जानिए कैसे नोएडा के इस इलेक्ट्रिकल इंजीनियर ने बनाई 150 करोड़ रुपये के पैनल और स्विचबोर्ड की कंपनी

By Rishabh Mansur
March 06, 2020, Updated on : Fri Mar 06 2020 12:31:31 GMT+0000
जानिए कैसे नोएडा के इस इलेक्ट्रिकल इंजीनियर ने बनाई 150 करोड़ रुपये के पैनल और स्विचबोर्ड की कंपनी
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प्रशांत श्रीवास्तव जब बच्चे थे तभी से उन्हें इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट से प्यार था। पुणे में उन्होंने अपने शुरुआती साल पैनल्स, बस डक्ट्स, वायर और केबलों के साथ बिताए। दरअसल प्रशांत के पिता इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट इंडस्ट्री में काम करते थे। उन्होंने अपने बेटे के साथ मिलकर इलेक्ट्रिकल चीजों पर खूब काम किया।


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प्रशांत श्रीवास्तव, NEC के फाउंडर



जब उनके अधिकांश दोस्त और साथी यह जानने में व्यस्त थे कि उन्हें लाइफ में क्या करना चाहिए तब युवा प्रशांत जान चुके थे कि उन्हें इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट इंडस्ट्री में जाना है। इससे भी आगे बढ़कर, वे हाई-क्वालिटी वाले इंलेक्ट्रिकल कंट्रोल और उससे जुड़े सामान का निर्माण करना चाहते थे जो घरों, ऑफिस और अन्य इमारतों में उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करे।


प्रशांत योरस्टोररी को बताते हैं,

“कम उम्र से, मैंने जटिल विद्युत उपकरणों के काम में गहरी रुचि विकसित की है। मैंने रिसर्च और एक्सपेरिमेंट करना शुरू किया और अपनी रुचि को एक नए स्तर पर ले जाना चाहता था। मैंने एक मैन्युफैक्चरिंग प्रोजेक्ट स्थापित करने का सपना देखा और विभिन्न प्रकार के इनोवेटिव इलेक्ट्रिकल कंट्रोल प्रोडक्ट्स को बनाने के लिए अपनी रिसर्च का उपयोग किया।”


प्रशांत ने महसूस किया कि, स्टार्टअप शुरू करने के लिए, उन्हें इस क्षेत्र में औपचारिक शिक्षा की आवश्यकता थी। उन्होंने पुणे में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की, और स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद, वह इलेक्ट्रिक स्विचबोर्ड के लिए पैनल बनाकर अपनी उद्यमशीलता की यात्रा शुरू करने के लिए तैयार थे। एक इलेक्ट्रिक स्विचबोर्ड एक या एक से अधिक पैनलों से बना होता है, जिनमें से प्रत्येक में बिजली के रीडायरेक्शन के लिए स्विच शामिल होते हैं।


वे कहते हैं,

“2002 में, मैंने भारत में बुनियादी ढांचे के विकास में उछाल के कारण बिजली के पैनल और स्विचबोर्ड की भारी मांग देखी। मुझे लगा कि नोएडा पुणे से बेहतर मार्केट होगी। इसलिए, मैं वहां गया और बिजली के पैनल के लिए एक मैन्युफैक्चरिंग युनिट स्थापित की। यह पूरी तरह से सेल्फ-फंडेंड थी।”


उन्होंने अपने वेंचर का नाम नित्या इलेक्ट्रोकंट्रोल्स (एनईसी) रखा।




शुरुआती दिन

शुरुआथ में इस अनुभवहीन स्टार्टअप को ऑर्डर मिलना मुश्किल हो गया। लेकिन मार्केटिंग पर बड़ा खर्च करने के बजाय, प्रशांत ने अपने प्रोडक्ट को हाई क्वालिटी और सस्ती सुनिश्चित करने के लिए आरएंडडी पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का फैसला किया। उन्होंने स्विचगियर, मोटर कंट्रोल सेंटर और बस डक्ट (bus ducts) बनाना भी शुरू कर दिया। उनकी इस रणनीति ने काम किया। न केवल रियल एस्टेट डेवलपर्स बल्कि बिजली, पेट्रोकेमिकल और दूरसंचार उद्योगों में बड़ी निजी कंपनियों से भी ऑर्डर आने शुरू हो गए। एनईसी तब राज्य बिजली और बिजली उत्पादन बोर्डों के लिए एक पंजीकृत विक्रेता बन गया।


प्रशांत ने एनटीपीसी, जिसे नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड के नाम से भी जाना जाता है, भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल), पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (पीजीसीआईएल), इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड (ईआईएल) और मेकॉन (जिसे मैटलर्जिकल एंड इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स के नाम से जाना जाता है) जैसी दिग्गज कंपनियों के साथ करार किए।


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NEC की टीम


प्रशांत बताते हैं,

“हम कई क्षेत्रों के वेंडर बन गए लेकिन इससे ये हो गया कि एक जगह इकट्ठे नहीं थे। जब भी रियल एस्टेट उद्योग में मंदी आती है, हम प्रभावित होते हैं। लेकिन मंदी सरकारी संगठनों और निजी क्षेत्र से हमारे ऑर्डर को प्रभावित नहीं करती है। यह विविधीकरण हमें अचल संपत्ति क्षेत्र की बाधाओं को दूर करने में मदद करता है।”


वर्तमान परिदृश्य

वर्तमान में, एनईसी 150 करोड़ रुपये का कारोबार कर रहा है और इसमें लगभग 200 कर्मचारी हैं। कारोबार की अब नोएडा और ग्रेटर नोएडा में तीन मैन्युफैक्चरिंग युनिट्स हैं। उनकी पहली मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी 2,200 वर्ग फुट की युनिट है जो स्विचगियर बनाती है, जिसमें कम वोल्टेज, हाई-टेन्सन और मीडियम-वोल्टेज पैनल शामिल हैं।


इसके 600 से अधिक वर्टिकल पैनलों की मासिक विनिर्माण क्षमता है। एनईसी की दूसरी युनिट 75,000 मीटर बस डक्ट और प्रति माह एक लाख गहरे बक्से का निर्माण कर सकती है। इसकी तीसरी युनिट तार, एमसीबी, आरसीसीबी और आइसोलेटर बनाती है।

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नोएडा स्थित NEC की एक यूनिट


कंपनी का दावा है कि यह प्रति माह एमसीबी, आरसीसीबी और ऑसिलेटर के लिए 3।5 लाख मीटर तार और तीन लाख पोल (सुरक्षा उपकरण) का निर्माण कर सकती है।


वे कहते हैं,

“हमें क्वालिटी और पर्यावरण प्रबंधन प्रणालियों के लिए आईएसओ 9001‐2015 और आईएसओ 14001-2015 प्रमाणीकरण के साथ मान्यता प्राप्त है। तीनों इकाइयों में हमारे द्वारा बनाए गए विद्युत उपकरण अत्याधुनिक तकनीक से तैयार और निर्मित किए गए हैं। पूरी रेंज नवीनतम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सीपीआरआई / ईआरडीए / थर्ड पार्टी लैब में परीक्षण की जाती है।"


NEC अपने उत्पादों को बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल और मध्य पूर्व के कुछ देशों में निर्यात करता है। प्रशांत कंट्रोल और स्विचगियर, ट्राइसोलाइट और एडलेक को प्रतियोगियों के रूप में पहचानते हैं, और कहते हैं कि एनईसी के क्वालिटी वाले प्रोडक्ट और सस्ती कीमतें इन कंपनियों के साथ घनिष्ठ प्रतिस्पर्धा के लिए बनाती हैं।


कंज्यूमर सेगमेंट में टैप करना

जैसे-जैसे बिजली के लिए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और अन्य उपयोग के मामलों में वृद्धि जारी रही, प्रशांत ने महसूस किया कि घरों में विद्युत सुरक्षा की मांग ने इस वृद्धि को प्रतिबिंबित किया।


कंज्यूमर सेगमेंट से आने वाली इस मांग को पूरा करने के लिए, और सबसे आगे रहने के लिए, एनईसी ने तारों और केबलों को सीधे आखिरी उपयोगकर्ताओं तक पहुंचने के लिए बनाना शुरू कर दिया। एनईसी ने उपभोक्ताओं की एक श्रेणी की कार्यात्मक जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रकार के तार और केबल बनाने शुरू किए।





वे कहते हैं,

“तारों को महीन तार खींचने वाली मशीनों पर खींचा जाता है, जिसमें उच्च शुद्धता वाले तांबे का उपयोग किया जाता है। यह समान प्रतिरोध, आयाम और लचीलापन सुनिश्चित करता है, जिससे बिजली की लीकेज रुकती है और बिजली की बचत होती है।"


एनईसी कंज्यूमर सेगमेंट में भी विभिन्न प्रकार के मॉड्यूलर स्विच के साथ आ रहा है, और इस प्रयास को फंड देने के लिए अगले पांच वर्षों में 200 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रहा है।


वे कहते हैं,

“यह मेक इन इंडिया विजन को बढ़ावा देने में भी मदद करता है। इस कंज्यूमर सेगमेंट में हमारा निवेश कई रोजगार के अवसर पैदा करेगा और स्वच्छ और हरित ऊर्जा के उपयोग के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करेगा।”


प्रशांत कहते हैं कि अब वह मार्केटिंग पर ध्यान देंगे। उनका कहना है कि उनके पास मार्केटिंग प्लान तैयार है, और कहते हैं कि एनईसी ने पहले ही सोशल मीडिया चैनलों और अपनी वेबसाइट का लाभ उठाना शुरू कर दिया है ताकि अधिक से अधिक उपभोक्ताओं तक पहुंच बनाई जा सके।