अच्छी है, जहां पानी की कमी है. इस खेती में करीब 95 फीसदी पानी की बचत होती है. ऐसा इसलिए क्योंकि एक ही पानी को कई बार इस्तेमाल किया जाता है. इस खेती में पौधों को न्यूट्रिशन देने के लिए किसी तरह के कैमिकल का इस्तेमाल करने की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि मछलियों के मल से ही उन्हें न्यूट्रिशन मिल जाता है. इस तरह एक्वापोनिक फार्मिंग से उगाई गई सब्जियां और सलाद पूरी तरह से ऑर्गेनिक होते हैं. इसका एक फायदा ये भी है कि इसमें जमीन की तरह सिर्फ एक लेयर की खेती नहीं होती है. इसके तहत कई लेयर में खेती की जा सकती है.

एक्वापोनिक फार्मिंग में ध्यान रखें ये बातें

यह खेती जमीन पर नहीं होती है और इसमें एक ही पानी का इस्तेमाल मछलियों और सब्जियों के लिए होता है. ऐसे में आपको इस खेती को करने से पहले मछलियों, हाइड्रोपोनिक फार्मिंग और बैक्टीरिया के बारे में अच्छी जानकारी ले लेनी चाहिए. आप चाहे तो इसके लिए एग्रिकल्चर एक्सपर्ट भी हायर कर सकते हैं. आपको ये खेती एक कंट्रोल एनवायरमेंट में करनी होती है, क्योंकि तापमान को 17-34 डिग्री के बीच में कंट्रोल रखने की जरूरत होती है. इस तरह की खेती में सबसे अहम बात ये है कि यह बहुत खर्चीली होती है, इसलिए पहले अपने प्रोडक्ट्स की मार्केटिंग के बारे में सोचें, उसके बाद एक्वापोनिक फार्मिंग के बारे में सोचें.