मिलिए, 2019 की सुर्खियों में रहीं देश की चर्चित महिला आईएएस-आईपीएस से

2019 में देश की इन महिला आईएएस-आईपीएस ने बटोरी चर्चा, जानें ऐसा क्या किया खास?

मिलिए, 2019 की सुर्खियों में रहीं देश की चर्चित महिला आईएएस-आईपीएस से

Monday December 30, 2019,

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अब एक-एक दिन कर वर्ष 2019 हमेशा के लिए विदा हो रहा है। ऐसे में आइए, इस साल शासन, प्रशासन की कमान संभालने वाली देश की कुछ ऐसी चर्चित महिला आईएएस और महिला आईपीएस अधिकारियों से रू-ब-रू होते हैं, जिनकी विशिष्टता और कार्यशैली को समय समय पर विशेष सुर्खियां मिल चुकी हैं।

IAS

इन महिला अधिकारियों ने बटोरी अपने काम से चर्चा (चित्र क्रमशः हैं।)


उल्लेखनीय है कि सिविल सेवाओं में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को कम समर्थ माना जाता रहा है लेकिन इन महिला सिविल सेवकों, देश की पहली दृष्टिहीन आईएएस प्रांजल, आकांक्षा भास्कर, बी. चन्द्रकला, ए. देवसेना, स्मिता सभरवाल, अपनीत कौर रियात, अरुणा सुंदराराजन, मुग्धा सिन्हा, बन्दना प्रेयसी, ऋतू महेश्वरी, विजया जाधव, आईपीएस संजुक्ता पराशर, डी रूपा, अर्चना रामासुंदरम, मैरीन जोसेफ़, अपराजिता राय, संगीता कालिया, सोनिया नारंग आदि पर हर देशवासी को गर्व है।

आईएएस प्रांजल

देश की पहली नेत्रहीन महिला आईएएस प्रांजल पाटिल उल्‍हासनगर (महाराष्‍ट्र) की रहने वाली हैं। छह वर्ष की उम्र में ही उनकी दृष्टि पूरी तरह खो गई थी। दृष्टि बाधा पारकर आईएएस बन जाना ही प्रांजल की जिंदगी की बेमिसाल कामयाबी रही है। अब तक की जिंदगी में उन्‍होंने कभी हिम्‍मत नहीं हारी है। जेएनयू से एमए प्रांजल ने आंखों से अक्षम लोगों के लिए बने एक खास सॉफ्टवेयर जॉब ऐक्सेस विद स्पीच की मदद ली थी। 

आईएएस आकांक्षा भास्कर

पश्चिम बंगाल के रघुनाथपुर की एसडीओ आकांक्षा भास्कर जब अपने जिला पुरुलिया (प.बंगाल) के संतुरी गाँव के अस्पताल का जायज़ा लेने गईं तो हालात देखकर तभी से वह अपने कार्यक्षेत्र के लोगों का इलाज भी करने लगी हैं। छुट्टी के दिन वह यहाँ के गाँवों में आदिवासियों की डॉक्टर बन जाती हैं। आकांक्षा यूपीएससी परीक्षा पास करने से पहले एमबीबीएस डॉक्टर ही रही हैं। आज आईएएस अधिकारी हैं। 

आईएएस बी. चन्द्रकला  

लेडी दबंग के नाम से मशहूर बी. चन्द्रकला 2008 बैच की आईएएस अफसर हैं। वह यूपी में मेरठ, बुलंदशहर की डीएम रह चुकी हैं। उनकी छवि एक ऐसी अधिकारी की रही है, जो समस्याओं के निदान के लिए सड़क पर ही अधिकारियों, ठेकेदारों से काम का हिसाब मांग लेती हैं। वह अपने फेसबुक पोस्ट्स और ट्वीट्स से भी काफी चर्चित हैं। तेज़ स्वाभाव की वजह से उन्हे कई बार प्रशासनिक कारवाई का भी सामना करना पड़ा है। 

आईपीएस संजुक्ता पराशर

असम के सोनितपुर जिले में बतौर एसपी तैनात आयरन लेडी ऑफ़ असम संजुक्ता पराशर 2006  बैच की बेहद साहसी आईपीएस मानी जाती हैं। वह बोडो उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में मुख्य भूमिका निभाती आ रही हैं। उन्होंने 15 महीने के कार्यकाल में 16 उग्रवादियों को ढेर और 64 को गिरफ्तार कर लिया था। साल 2008 में उनकी पहली पोस्टिंग माकुम में असिस्टेंट कमांडेंट के तौर पर हुई थी। 



आईएएस ए. देवसेना

पेद्दापल्ली (तेलंगाना) में वर्ष 2018 से तैनात कलेक्टर ए. देवसेना राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण सर्वे के मुताबिक, अपने कार्यक्षेत्र को देश का सबसे ज़्यादा साफ़-सुथरा जिला बना चुकी हैं। पर्यावरण संरक्षण, कचरा-प्रबंधन में देश की अव्वल डीएम देवसेना यहाँ के 1.32 लाख घरों में से हर एक के लिए सस्टेनेबिलिटी सिस्टम विकसित कर चुकी हैं। पेदापल्ली को खुले में शौच मुक्त जिले का सर्टिफिकेट मिल चुका है। 

आईएएस स्मिता सभरवाल  

प्यूपल फॉर ऑफिसर के नाम से मशहूर स्मिता सभरवाल 2001 बैच की आईएएस अफसर हैं। उनकी पहली पोस्टिंग चित्तूर जिले में बतौर सब -कलेक्टर हुई और फिर आंध्र प्रदेश के कई जिलों में उन्होंने काम किया। उन्हें अप्रैल, 2011 में करीमनगर जिले का डीएम बनाया गया। उन्होंने हेल्थ केयर सेक्टर में 'अम्माललाना' प्रोजेक्‍ट की शुरुआत की.जिसकी सफलता के चलते स्मिता को प्राइम मिनिस्टर एक्सीलेंस अवार्ड भी दिया गया। स्मिता अपने लिए सबसे बड़ा अवार्ड लोगो का जीवन स्तर सुधारना मानती हैं। 

आईएएस अपनीत रियात

जिला अधिकारी अपनीत रियात के नेतृत्व में ‘प्रोजेक्ट-3डी मानसा’ ने पंजाब के मानसा जिले की तस्वीर बदल डाली है। जनवरी 2019 में जिले में स्वच्छता की दिशा में एक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट 3डी मानसा’ प्रशासन की एक सफल पहल साबित हो चुका है। आज यह मानसा के 15 वार्डो में सफलता पूर्वक चल रही है। जल्द ही इसके पूरे शहर में लागू होने की उम्मीद की जा रही है। 

आईएएस अरुणा सुंदराराजन

अरुणा 1982 बैच की केरला कैडर की आईएएस अफसर हैं। वह वर्तमान में दूरसंचार विभाग सचिव हैं। अपने 30 साल से ज़्यादा के प्रशासनिक करियर में अरुणा अपनी कई योजनाओ के लिए चर्चित रही हैं। वर्ष 1998 में केरल में आईटी विभाग की स्थापना में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अपनी प्रशासनिक कामयाबियों से वह सिद्ध कर चुकी हैं कि महिलाएं जिंदगी के किसी भी क्षेत्र में किसी से कमतर नहीं।



आईएएस मुग्धा सिन्हा

राजस्थान कैडर की 1999 बैच की आईएएस मुग्धा सिन्हा झुंझनू जिले की पहली महिला कलेक्टर हैं। अपनी बेबाकी, ईमानदारी, कार्यशैली के लिए जानी-पहचानी जाने वाली मुग्धा का माफिया और गुंडा तत्वों से जूझते रहने के कारण 15 वर्ष की नौकरी में 14 बार ट्रांसफर हो चुका है। अपने नो नॉनसेंस नेचर के कारण उनको अक्सर तरह तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ जाता है। वह आम लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। 

आईएएस बन्दना प्रेयसी

वर्ष 2003 बैच की बिहार कैडर की आईएएस बंदना प्रेयसी जनता दल- युनाइटेड के विधायक अनंत सिंह का गोदाम सील करने के लिए सुर्खियों में रह चुकी हैं। उन्होंने अपनी बेबाकी और साहसपूर्ण रवैये से बिहार के कई जिलों में शांति स्थापित की है। उन्हें 2009 में सीवान जिले में शांतिपूर्ण ढंग से चुनाव कराने के लिए भी काफी सराहना मिली थी। उन्होंने न सिर्फ दबंगों का निर्भीक सामना किया है, बल्कि उन पर सख्त एक्शन भी ले चुकी हैं। 

आईएएस ऋतु माहेश्वरी

कानपुर में तैनाती के दौरान कानपुर (उ.प्र.) में बिजली चोरी रोकने के साथ ही विद्युत विभाग के राजस्व में इजाफे के लिए चर्चित ऋतु माहेश्वरी 2003 बैच की आईएएस अफसर हैं। पंजाब इंजीनियरिंग कॉलेज से ग्रेजुएट माहेश्वरी को 2011 में केस्को के प्रमुख अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया था। इस समय वह नॉएडा अथॉरिटी की सीईओ हैं। वह अपने ट्विटर अकाउंट पर भी अक्सर सक्रिय रहती हैं। 



आईएएस विजया जाधव

सैंड माफिया, अवैध खनन, अवैध पटाखा फैक्ट्री जैसे कई गैर-कानूनी कामों के लिए कुचर्चित गिरिडीह (झारखण्ड) में एसडीएम आईएएस विजया जाधव अक्टूबर 2017 से कार्यरत हैं। अवैध, अराजक कारोबारों पर काबू करने के लिए निरंतर छापेमारी के कारण 2015 बैच की आईएएस जाधव को उनके कार्यक्षेत्र का बच्चा-बच्चा जानता है। वह राज्य की प्रगति के लिए एक मजबूत व्यवस्था बनाने में जुटी हैं। 

आईपीएस डी रूपा

यूपीएससी की परीक्षा में 43 वीं रैंक हासिल कर चुकीं डी रूपा वर्ष 2000 बैच की कर्नाटक की पहली महिला आईपीएस हैं। वह भरतनाट्यम डांसर भी हैं। वह लगातार अपने करियर की कई चर्चित कार्रवाइयों के लिए जानी जाती हैं। उनकी शादी आईएएस मुनीश मौदगिल से हुई है। वह कई बार बड़े राजनेताओं से टक्कर ले चुकी हैं, जिससे 18 वर्ष के करियर में उनको 41 से अधिक बार ट्रांसफर झेलने पड़े हैं।

आईपीएस अर्चना रामासुंदरम

1980 बैच की आईपीएस अर्चना रामासुंदरम राजस्थान विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर हैं, जहां उन्होंने भारतीय पुलिस सेवा में नियुक्त होने से पहले एक व्याख्याता (लेक्चरर) के रूप में भी कार्य किया था। पुलिस सेवा में आने पर उन्हें तमिलनाडु कैडर आवंटित किया गया। उन्होंने एसपी (प्रोहिबिशन एनफोर्समेंट विंग) के रूप में भी कार्य किया, जहां उन्होंने बड़ी संख्या में अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर चुकी हैं।