सांपों के जरिये फैल रहे कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरी दुनिया में दहशत

By जय प्रकाश जय
January 25, 2020, Updated on : Sat Jan 25 2020 08:31:30 GMT+0000
सांपों के जरिये फैल रहे कोरोना वायरस के संक्रमण से पूरी दुनिया में दहशत
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close

शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज थोक बाजार में वन्यजीवों के संपर्क में आए होंगे, जहां सीफूड, मुर्गियां, सांप, चमगादड़ और पालतू मवेशी बिकते हैं। डब्ल्यूएचओ ने इस वायरस को 2019-एनकोवी नाम दिया है। चीन में भारतीय छात्र भी फंसे हैं। अब तक 25 मौतों के साथ लगभग 700 लोग संक्रमित हैं।


h

चीन ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए वुहान सहित पांच और शहरों हुगांग, एझाओ, झिजियांग, क्विनजिआंग को भी सील कर दिया है। अब तक इस खतरनाक वायरस से 25 लोगों की जान जा चुकी है। लगभग 700 लोग संक्रमित हो चुके हैं।


वुहान में केरल के 20 छात्रों समेत कुल 25 छात्र फंसे हुए हैं। केरल के सीएम पी विजयन ने विदेश मंत्री एस जयशंकर से पत्र लिखकर छात्रों को मदद मुहैया कराने की मांग की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस वायरस को 2019-एनकोवी नाम दिया है। इस बीच चीन की ही पेकिंग यूनिवर्सिटी हेल्थ साइंस सेंटर की ही एक ताज़ा रिसर्च में बताया गया है कि कहर बरपा रहे नये तरह के इस वायरस के सांपों के जरिए मनुष्यों तक फैलने की आशंका है।


शोधकर्ताओं का कहना है कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज थोक बाजार में वन्यजीवों के संपर्क में आए होंगे, जहां सीफूड, मुर्गियां, सांप, चमगादड़ और पालतू मवेशी बिकते हैं। मेडिकल वाइरोलॉजी मैग्जीन में प्रकाशित इस अध्ययन में वायरस से हाल ही में फैले निमोनिया की उत्पत्ति के बारे में जानकारी दी गई है।


यह वायरस चीन से शुरू होकर अब हांगकांग, सिंगापुर, थाईलैंड तथा जापान तक फैल चुका है। 2019-एनकोवी का विस्तृत आनुवांशिक विश्लेषण करके और इसकी विभिन्न भौगोलिक स्थानों के अलग-अलग कोरोनावायरस से तुलना करके अध्ययन में यह पाया गया कि यह नया वायरस चमगादड़ों में कोवी के मेल से पैदा हुआ है।


शोधकर्ताओं ने और विश्लेषण करने पर पाया कि 2019-एनकोवी के मनुष्यों तक फैलने से पहले सांपों में रहा है। शोध में पता चला है कि 2019-एनकोवी के लिए सबसे संभावित वन्यजीव सांप है। यह नया वायरस उस वायरस के जैसा है, जिसने 2003 में सार्स (सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम) फैलाया था। सार्स नाम के इस वायरस ने 8,422 लोगों को अपनी चपेट में लिया था और इससे 900 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी।





इस बीच ट्रेवल ऑपरेटर्स और ऑनलाइन एजेंट्स के मुताबिक, वायरस की फैलती दहशत के कारण भारतीय अब अपनी चीन यात्राएं रद्द कर रहे हैं। बीजिंग और शंघाई की यात्रा से संबंधित पूछताछ घटी है। बिजनेस टेवलर टिकट कैंसल करा रहे हैं। भारत में स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से भी इस बारे में एडवायजरी जारी हो चुकी है।


इस वायरस के संक्रमण से बुखार, जुकाम, सांस लेने में तकलीफ, नाक बहना और गले में खराश हो जाती है। यह वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। इसलिए इसे लेकर बहुत सावधानी बरती जा रही है।


यह वायरस दिसंबर 2029 में सबसे पहले चीन में पकड़ में आया था। हमारे देश के सात एयरपोर्ट पर थर्मल स्क्रीनिंग की व्यवस्था शुरू की गई है। चीन और हांगकांग से भारत आने वाले लोगों की जांच की जा रही है। माना जा रहा है कि नववर्ष पर पर्यटन प्रभानित होने का सीधा असर चीन की अर्थव्यवस्था पर पड़ना है।


कोरोना से निपटने के लिए चीन प्रशासन ने सिर्फ 6 दिन में एक डेडिकेटेड अस्पताल बनाने के आदेश दिए हैं। प्रशासन ने सरकारी निर्माण कंपनी को कैडियन जिले में एक इमरजेंसी अस्पताल को डिजाइन करने और बनाने का जिम्मेदारी दी है। फिलहाल, कोरोनो वायरस एसएआरएस (सीवियर एक्यूट रेसिपिरेटरी सिंड्रोम-सार्स) जैसा होने के कारण पूरे विश्व के लिए गंभीर खतरा बन गया है।


चीन के शहर वुहान से बाहर जाने वाली सभी उड़ानों और ट्रेनों को बंद कर दिया गया है। चीन के अधिकारियों ने हुआनगांग और इझोऊ में भी यात्रा पर प्रतिबंध लगा दिया है। लोगों को बिना कारण घर से निकलने से मना किया जा रहा है।


Clap Icon0 Shares
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Clap Icon0 Shares
  • +0
    Clap Icon
Share on
close
Share on
close