कोरोना के खौफ़ से होली हुई बदरंग, डॉक्टरों की मानें तो न होली खेलें, न मिलें

By जय प्रकाश जय
March 09, 2020, Updated on : Mon Mar 09 2020 09:15:31 GMT+0000
कोरोना के खौफ़ से होली हुई बदरंग, डॉक्टरों की मानें तो न होली खेलें, न मिलें
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होली की खुशियों पर कोरोना वायरस की दहशत भारी पड़ रही है। डॉक्टरों की सलाह है कि इस जानलेवा बीमारी से आत्मरक्षा के लिए इस बार न होली खेलें, न होली मिलन कार्यक्रमों में जाएं। इस बीच चीन के वैज्ञानिकों ने संक्रमित कोशिकाओं की पहली बार फोटो हासिल कर लेने का दावा किया है, जिससे इलाज आसान होगा।


फोटो सोशल मीडिया से साभार

फोटो सोशल मीडिया से साभार



दुनिया के सौ से अधिक देशों में तो कोरोना वायरस ने दहशत फैला ही रखी है, भारत में इससे संक्रमित लोगों की संख्या 40 तक पहुंच जाने से होली की खुशियां बदरंग हो रही हैं। केरल, तमिलनाडु में कोरोना वायरस के छह और नए मामले सामने आए हैं। अरुणाचल में विदेशी पर्यटकों पर पाबंदी लगा दी गई है। भारतीय बंदरगाहों पर विदेश क्रूज शिप भी प्रतिबंधित हो गए हैं।


इस वक़्त कोरोना की महामारी से दुनिया भर में 109,600 से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं और 3800 से ज्यादा लोगों की मौत के साथ ही इलाज से 60 हजार लोग बचा भी लिए गए हैं। इस बीच कोरोना से संक्रमित 44 हज़ार लोगों पर एक रिसर्च के बाद चाइनीज़ सेंटर्स ऑफ़ डिज़ीज़ कंट्रोल ने खुलासा किया है कि इस बीमारी से सबसे ज्यादा पुरुषों की मौत हो रही है।


बच्चों और महिलाओं को तुलनात्मक रूप से कम प्रभावित पाया गया है। स्टडी के केंद्र में रहे संक्रमित 44 हजार लोगों में जो नहीं बच सके, उनमें मृतक 2.8 फीसद पुरुष, 1.7 फीसद महिलाएं तथा 0.2 फीसद बच्चे व किशोर रहे हैं। आयुवर्ग के हिसाब से 15 फीसद मृतक 80 साल से ज्यादा के उम्रदराज लोग रहे हैं।


इस बार होली की खुशियों पर कोरोना वायरस की दहशत भारी पड़ रही है। डॉक्टरों की सलाह है कि इस साल होली खेलने और होली मिलन कार्यक्रमों में जाने से बचें।





इस समय दुनिया के कई देशों में कोरोना वायरस, उससे निपटने के उपायों और दवाओं पर तरह-तरह के रिसर्च चल रहे हैं। पहली बार चीन के ही वैज्ञानिक कोरोना की आंतरिक संरचना का पता लगाने के साथ ही ऐसी संक्रमित कोशिकाओं की तस्वीर लेने में भी सफल रहे हैं। इससे कोरोना प्रतिरोधी क्लिनिकल रिसर्च आसान हो जाने की संभावना है।


शेनजेन नैशनल क्लिनिकल मेडिकल रिसर्च सेंटर और सदर्न यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस ऐंड टेक्नॉलजी के वैज्ञानिकों की टीम ने संक्रमित कोशिकाओं को निष्क्रिय करने के बाद उनकी तस्वीर को फ्रोजेन इलेक्ट्रॉन माइक्रोसोप ऐनालिसिस टेक्नोलॉजी की मदद से फोटो में कैद कर लिया है।


उधर, हावर्ड यूनिवर्सिटी के एक ताज़ा रिसर्च में बताया गया है कि कोरोना के संक्रमण में तापमान ही एक मात्र मुख्य कारक नहीं। वैज्ञानिकों ने आगाह किया है कि गर्मी बढ़ने से इसका खतरा कम हो जाने की बात गलत है। इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक्सक्यूटिव डायरेक्टर माइक रायन ने भी कहा है कि मौसम के बहाने इससे सावधानियों को लेकर कोई चूक नहीं होनी चाहिए। गौरतलब है कि वैश्विक हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर चुके डब्ल्यूएचओ का कहना है कि भारत समेत अन्य देशों में गर्मी के मौसम में भी कोरोना का संक्रमण पिछले महीनों की तरह ही जारी रह सकता है।





चाइनीज़ अकेडमी ऑफ साइंसेज के असोसिएट प्रोफेसर यू वेनबिन के रिसर्च पेपर में नॉवेल कोरोना वायरस की पैदाइश यानी यह सबसे पहले कहां संक्रमित हुआ, इसकी अभी तक सही जानकारी पता नहीं चली है। हुबेई (चीन) में सिर्फ ग्रुप-सी के कोरोना वायरस का ही पता चला है लेकिन अमेरिका में इसके पांचों ग्रुप (ए-बी-सी-डी-ई) के वायरस मिले हैं।


लखनऊ (उ.प्र.) में केजीएमयू के सेंटर फार एडवांस रिसर्च के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर शैलेन्द्र सक्सेना की लेटेस्ट रिसर्च में बताया गया है कि कोरोना वायरस 2019 स्ट्रेन (SARS-CoV-2), सार्स वायरस 2003 (SARS-CoV) से काफी मिलता जुलता है। कोरोना और सार्स में 87 प्रतिशत समानता मिली है।


इसलिए इसके मरीज को पेप्टाइड-आधारित वैक्सीन या एंटीजन अटैचमेंट इंहीबिटर भी दिये जा सकते हैं। जहां पूरी दुनिया कोरोना के खौफ़ में डूबी हुई है, तमाम साइबर क्रिमिनल (हैकर्स) सारी मानवता ताक पर रखकर लोगों के बैंक खातों, ई-वॉलेट में सेंध लगाकर ब्लैकमेल करने के लिए गोपनीय डाटा चोरी करने में जुट गए हैं।


संयुक्त राष्ट्र (यूएन) ने अलर्ट किया है कि कोरोना कारण ही पूरी दुनिया में इंटरनेट डिवाइस को भी खतरा पैदा हो गया है। हैकर्स इस वायरस का डर दिखा, इंटरनेट के माध्यम से लोगों को शिकार बना रहे हैं। इस बीच विश्वबैंक ने कोरोना वायरस से प्रभावित देशों की मदद के लिए 12 अरब डॉलर की मदद की घोषणा की है।


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