मिलें बेंगलुरु में IBM रिसर्च हेड करने वाली पहली महिला से, एआई से लेकर ब्लॉकचेन तक तकनीकी क्षेत्र में खेल चुकी हैं लंबी और सफल पारी

By yourstory हिन्दी
July 19, 2019, Updated on : Thu Sep 05 2019 07:33:06 GMT+0000
मिलें बेंगलुरु में IBM रिसर्च हेड करने वाली पहली महिला से, एआई से लेकर ब्लॉकचेन तक तकनीकी क्षेत्र में खेल चुकी हैं लंबी और सफल पारी
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गार्गी दासगुप्ता ने इस साल ही मार्च में आईबीएम रिसर्च के बेंगलुरु स्थित ऑफ़िस में कमान संभाली है। इस जिम्मेदारी को निभाने वाली वह पहली महिला हैं। गार्गी ने 'हर स्टोरी' के साथ बातचीत में बताया कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन तकनीकें किस प्रकार से दुनिया को बदलने की क्षमता रखती हैं और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की सहभागिता को बढ़ाने की आवश्यकता क्यों हैं?


गार्गी कहती हैं, "मैं पिछले 15 सालों से आईबीएम नेटवर्क का हिस्सा हूं और यहां पर काम करने का रोमांच अभी भी जारी है। आईबीएम में आपको अपने जुनून को पूरा करने की छूट मिलती है। कंपनी में मौजूद माहौल और सुविधाओं की बदौलत बतौर शोधार्थी मेरा विकास हुआ।"



गार्गी दासगुप्ता

गार्गी दासगुप्ता



योरस्टोरी ने गार्गी से बातचीत की और आईबीएम में उनके लंबे सफ़र के बारे में कई रोचक बातें जानीं। गार्गी ने बताया कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस और ब्लॉकचेन तकनीकों पर काम करते हुए किस तरह से वह उनके साथ काम करने वालीं अन्य महिलाओं को आगे बढ़ने के लिए तैयार कर रही हैं।


आईबीएम रिसर्च, कंपनी के हाइब्रिड क्लाउट प्लेटफ़ॉर्मस पर एआई तकनीक विकसित करने और भारत में रीटेल और ऐग्रीटेक समेत विभिन्न डोमेन्स में उसे अप्लाई करने पर ध्यान केंद्रित करता है। गार्गी बताती हैं कि आईबीएम रिसर्च में उनकी टीम की योजना रहती है कि 'नैरो एआई' को 'ब्रॉड एआई' तक पहुंचाया जाए। लेकिन यह ब्रॉड 'एआई' है क्या और यह किस तरह से इंडस्ट्री के लिए मददगार साबित हो सकता है?


गार्गी कहती हैं,  "ब्रॉड एआई विभिन्न विषयों पर काम कर सकता है और ह्यूमन इंटेलिजेंस को बढ़ावा दे सकता है। ऐसी स्थिति में आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस दुनिया बदलने की ताक़त रखता है। हमारी रिसर्च मुख्य रूप से तीन क्षेत्रों में जारी हैः मानवीय क्षमताओं जैसे कि भाषा, दृष्टिकोण और रीजनिंग आदि में मूलभूत एआई तकनीक की क्षमताओं को और अधिक विकसित करना; एक विश्वसनीय और सुरक्षित प्लैटफ़ॉर्म के माध्यम से बिज़नेस वेंचर्स के लिए एआई तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देना; स्थापित इन्फ़्रास्ट्रक्चर को एआई सुविधाओं के अनुकूल बनाना।"




ऐग्रीटेक इंडस्ट्री के लिए ब्रॉड एआई बेहद कारगर साबित हो सकता है। आईबीएम रिसर्च किसानों की व्यक्तिगत रूप से मदद के लिए सैटलाइट के माध्यम से सूचनाएं मुहैया कराने वाले वैश्विक स्रोतों को एआई तकनीक के साथ जोड़ने का प्रयार कर रही है, ताकि किसानों को उनकी फ़सल की सेहत के बारे में अलर्ट्स मिलते रहे हैं आदि। इस प्रयास के आधार पर ही कृषि क्षेत्र के लिए वॉटसन डिसिज़न प्लैटफ़ॉर्म लॉन्च किया गया। 


रीटेल क्षेत्र में, इसने एआई तकनीक और सॉल्यूशन्स विकसित किए हैं, जिसके माध्यम से ब्रिक और मोर्टार रीटेलर्स डेटा का उपयुक्त इस्तेमाल कर पा रहे हैं, जिनसे उन्हें रीटेल 3.0 के नए क्षेत्र में जाने में मदद मिल रही है। 


गार्गी, आईबीएम रिसर्च इंडिया की निदेशक और सीटीओ, आईबीएम इंडिया ऐंड साउथ एशिया भी हैं। इतना ही नहीं, आईबीएम के साथ वह पिछले 15 सालों से जुड़ी हैं। इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन कर चुकीं गार्गी के लिए नेतृत्व की जिम्मेदारी कोई नई बात नहीं है और उनका कहना है कि वह अपनी टीम के सदस्यों को ध्यान में रखते हुए नेतृत्व की पद्धति तैयार करती हैं। 



गार्गी की परवरिश कोलकाता में हुई है और वह अपने माता-पिता को ही अपना आदर्श मानती हैं। उनकी माता डॉक्टर थीं और उनके पिता इंजीनियर। वह बताती हैं, "मेरे माता-पिता ने तीन बेटियों की परवरिश की और उन्होंने कभी हमें इस बात एहसास नहीं होने दिया कि लड़के या लड़कियों में कोई फ़र्क होता है।"


कोलकाता के जादवपुर विश्वविद्यालय से कम्प्यूटर साइंस और इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद, गार्गी यूएस चली गईं, जहां पर उन्होंने सात साल बिताए और एक स्टार्टअप के साथ भी काम किया। उन्होंने बाल्टिमोर काउंटी की यूनिवर्सिटी ऑफ़ मैरिलैंड से कम्प्यूटर साइंस में पीएचडी भी की है। 2004 में, दिल्ली में आईबीएम रिसर्च की यूनिट शुरू होने जा रही थी और वह इस मौक़े को गंवाना नहीं चाहती थीं। 


गार्गी बताती हैं कि उनके सामने अपने देश के लिए कुछ करने का सुनहरा मौक़ा था और वह इसे ज़ाया नहीं करना चाहती थीं, इसलिए उन्होंने और उनके पति ने वापस भारत आने का फ़ैसला लिया। इस साल ही गार्गी के घर एक नन्हें मेहमान ने दस्तक दी। 




गार्गी मानती हैं कि ब्लॉकचेन हमारे समय की सबसे प्रभावी तकनीकों में से एक है। वह कहती हैं, "एक दशक में एक ऐसी तकनीक आती है, जो रोडमैप को ही बदलकर रख देती है और ब्लॉकचेन वही तकनीक है।" आईबीएम रिसर्च में नई तकनीक विकसित करने के लिए ब्लॉकचेन का इस्तेमाल हो रहा है। गार्गी ने अपनी बातचीत में बताया कि यह तकनीक किस तरह से काम करती है। "मैं मानती हूं कि ब्लॉकचेन और तकनीक की मदद से तैयार हो रहे नए बिज़नेस मॉडल्स डेटा ऐक्सेस को सबके लिए समान बना सकते हैं और हमारी डिजिटल इकॉनमी में लोगों के भरोसे और उत्तरदायिता को बढ़ावा दे सकते हैं।"


एसटीईएम (साइंस, टेक्नॉलजी, इंजीनियरिंग, मैथमैटिक्स) फ़ील्ड्स में अधिक से अधिक लड़कियों और महिलाओं को आकर्षित करने के लिए क्या किया जा सकता है? 


इस सवाल के जवाब में गार्गी कहती हैं, "आईबीएम में हम कामगार महिलाओं को ब्रेक के दौरान अपने कौशल को निखारने और वर्कफ़ोर्स का प्रभावी हिस्सा बनने का मौक़ा देते हैं। इसकी शुरुआत इंटर्नशिप से होती है, जिसके बाद ज़्यादातर सदस्यों को कंपनी में ही शामिल कर लिया जाता है।" कामगार महिलाओं के लिए गार्गी सलाह देती हैं कि उन्हें घर और काम को अलग-अलग करके नहीं देखना चाहिए, बल्कि दोनों  बीच सही तालमेल बैठाने का प्रयास करना चाहिए।