खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई ने दी अच्छी खबर, नवंबर में घटकर 21 माह के निचले स्तर पर

नवंबर 2022 से पहले मुद्रास्फीति का निचला स्तर फरवरी 2021 में रहा था, जब WPI मुद्रास्फीति 4.83 प्रतिशत पर थी.

खुदरा महंगाई के बाद अब थोक महंगाई ने दी अच्छी खबर, नवंबर में घटकर 21 माह के निचले स्तर पर

Wednesday December 14, 2022,

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विनिर्मित उत्पादों (Manufactured Products), ईंधन और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में नरमी आने से थोक कीमतों पर आधारित मुद्रास्फीति (Wholesale Inflation) नवंबर में घटकर 21 महीने के निचले स्तर 5.85 प्रतिशत पर आ गई. नवंबर 2021 में थोक महंगाई 14.87 प्रतिशत थी. थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित मुद्रास्फीति 19 महीने तक दहाई अंकों में रहने के बाद अक्टूबर में घटकर 8.39 प्रतिशत हो गई थी.

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बुधवार को कहा, ‘‘नवंबर 2022 में मुद्रास्फीति की दर में कमी आने की मुख्य वजह खाद्य पदार्थों, मूल धातुओं, कपड़ा, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद, कागज एवं इससे बने उत्पादों के दामों में गिरावट आना है.’’ नवंबर 2022 से पहले मुद्रास्फीति का निचला स्तर फरवरी 2021 में रहा था, जब WPI मुद्रास्फीति 4.83 प्रतिशत पर थी.

खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई

नवंबर में खाद्य वस्तुओं की मुद्रास्फीति 1.07 प्रतिशत रही, जो इससे पिछले महीने 8.33 प्रतिशत थी. समीक्षाधीन महीने में सब्जियों के दाम घटकर शून्य से नीचे 20.08 प्रतिशत पर आ गए, जो अक्टूबर में 17.61 प्रतिशत पर थे. ईंधन और बिजली में महंगाई दर नवंबर में 17.35 प्रतिशत रही, विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति 3.59 प्रतिशत पर थी.

खुदरा महंगाई कहां आई

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), मौद्रिक नीति बनाने में मुख्य रूप से खुदरा मुद्रास्फीति पर गौर करता है. हाल में जारी आंकड़े बताते हैं कि खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) 11 महीनों में पहली बार, नवंबर 2022 में रिजर्व बैंक के छह प्रतिशत के संतोषजनक स्तर से नीचे रही है. खाद्य पदार्थों की कीमतों में नरमी से खुदरा मुद्रास्फीति नवंबर में घटकर 11 महीने के निचले स्तर 5.88 प्रतिशत पर आ गई है. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा मुद्रास्फीति अक्टूबर, 2022 में 6.77 प्रतिशत और पिछले साल नवंबर में 4.91 प्रतिशत रही थी.

इस साल यह पहला मौका है, जब महंगाई दर भारतीय रिजर्व बैंक के संतोषजनक स्तर (2 से 6 प्रतिशत) से नीचे आई है. केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति 2 प्रतिशत से 6 प्रतिशत के बीच रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है. हालांकि, आरबीआई नीतिगत दर में वृद्धि पर रोक लगाने के निर्णय से पहले अभी और आंकड़ों की प्रतीक्षा कर सकता है. केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति पर लगाम कसने के लिये मई से लेकर अब तक 5 बार में नीतिगत दर रेपो में 2.25 प्रतिशत की वृद्धि की है. दिसंबर की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में महंगाई को काबू में लाने के लिये प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 0.35 प्रतिशत बढ़ाकर 6.25 प्रतिशत कर दिया गया.

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Edited by Ritika Singh